तुलसी वृक्ष न जानिये...
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तुलसी वृक्ष न जानिये...

प्रदूषित वायु के शुद्धिकरण में तुलसी का योगदान सर्वाधिक है। तिरुपति के एस.वी. विश्वविद्यालय में किये गये एक अध्ययन के अनुसार तुलसी का पौधा उच्छवास में स्फूर्तिप्रद ओजोन वायु छोड़ता है, जिसमें ऑक्सीजन के दो के स्थान पर तीन परमाणु होते हैं।

प्राकृतिक चिकित्सा में तुलसी का प्रयोग करने से अनेक प्राणघातक और दुःसाध्य रोगों को भी निर्मूल करने में ऐसी सफलता मिल चुकी हैं जो प्रसिद्ध डॉक्टरों व सर्जनों को भी नहीं मिलती।

तुलसी ब्लड कोलस्ट्रोल को बहुत तेजी के साथ सामान्य बना देती है। तुलसी के नियमित सेवन से अम्लपित्त दूर होता है तथा पेचिश, कोलाइटिस आदि मिट जाते हैं। स्नायुदर्द, सर्दी, जुकाम, मेदवृद्धि, सिरदर्द आदि में यह लाभदायी है। तुलसी का रस, अदरक का रस एवं शहद समभाग में मिश्रित करके बच्चों को चटाने से बच्चों के कुछ रोगों में, विशेषकर सर्दी, दस्त, उलटी और कफ में लाभ होता है। हृदय रोग और उसकी आनुबंधिक निर्बलता और बीमारी से तुलसी के उपयोग से आश्चर्यजनक सुधार होता है।

हृदयरोग से पीड़ित कई रोगियों के उच्च रक्तचाप तुलसी के उपयोग से सामान्य हो गये हैं. हृदय की दुर्बलता कम हो गयी है और रक्त में चर्बी की वृद्धि रुकी है। जिन्हें पहाड़ी स्थानों पर जाने की मनाही थी ऐसे अनेक रोगी तुलसी के नियमित सेवन के बाद आनंद से ऊँचाई वाले स्थानों पर सैर-सपाटे के लिए जाने में समर्थ हुए हैं।

प्रतिदिन तुलसी-बीज जो, पान संग नित खाय।

रक्त, धातु दोनों बढ़ें, नामर्दी मिट जाय।।

ग्यारह तुलसी-पत्र जो, स्याह मिर्च संग चार।

तो मलेरिया इक्तरा, मिटे सभी विकार।।

वजन बढ़ाना हो या घटाना हो, तुलसी का सेवन करें। इससे शरीर स्वस्थ और सुडौल बनता है।

तुलसी गुर्दों की कार्यशक्ति में वृद्धि करती है। इसके सेवन से विटामिन ए तथा सी की कमी दूर हो जाती है। खसरा-निवारण के लिए यह रामबाण इलाज है।

तुलसी की 5-7 पत्तियाँ रोजाना चबाकर खाने से या पीसकर गोली बनाकर पानी के साथ निगलने से पेट की बीमारियाँ नहीं होती। मंदाग्नि, कब्जियत, गैस आदि रोगों के लिए तुलसी आदि से तैयार की जाने वाली वनस्पति चाय लाभ पहुँचाती है।

अपने बच्चों को तुलसी पत्र सेवन के साथ-साथ सूर्यनमस्कार करवाने और सूर्य को अर्घ्य दिलवाने के प्रयोग से उनकी बुद्धि में विलक्षणता आयेगी। आश्रम के पूज्य नारायण स्वामी ने भी इस प्रयोग से बहुत लाभ उठाया है।

विशेषः तुलसी की पत्तियों में खाद्य वस्तुओं को विकृत होने से बचाने का अदभुत गुण है। सूर्यग्रहण आदि के समय जब खाने का निषेध रहता है तब खाद्य वस्तुओं में तुलसी की पत्तियाँ डालकर यह भाग लिया जाता है कि वस्तुएँ विकृत नहीं हुई हैं।

इस प्रकार तुलसी बहुत ही महत्त्वपूर्ण वनस्पति है। हमें चाहिए कि हम लोग तुलसी का पूर्ण लाभ लें। अपने घर के ऐसे स्थान में जहाँ सूर्य का प्रकाश निरंतर उपलब्ध हो, तुलसी के पौधे अवश्य लगायें। तुलसी के पौधे लगाने अथवा बीजारोपण के लिए वर्षाकाल का समय उपयुक्त माना गया है। अतः वर्षाकाल में अपने घरों में तुलसी के पौधे लगाकर अपने घर को प्रदूषण तथा अनेक प्रकार की बीमारियों से बचायें तथा पास-पड़ौस के लोगों को भी इस कार्य हेतु प्रोत्साहित करें।

नोटः अपने निकटवर्ती संत श्री आसारामजी आश्रम से पर्यावरण की शुद्धि हेतु तुलसी के पौधे के बीज निःशुल्क प्राप्त किये जा सकते हैं।

सावधानीः उष्ण प्रकृतिवाले, रक्तस्राव व दाहवाले व्यक्तियों को ग्रीष्म और शरद ऋतु में तुलसी का सेवन नहीं करना चाहिए। तुलसी के सेवन के डेढ़ दो घंटे बाद तक दूध नहीं लेना चाहिए। अर्श-मस्से के रोगियों को तुलसी और काली मिर्च का उपयोग एक साथ नहीं करना चाहिए क्योंकि इनकी तासीर गर्म होती है।

सूर्योदय के पश्चात ही तुलसी के क्यारे में जल डालें एवं पत्ते तोड़ें।

 

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