तुलसी एक, लाभ अनेक
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तुलसी एक, लाभ अनेक

तुलसी शरीर के लगभग समस्त रोगों में अत्यंत असरकारक औषधि है ।
* यह प्रदूषित वायु का शुद्धीकरण करती है तथा इससे प्राणघातक और दुःसाध्य रोग भी ठीक हो सकते हैं । 
* प्रातः खाली पेट तुलसी का रस पीने अथवा ५-७ पत्ते चबाकर पानी पीने से बल, तेज और स्मरणशक्ति में वृद्धि होती है ।
* तुलसी गुर्दे की कार्यशक्ति को ब‹ढाती है । कोलेस्टड्ढोल को सामान्य बना देती है । हृदयरोग में आश्चर्यजनक लाभ करती है । आँतों के रोगों के लिए तो यह रामबाण है । 
* नित्य तुलसी-सेवन से अम्लपित्त (एसिडिटी) दूर हो जाता है, मांसपेशियों का दर्द, सर्दी-जुकाम, मोटापा, बच्चों के रोग विशेषकर कफ, दस्त, उलटी, पेट के कृमि आदि में लाभ होता है ।
* चरक सूत्र में आता है कि ‘तुलसी हिचकी, खाँसी, विषदोष, श्वास रोग और पाश्र्वशूल को नष्ट करती है । वह वात, कफ और मुँह की दुर्गंध को नष्ट करती है ।
* घर की किसी भी दिशा में तुलसी का पौधा लगाना शुभ व आरोग्यरक्षक है । 
* ‘तुलसी के निकट जिस मंत्र-स्तोत्र आदि का जप-पाठ किया जाता है, वह सब अनंत गुना फल देनेवाला होता है ।             (पद्म पुराण)
* ‘मृत्यु के समय मृतक के मुख में तुलसी के पत्तों का जल डालने से वह सम्पूर्ण पापों से मुक्त होकर भगवान विष्णु के लोक में जाता है ।
(ब्रह्मवैवर्त पुराण, प्रकृति खंड : २१.४२) 

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