तुलसी के ये गुण जानकर आप चौंक जायेंगे
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तुलसी के ये गुण जानकर आप चौंक जायेंगे

सौन्दर्यः तुलसी की सूखी पत्तियों का चूर्ण पाउडर की तरह चेहरे पर रगड़ने से चेहरे की कांति बढ़ती है और चेहरा सुंदर दिखता है।

मुँहासों के लिए भी तुलसी बहुत उपयोगी है। ताँबे के बर्तन में नींबू के रस को 24 घंटे तक रख दीजिए। फिर उसमें उतनी ही मात्रा में श्यामा तुलसी का रस तथा काली कलौंजी का रस मिलाइये। इस मिश्रण को धूप में सुखाकर गाढ़ा कीजिये। इस लेप को चेहरे पर लगाइये। धीरे-धीरे चेहरा स्वच्छ, चमकदार, सुंदर, तेजस्वी बनेगा व कांति बढ़ेगी।

त्‍वचा के रोग  -

तुलसी के पत्तों को पीसकर लुगदी बनाकर मुँह पर लगाने से मुँहासों के दाग धीरे-धीरे दूर हो जाते हैं। गाजर, तरबूज, प्याज, तुलसी और पालक का रस मुँहासें दूर करता हैं।

सफेद दाग या कोढ़ के अनेक रोगियों को श्यामा तुलसी के उपचार से अदभुत लाभ हुआ है। उनके दाग कम हो गये हैं और त्वचा सामान्य हो गयी है।

 

तुलसी की पत्तियों को नींबू के रस में पीसकर लगाने से दाद-खाज मिट जाती है।

तेल मालिश के साथ सुबह 1 से 2 ग्राम तुलसी की जड़ तथा उतने ही सोंठ के चूर्ण को गर्म पानी के साथ निरंतर सेवन करते रहने से कोढ़ जैसे भयंकर रोग भी दूर होते हैं। यह प्रयोग त्वचा की रूक्षता एवं फटने के रोग को दूर करता है।

तुलसी की पत्तियों को नींबू के रस में पीसकर लगाने से दाद-खाज मिट जाती है।

50 से 200 मि.ली गोमूत्र में 1 से 3 ग्राम हल्दी मिलाकर पीने से या तुलसी का रस लगाने व 5 से 20 मि.ली. पीने से सफेद दाग मिटते हैं।

भांगरे एवं तुलसी के पत्तों का रस (जख्म मिट जाने के बाद) लगाने से सफेद दाग नहीं पड़ते।

बच्‍चों के रोग -

तुलसी के पत्तों का रस शहद में मिलाकर मसूढ़े पर घिसने से बालक के दाँत बिना तकलीफ के उग जाते हैं।

पेट में कृमि होने पर शिशु के गले में छिले हुए लहसुन की कलियों का अथवा तुलसी का हार बनाकर पहनाने से आँतों के कीड़ों से शिशु की रक्षा होती है।

मुंह से  लार टपकती हो तो अदरक एवं तुलसी का रस पिलायें।

तुलसी के पत्तों का 10 बूँद रस पानी में मिलाकर रोज पिलाने से स्नायु एवं हड्डियाँ मजबूत होती हैं।

बालों के रोग - तुलसी का चूर्ण व सूखे आँवले का चूर्ण रात को पानी में भिगोकर रख दीजिये। प्रातः काल उसे छानकर उसी पानी से सिर धोने से बालों का झड़ना रुक जाता है तथा सफेद बाल भी काले हो सकते हैं।

तुलसी के पत्ते पीसकर सिर पर लगा लें। तदुपरांत सिर पर कपड़ा बाँध लें। सारी जुएँ मरकर कपड़े से चिपक जाएँगी। दो-तीन बार लगाने से ही सारी जुएँ साफ हो जायेंगी।

बवासीर में लाभकारी -

खूनी बवासीर (अल्सरेटीव कोलाइस) में तुलसी के बीज उपयोगी हैं। 10 से 20 ग्राम बीज कूटकर रात को मिट्टी के बर्तन में छः गुने पानी में भिगोयें। सुबह उसमें जीरा र शक्कर मिलाकर उस पानी को पीने से दस्त में गिरता खून बंद होता है। फीके दही के साथ तुलसी के बीज का चूर्ण लेने से भी मल के साथ जाता रक्त बंद होता है।

सर्दी, खॉंसी व बुखार में लाभदायक

खाँसी एवं श्वास के रोग में अदरक और तुलसी के रस में शहद मिलाकर लें।

पुदीने एवं तुलसी के पत्तों का काढ़ा बनाकर सुबह-शाम लेने से अथवा पुदीना एवं अदरक का 1-1 चम्मच रस सुबह-शाम लेने से मलेरिया में लाभ होता है।

जो व्यक्ति नित्य प्रातः खाली पेट तुलसी की 4-5 पत्तियों को चबाकर पानी पी लेता है, वह अनेक रोगों से सुरक्षित रहता है। उसके सामान्य रोग स्वतः ही दूर हो जाते हैं। सर्दी के कारण होने वाली बीमारियों में विशेष रूप से जुकाम, खाँसी, ब्रॉंकइटिस, निमोनिया, इन्फ्लूएंजा, गले, श्वासनली और फेफडों के रोगों में तुलसी का सेवन उपयोगी है।

हल्दी का नस्य देने से तथा एक ग्राम शीतोपलादि चूर्ण पिलाने से अथवा अदरक व तुलसी का 2-2 मि.ली. रस 5 ग्राम शहद के साथ देने से लाभ होता है।

पानी में तुलसी एवं पुदीना के पत्ते डालकर उबालें। नीचे उतार कर 10 मिनट ढँककर रखें। फिर उसमें शहद डालकर पीने से बुखार में राहत मिलती है और शरीर की शिथिलता दूर होती है।

गर्म दूध में 1 से 2 ग्राम पिसी सोंठ मिलाकर अथवा तुलसी के पत्ते का 2 से 10 मि.ली. रस एवं अदरक के 2 से 20 मि.ली. रस में एक चम्मच शहद मिलाकर दिन में दो तीन बार लेने से सर्दी में लाभ होता है।

1 से 2 ग्राम मुलहठी एवं तुलसी का 5 से 10 मिलीलीटर रस मिलाकर शहद के साथ चाटने से अथवा 4-5 लौंग को भूनकर तुलसी के पत्तों के साथ लेने से सभी प्रकार की खाँसी में लाभ होता है।

शरीर में हल्का बुखार रहने पर, थर्मामीटर द्वारा बुखार न बताने पर थकान, अरुचि एवं आलस रहने पर संशमनी की दो-दो गोली सुबह और रात्रि में लें। 7-8 कड़वे नीम के पत्ते तथा 10-12 तुलसी के पत्ते खाने से अथवा पुदीना एवं तुलसी के पत्तों के एक तोला रस में 3 ग्राम शक्कर डालकर पीने से हल्के बुखार में खूब लाभ होता है।

तुलसी के हरे पत्तों तथा काली मिर्च को बराबर मात्रा में लेकर, बारीक पीसकर गुंजा जितनी गोली बनाकर छाया में सुखावें। 2-2 गोली तीन-तीन घण्टे के अन्तर से पानी के साथ लेने से मलेरिया में लाभ होता है।

नीम अथवा तुलसी का 20 से 50 मि.ली. काढ़ा या तुलसी का रस 10 ग्राम और अदरक का रस 5 ग्राम पीने से मलेरिया में लाभ होता है।

तुलसी के सात पत्ते, खूबकला छः ग्राम, उन्नाव 4 नग एवं सात मुनक्के पीसकर 2 तोला पानी में मिलाकर, सुखाकर सुबह-शाम देने से बुखार का वेग शांत होता है।

मलेरिया में काली मिर्च, तुलसी और गुड़ का काढ़ा बनाकर उसमें नींबू का रस मिलाकर, दिन में 2-2 या 3-3 घंटे के अंतर से गर्म-गर्म पियें, फिर कम्बल ओढ़कर सो जायें।

श्लेष्मक ज्वर(इन्फलुएन्जा) के रोगी को तुलसी का 20 ग्राम रस, अदरक का 10 ग्राम रस तथा शहद मिलाकर दें।

 

सिरदर्द-चक्‍कर आना

10 से 50 मि.ली. अदरक एवं तुलसी के 5 मि.ली. रस को शहद में लेने से अथवा सोंफ तथा मिश्री को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बनाकर 2 से 5 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम लेने से चक्कर आने पर लाभ होता है।

ऑंखों के रोग -

श्याम तुलसी के पत्तों का दो-दो बूँद रस 14 दिन तक आँखों में डालने से रतौंधी रोग में लाभ होता है। इस प्रयोग से आँखों का पीलापन भी मिटता है।

कानों के  रोग -

सरसों या तिल के तेल में तुलसी के पत्ते डालकर धीमी आँच पर रखें। पत्ते जल जाने पर उतारकर छान लें। इस तेल की दो-चार बूँदें कान में डालने से सभी प्रकार के कान-दर्द में लाभ होता है।

        गले के रोग -

हल्दी एवं काली मिर्च को शहद में मिलाकर टॉन्सिल्स के ऊपर लगाने से एवं तुलसी के 7 पत्ते, नागरबेल का 1 पत्ता और काली मिर्च के 3 दाने चबाने से बारंबार होने वाले टॉन्सिल्स में लाभ होता है।

पेट दर्दः पेट में दर्द होने पर तुलसी की ताजी पत्तियों का 10 ग्राम रस पियें।

 

सुबह  5 से 10 तुलसी के पत्ते एवं दोपहर को ककड़ी खाना तथा रात्रि में 2 से 5 ग्राम त्रिफला का सेवन करना एसिडिटी के मरीजों के लिए वरदान है।

एसिडिटी के रोगी गाजर, पालक, ककड़ी, तुलसी का रस, फलों का रस अधिक लें। अंगूर मोसम्मी तथा दूध भी लाभदायक है।

 

थकान, मंदाग्निः तुलसी के काढ़े में थोड़ी मिश्री मिलाकर पीने से स्फूर्ति आती है, थकावट दूर होती है और जठराग्नि प्रदीप्त रहती है।

 

मोटापा, थकानः तुलसी की पत्तियों का दही या छाछ के साथ सेवन करने से वचन कम होता है, शरीर की चरबी घटती है और शरीर सुडौल बनता है। साथ ही थकान मिटती है। दिनभर स्फूर्ति बनी रहती है और रक्तकणों में वृद्धि होती है।

मूर्च्छा, हिचकीः तुलसी के रस में नमक मिलाकर कुछ बूँद नाक में डालने से मूर्च्छा दूर होती है, हिचकियाँ भी शांत होती हैं।

श्वेत प्रदरः तुलसी की पत्तियों का रस 20 ग्राम, चावल के मॉड के साथ सेवन करने से तथा दूध-भात या घी-भात का पथ्य लेने से श्वेत प्रदर रोग दूर होता है।

शिशुरोगः दाँत निकालने से पहले यदि बच्चों को तुलसी का रस पिलाया जाय तो उनके दाँत सरलता से निकलते हैं। दाँत निकलते समय बच्चे को दस्त लगे तो तुलसी की पत्तियों का चूर्ण अनार के शरबत के साथ पिलाने से लाभ होता है।

बच्चों की सूखी खाँसी में तुलसी की कोंपलें व अदरक समान मात्रा में लें। इन्हें पीसकर शहद के साथ चटायें।

स्वप्नदोषः तुलसी के मूल के छोटे-छोटे टुकड़े करके पान में सुपारी की तरह खाने से स्वप्न दोष की शिकायत दूर होती है।

तुलसी की पत्तियों के साथ थोड़ी इलायची तथा 10 ग्राम सुधामूली (सालम मिश्री) का काढ़ा नियमित रूप से लेने से स्वप्नदोष में लाभ होता है। यह एक पौष्टिक द्रव्य के रूप में भी काम करता है।

1 ग्राम तुलसी के बीज मिट्टी के पात्र में रात को पानी में भिगोकर सुबह सेवन करने से स्वप्नदोष में लाभ होता है।

नपुंसकत्व, दुर्बलताः तुलसी के बीजों को कूटकर व गुड़ में मिलाकर मटर के बराबर गोलियाँ बना लें। प्रतिदिन सुबह-शाम 2-3 गोली खाकर ऊपर से गाय का दूध पीने से नपुंसकत्व दूर होता है, शक्ति आती है और पाचनशक्ति में सुधार होता है।

दमाः दमे के रोग में तुलसी का पंचांग (जड़, छाल, पत्ती, मंजरी और बीज), आक के पीले पत्ते, अडूसा के पत्ते, भंग तथा थूहर की डाली 5-5 ग्राम मात्रा में लेकर उनका बारीक चूर्ण बनायें। उसमें थोड़ा नमक डालिये। फिर इस मिश्रण को मिट्टी के एक बर्तन में भरकर ऊपर से कपड़-मिट्टी (कपड़े पर गीली मिट्टी लगाकर वह कपड़ा लपेटना) करके बंद कर दीजिये। केवल जंगली लकड़ी की आग में उसे एक प्रहर (3 घंटे) तक तपाइये। ठंडा होने पर उसे अच्छी तरह पीसें और छानकर रख दें। दमें की शिकायत होने पर प्रतिदिन 5 ग्राम चूर्ण शहद के साथ 3 बार लें।

कैंसरः कैंसर जैसे कष्टप्रद रोग में 10 ग्राम तुलसी के रस में 20-30 ग्राम ताजा वही अथवा 2-3 चम्मच शहद मिलाकर देने से बहुत लाभ होता है। इस अनुभूत प्रयोग से कई रूग्ण से बीमारी से रोगमुक्त हो गये हैं।

सुबह में पाँच तुलसी के पत्ते खायें। एक-एक घण्टे के अंतर से एक-एक पत्ता मुँह में रखें। 50 ग्राम ताजे दही में 10 ग्राम तुलसी का रस मिलाकर दिन में दो तीन बार लें।

विषविकारः किसी भी प्रकार के विषविकार में तुलसी का रस पीने से लाभ होता है। 20 तुलसी पत्र एवं 10 काली मिर्च एक साथ पीसकर आधे से दो घंटे के अंतर से बार-बार पिलाने से सर्पविष उतर जाता है। तुलसी का रस लगाने से जहरीले कीड़े, ततैया, मच्छर का विष उतर जाता है।

जल जाने परः तुलसी के रस व नारियल के तेल को उबालकर, ठंडा होने पर जले भाग पर लगायें। इससे जलन शांत होती है तथा फफोले व घाव शीघ्र मिट जाते हैं।

विद्युत का झटकाः विद्युत के तार का स्पर्श हो जाने पर या वर्षा ऋतु में बिजली गिरने के कारण यदि झटका लगा हो दो रोगी के चेहरे और माथे पर तुलसी का रस मलें। इससे रोगी की मूर्च्छा दूर हो जाती है। साथ में 10 ग्राम तुलसी का रस पिलाने से भी बहुत लाभ होता है।

ह्दय रोग -

तुलसी के बीज का आधा या 1 ग्राम चूर्ण उतनी ही मिश्री के साथ लेने से अथवा मेथी के 20 से 50 मि.ली. काढ़े (2 से 10 ग्राम मेथी को 100 से 300 ग्राम पानी में उबालें) में शहद डालकर पीने से हृदय-रोग में लाभ होता है।

हृदयपुष्टिः शीत ऋतु में तुलसी की 5-7 पत्तियों में 3-4 काली मिर्च के दाने तथा 3-4 बादाम मिलाकर, पीस लें। इसका सेवन करने से हृदय को पुष्टि प्राप्त होती है।

उल्‍टी-दस्‍त से बचाव-

नींबू का शर्बत या सोडे का पानी लेने से अथवा तुलसी के पत्तों के 2 से 10 मिलिलीटर रस को उतने ही मिश्री अथवा शहद के साथ पीने से उलटी मे लाभ होता है।

तुलसी के पंचांग (जड़, पत्ती, डाली, मंजरी, बीज) का काढ़ा देने से अथवा प्याज, अदरक एवं पुदीने प्रत्येक के 2 से 5 मिलिलीटर रस में 1 से 2 ग्राम नमक मिलाकर देने से दस्त में लाभ होता है।

तुलसी और अदरक का रस शहद के साथ लेने से उलटी में लाभ होता है।

धातुस्राव

1 से 2 ग्राम तुलसी के बीज रात्रि को पानी में भीगोकर सुबह लेने से अथवा बड़ के पत्ते के दूध की कुछ बूँदें बताशे में डालकर रोज सुबह एक बताशे में डालकर रोज सुबह खाकर ऊपर से दूध पीने से 15-20 दिन में धातुस्राव बंद होता है।

घाव होने पर

घाव और छाले होने पर तुलसी के पत्तों का चूर्ण भुरभुराने से अथवा बेल के पत्तों को पीसकर लगाने से लाभ होता है।

प्रसूति पीड़ा में -

तुलसी का 20 से 50 मि.ली. रस पिलाने से प्रसूति सरलता से हो जाती है।

जहरीले जीव-जंतु के काटने  पर -

साँप के काटने पर शीघ्र ही तुलसी का सेवन करने से जहर उतर जाता है एवं प्राणों की रक्षा होती है।

तुलसी के पत्तों को नमक के साथ पीसकर लगाने से भौंरों के दंश की वेदना मिट जाती है।

खटमल, मच्छर आदि जंतु तुलसी की सुगंध सहन नहीं कर सकते।

अफीम, कुचला, धतूरा, तमाकू आदि से किसी भी प्रकार का जहर खा लेने पर तुलसी के पत्तों के 10 से 40 मि.ली. रस में 5 से 20 ग्राम घी मिलाकर खाने से लाभ होता है।

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