Suvichar

आज तक तुमने मन की सब बातें मानी है, सत्संग द्वारा प्राप्त विवेक की बात कहाँ मानी है ? कुटुम्बीजन, मित्र, साहब, नेता लोगों की बातें मानी हैं। अब कोई सच्चे साधु-संत की बात मानकर देखो, उनके ज्ञानोपदेश का आदर करके देखो, अमल करके देखो फिर अनुभव करो कि तुम आनन्दस्वरूप होकर छलकते हो कि नहीं।

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