प्राणायाम की महत्ता बताकर प्राणायाम करना सिखाया
Ashram India
/ Categories: Sadhana, FeaturedSadhana

प्राणायाम की महत्ता बताकर प्राणायाम करना सिखाया

संध्या के समय प्राणायाम करने की व्यवस्था हमारे ऋषियों ने की है । वायु की अंतरंग शक्ति का नाम है - प्राण । श्वास द्वारा हम इस शक्ति को निरंतर प्राप्त करते हैं । प्राण को ही प्राणशक्ति या जीवनशक्ति भी कहते हैं । इस शक्ति का आयाम अर्थात् विस्तार करने की क्रिया का नाम है - प्राणायाम । ‘मनुस्मृति’ (6.71) में आता है :

दह्यन्ते ध्मायमाननां धातूनां हि यथा मलाः ।

तथेन्द्रियाणां दह्यन्ते दोषाः प्राणस्य निग्रहात् ।।

‘जैसे सोना-चाँदी आदि धातुओं की मैल अग्नि में तपाने से जल जाती हैं, वैसे ही प्राणायाम करने से शरीर की इन्द्रियों के दोष नष्ट हो जाते हैं ।’

‘जाबालदर्शनोपनिषद्’ (6.20) में आता है :

प्राणायामैकनिष्ठस्य न किंचिदपि दुर्लभम् ।

तस्मात्सर्वप्रयत्नेन प्राणायामान्समभ्यसेत् ।।

‘प्राणायाम में अटूट निष्ठा रखनेवाले मनुष्य के लिए कुछ भी दुर्लभ नहीं है । अतः मनुष्य को पूर्ण प्रयत्नशील रहते हुए प्राणायामों का अभ्यास करना चाहिए ।’

प्राणायाम की आवश्यकता क्यों ?

ब्रह्मवेत्ता, शास्त्रवेत्ता पूज्य बापूजी प्राणायाम की आवश्यकता व महत्ता को जानते हैं । इसीलिए पूज्यश्री स्वयं प्राणायाम करते हैं और सत्संगियों को भी करवाते हैं । प्राणायाम दीर्घायुष्य एवं स्वस्थ जीवन जीने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं । इसकी महत्ता बताते हुए पूज्यश्री कहते हैं : ‘‘तुम्हारा हृदय जितना ज्यादा आंदोलित होता है उतना ज्यादा तुम्हारा आयुष्य कम होता है । खरगोश और कबूतर एक मिनट में 38 श्वास खर्च करते हैं, वे 8 साल तक जी सकते हैं । बंदर एक मिनट में 32 श्वास खर्च करता है, वह 10 वर्ष तक जी सकता है । कुत्ता एक मिनट में 29 श्वास खर्च करता है, वह 14 वर्ष तक जी सकता है । घोड़ा एक मिनट में 19 श्वास खर्च करता है, वह करीब 50 साल तक जी सकता है ।

मनुष्य एक मिनट में यदि 13 श्वास खर्च करे तो वह 100 साल तक जी सकता है । अगर आधि-व्याधि है तो उसके कारण जितने अधिक श्वास खर्च करता है तो उतना जल्दी मरता है ।

हाथी एक मिनट में 12 श्वास खर्च करता है, वह करीब 110 साल तक जीता है । सर्प एक मिनट में 8 श्वास खर्च करता है, वह 120 साल तक जी सकता है । कछुआ एक मिनट में केवल 5 श्वास खर्च करता है, वह 150 साल तक जी सकता है ।

चीन के पीकिंग (बीजिंग) शहर के एक 250 वर्षीय वृद्ध से पूछा गया : ‘‘आपकी इतनी दीर्घायु का रहस्य क्या है ?’’

उस चीनी वृद्ध ने जो उत्तर दिया, वह सभीके लिए लाभदायक व उपयोगी है । उसने कहा : ‘‘मेरे जीवन में तीन बातें हैं जिनकी वजह से मैं इतनी लम्बी आयु पा सका हूँ ।

पहली, मैं कभी उत्तेजना के विचार नहीं करता तथा दिमाग में उत्तेजनात्मक विचार नहीं भरता हूँ । मेरा दिल-दिमाग शांत रहे, ऐसे ही विचारों को पोषण देता हूँ ।

दूसरी बात, मैं उत्तेजित करनेवाला, आलस्य को बढ़ानेवाला भोज्य पदार्थ नहीं लेता और न ही अनावश्यक भोजन लेता हूँ । मैं स्वाद के लिए नहीं, स्वास्थ्य के लिए भोजन करता हूँ ।

तीसरी बात, मैं गहरा श्वास लेता हूँ । नाभि तक श्वास भर जाय इतना श्वास लेता हूँ और फिर छोड़ता हूँ । अधूरा श्वास नहीं लेता ।’’

लाखों-करोड़ों लोग इस रहस्य को नहीं जानते । वे पूरा श्वास नहीं लेते । पूरा श्वास लेने से फेफड़ों और दूसरे अवयवों का अच्छी तरह से उपयोग होता है तथा श्वास की गति कम होती है । जो लोग जल्दी-जल्दी श्वास लेते हैं वे एक मिनट में 14-15 श्वास गँवा देते हैं । जो लोग लम्बे श्वास लेते हैं वे एक मिनट में 10-12 श्वास ही खर्च करते हैं । इससे आयुष्य की बचत होती है ।

कार्य करते समय एक मिनट में 12-13 श्वास खर्च होते हैं । दौड़ते समय या चलते-चलते बात करते समय एक मिनट में 18-20 श्वास एवं क्रोध करते समय 24 से 28 श्वास खर्च हो जाते हैं । काम-भोग के समय एक मिनट में 32 से 36 श्वास खर्च हो जाते हैं । जो अधिक विकारी हैं उनके श्वास ज्यादा जल्दी खत्म होते हैं, उनकी नस-नाड़ियाँ जल्दी कमजोर हो जाती हैं । हर मनुष्य का जीवनकाल उसके श्वासों के मुताबिक कम-अधिक होता है । कोई कम श्वास (आयु) लेकर आया हो लेकिन निर्विकारी होगा तो ज्यादा जी लेगा । भले कोई अधिक श्वास लेकर आया हो लेकिन अधिक विकारी जीवन जीने से वह उतना नहीं जी सकता जितना सामान्यरूप से प्रारब्धवश जी सकता था ।

तात्पर्य, हम श्वास जितने कम खर्च करते हैं उतना आयुष्य लम्बा होता है । आयुष्य वर्षों में निर्धारित नहीं होता है, श्वासों पर निर्धारित होता है । तुम जितने भोग में, चिंता में या हर्ष में ज्यादा जीते हो, उतनी तुम्हारे श्वास की गति विषम होती है और जितना तुम समता में जीते हो, उतनी श्वास की गति सम होती है ।

जब तुम क्रोध में होते हो, तब श्वास का लय एक प्रकार का होता है । जब तुम प्रेम में होते हो तब श्वास का लय दूसरे प्रकार का होता है । जब तुम राम में होते हो तो श्वास का लय शांत होता है और जब काम में होते हो तो श्वास का लय कुछ तीव्र होता है ।

यदि तुमको श्वासकला आ जाय, प्राणायाम की विधि आ जाय तो काम, क्रोध, लोभ आदि के समय श्वासों का जो लय चलता है, उसे बदलकर तुम काम के समय राम में जा सकते हो, क्रोध के समय शांत हो सकते हो ऐसी कुंजियाँ ऋषियों ने दे रखी हैं । जरूरत है केवल उस कला को जानने की ।

प्राण अगर तालबद्ध चलने लग जायें तो सूक्ष्म बनेंगे, दोष अपने-आप दूर हो जायेंगे और अशांति अपने-आप दूर होने लगेगी ।

इन्द्रियों का स्वामी मन है और मन का स्वामी प्राण है । योगियों का कहना है कि अगर प्राण पर पूरा प्रभुत्व आ जाय तो तुम चन्द्र और सूर्य को गेंद की तरह अपनी इच्छा के अनुसार चला सकते हो, नक्षत्रों को अपनी जगह से हिला सकते हो । पूर्वकाल में सती शांडिली ने सूर्य की गति को रोक दिया था ।

प्राणायाम के अभ्यास से प्राण सूक्ष्म होते हैं । जिसने अभ्यास करके प्राणों पर नियंत्रण पाकर मन को जीत लिया है, उसने समझो सब कुछ जीत लिया है ।’’                       (क्रमशः) [Rishi Prasad-November-2016-287]

Previous Article संध्या करें उत्साह व तत्परता से
Next Article प्राणायाम के लाभ
Print
3883 Rate this article:
4.3
Please login or register to post comments.

Sadhana Article List

Sadhan Raksha Articles