सुविचार

मन-बुद्धि की अपनी मान्यताएं होती है और अधिक चतुर लोग ऐसी मान्यतायों के अधिक गुलाम होते हैं वे कहेंगे : जो मेरी समझ में आएगा वही सत्य | मेरी बुद्धि का निर्णय ही मानने योग्य है और सब झूठ... | 

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