Hindi Books

Sukha Sumarudh Adhar Gay (Hindi)

सुख समृद्ध{ का आधार गाय (हिंदी)

ISBN (Paper Back): 978-93-90306-00-8
ISBN (E-Book): 978-93-90306-01-5

" सुख-समृद्धि का आधार : गाय "  गाय की महत्ता व वर्तमान समय में आवश्यकता, सुखी व स्वस्थ जीवन के लिए गाय से कैसे लाभ लें, सामान्य-से-सामान्य व्यक्ति की आर्थिक स्थिति कैसे सुधरे, गाय अर्थतंत्र की रीढ़ कैसे है ? आदि विभिन्न पहलुओं पर इस पुस्तक में प्रकाश डाला गया है ।

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Shrimad Bhagvad Gita (Pocket Size) (Hindi)

श्रीमद् भगवद गीता (पॉकेट साइज़) (हिंदी)

"श्रीमद् भगवद्गीता"   श्लोक - अनुवाद 

भगवान श्री कृष्ण -  

गीता मे हृदयं पार्थ गीता मे सारमुत्तमम् | 

गीता मे ज्ञानमत्युग्रं गीता मे ज्ञानमव्ययम्।। 

गीता मे चोत्तमं स्थानं गीता मे परमं पदम् ।

गीता मे परमं गुह्यं गीता मे परमो गुरुः।।

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Shri Yoga Vasishtha (Part 1) (Hindi)

श्री योग वशिष्ठ (भाग 1) (हिंदी)

"श्री योगवाशिष्ठ महारामायण (PART 1)"  वैराग्य प्रकरण,  मुमुक्षु व्यवहार प्रकरण एवं उत्पत्ति प्रकरण

पूज्य बापूजी कहते हैं -  *आध्यात्मिकता का आखरी सोपान है - श्री वसिष्ठ जी का उपदेश । यह एकदम ऊँचा है, विहंग मार्ग है ।  

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Shri Yoga Vasishtha (Part 2) (Hindi)

श्री योग वशिष्ठ (भाग 2) (हिंदी)

 "श्री योगवाशिष्ठ महारामायण (PART 2)"  स्थिति प्रकरण

पूज्य बापूजी कहते हैं - * यह वह ग्रंथ है जिसे स्वामी रामतीर्थ को, घाटवाले बाबा को, मेरे गुरु जी (स्वामी श्री लीलाशाहजी महाराज) को और दूसरे अच्छे-अच्छे उच्च कोटि के महापुरुषों को अपने आत्मा की मुलाकात हुई । 

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Shri Yoga Vasishtha (Part 3) (Hindi)

श्री योग वशिष्ठ (भाग 3) (हिंदी)

"श्री योगवाशिष्ठ महारामायण (PART 3)"  निर्वाण प्रकरण (पूर्वअर्थ)

पूज्य बापूजी कहते हैं -   *स्वामी रामतीर्थ बोलते थे: राम (स्वामी रामतीर्थ ) के विचार से अत्यंत आश्चर्यजनक और सर्वोपरि श्रेष्ठ ग्रंथ, जो इस संसार में सूर्य के तले कभी लिखे गये,

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Shri Yoga Vasishtha (Part 4) (Hindi)

श्री योग वशिष्ठ (भाग ४) (हिंदी)

"श्री योगवाशिष्ठ महारामायण (PART 4)"  निर्वाण प्रकरण ( उत्तरआर्थ)

पूज्य बापूजी कहते हैं -  * तरंग चाहे कितनी भी बड़ी हो लेकिन है तो अंत में सागर में ही लीन होने वाली और चाहे कितनी भी छोटी हो लेकिन है तो पानी ही । 

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Shri Asharamayana (color) (Hindi)

श्री आशारामायण (हिंदी)

"श्री आशारामायण "  * मनोकामना-प्रदायक एवं पठनीय, चिंतनीय श्री आशारामायण

* श्रीगुरु-महिमा

* प्रार्थना

* गुरुवंदना

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Shri Brahmaramayana (Hindi)

श्री ब्रह्मरामायण (हिंदी)

"श्री ब्रह्मरामायण" ब्रह्म में रमण करनेवाले महापुरुष संसार में आक्रांत लोगों को देखकर करुणावश निर्दुःख पद में पहुँचानेवाले परब्रह्म परमात्मा का दुर्लभ एवं सूक्ष्म ज्ञान जनमानस को सुलभता से मिल सके इसलिए तरह-तरह के प्रयास करते रहते हैं । एक ब्रह्मवेत्ता संत द्वारा लिखा गया

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Tu Gulab Hokar Mahak (Hindi)

तू गुलाब होकर महक (हिंदी)

"तू गुलाब होकर महक..."  जैसे भवन का स्थायित्व एवं सुदृढ़ता नींव पर निर्भर है वैसे ही देश का भविष्य विद्यार्थियों पर निर्भर है । विद्यार्थी एक नन्हे-से कोमल पौधे की तरह होता है । यदि उसे उत्तम शिक्षा-दीक्षा मिले तो वही नन्हा-सा कोमल पौधा भविष्य में विशाल वृक्ष बनकर पल्लवित और

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Mangalmaya Jivan-Mrityu (Hindi)

मंगलमय जीवन-मृत्यु (हिंदी)

" मंगलमय जीवन-मृत्यु"  मृत्यु एक अनिवार्य घटना है जिससे कोई बच नहीं सकता । मृत्यु से सारी जीवनसृष्टि भयभीत है । इस भय से मुक्त होने का कोई मार्ग है ? प्राचीनकाल से ही पल्लवित-पुष्पित हुई भारतीय अध्यात्मविद्या में इसका ठोस उपाय है ।

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Nirbhaya Naada (Hindi)

निर्भय नाद (हिंदी)

ISBN (Paper Back):978-81-944317-5-6
ISBN (E-Book):978-93-90235-58-2

"निर्भय नाद"  भय, चिंता, शोक मिटाकर बुझते हुए हृदयों को प्रकाशित करनेवाला सत्साहित्य

इसमें है : * निर्भयता, निश्चिंतता की युक्तियाँ

* अपने अमरस्वरूप की स्मृति दिलानेवाली उपनिषदों के

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Madhur Vyavhar (Hindi)

(हिंदी)

"मधुर व्यवहार" शास्त्रों का उद्देश्य है - अपना और दूसरों का जीवन मधुमय, प्रभुमय, आत्मानंदमय बनाना । प्रेम, सहानुभूति, सम्मान, मधुर वचन, परहित एवं त्याग-भावना आदि से ही आप हर किसीको सदा के लिए अपना बना सकते हो । जिसके जीवन में व्यवहारकुशलता है वह सभी क्षेत्रों में सफल होता है ।

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Maa ! Tu Kitni Mahan (Hindi)

माँ ! तू कितनी महान... (हिंदी) कितनी

"माँ ! तू कितनी महान..." बालक को सुसंस्कारी बनाने में माता का प्रभाव अधिक होता है क्योंकि गर्भ से ही संतान पर माता के खान-पान, आचार-विचार आदि का प्रभाव पड़ता है । माँ संतान में गर्भावस्था से ही सुसंस्कारों की नींव डाल सकती है । वर्तमान समय में पाश्चात्य कल्चर के दुष्प्रभाव से हमारी संस्कृति की

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Jivan Vikas (Hindi)

जीवन विकास (हिंदी)

ISBN (Paper Back):978-93-89972-30-6
ISBN (E-Book):978-93-90235-83-4

"जीवन विकास" जीवनशक्ति की रक्षा कर जीवन के बहुमुखी विकास हेतु पथप्रदर्शन करनेवाला सत्साहित्य 

इसमें है : * जीवनशक्ति के ह्रास को रोकने व जीवनशक्ति की वृद्धि करने के उपाय

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