प्रश्नोत्तरी

Q&A Videos

  • Loading videos, Please wait.

Q&A Audios

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 


आध्यात्मिक

RSS

ध्यान विषयक

RSS

तात्त्विक

परमात्मप्राप्ति में नियमो का पालन जरुरी है कि सिर्फ परमात्मा के प्रति तड़प बढ़ाने से ही परमात्मप्राप्ति हो सकती है

परमात्मप्राप्ति में नियमो का पालन जरुरी है कि सिर्फ परमात्मा के प्रति तड़प बढ़ाने से ही परमात्मप्राप्ति हो सकती है

पूज्य बापूजी ! ईश्वरप्राप्ति हमारा लक्ष्य है लेकिन व्यवहार में हम भूल जाते है और भटक जाते है। कृपया व्यवहार में भी अपने लक्ष्य को सदैव याद रखने की युक्ति बताये।

पूज्य बापूजी ! ईश्वरप्राप्ति हमारा लक्ष्य है लेकिन व्यवहार में हम भूल जाते है और भटक जाते है। कृपया व्यवहार में भी अपने लक्ष्य को सदैव याद रखने की युक्ति बताये।

RSS

Q&A with Sureshanand ji & Narayan Sai ji

“देखिये, सुनिए, बुनीये मन माहि, मोह मूल परमार्थ नाही” | इसका मतलब बताइए आप पूज्य श्री - घाटवाले बाबा प्रश्नोत्तरी ४

“देखिये, सुनिए, बुनीये मन माहि, मोह मूल परमार्थ नाही” | इसका मतलब बताइए आप पूज्य श्री - घाटवाले बाबा प्रश्नोत्तरी ४

कैसे जाने की हमारी साधना ठीक हो रही है ? कैसे पता चले के हम भी सही रस्ते है? कौनसा अनुभव हो तो ये माने की हमारी साधना ठीक चल रही है ?

कैसे जाने की हमारी साधना ठीक हो रही है ? कैसे पता चले के हम भी सही रस्ते है? कौनसा अनुभव हो तो ये माने की हमारी साधना ठीक चल रही है ?

RSS

आश्रमवासी द्वारा उत्तर

RSS
Admin
/ Categories: PA-000437-Q&A

माँ आनंदमयी के साथ प्रश्नोत्तर

प्रश्न : आपत्ति को दूर करने का क्या उपाय है ?
माँ : गुरु का उपदेश सुनो, इससे जो नष्ट होनेवाला है उसका नाश हो जायेगा और जो नष्ट होनेवाला नहीं है वह भगवत्तत्त्व प्रकाशित हो जायेगा ।
प्रश्न : गुरु-सेवा क्या है ?
माँ : बिना विचारे गुरु के आदेश का पालन करना ।
प्रश्न : गुरु का आश्रय लिये बिना क्या साधन नहीं होता है ?
माँ : तुम्हारा प्रश्न और इस शरीर का उत्तर ही तो प्रमाण है कि तुम गुरु के निकट ही जिज्ञासु हो । 
प्रश्न : मंत्र किसको कहते हैं और ब्रह्मविद्या क्या है ?
माँ : मन का जो त्राण करता है उसीको ‘मंत्र’ कहते हैं । गुरुजी ने जो मंत्र दिया है जब तक उसका प्रकाश न हो, तब तक नियमित रूप से साधन-भजन करना चाहिए । जिस विद्या से अविद्या का नाश होता है उसे ‘ब्रह्मविद्या’ कहते हैं । यह विद्या जीवन के पथ को प्रकाशित करती है । ब्रह्मविद्या के प्रकाशित होने के लिए ही गुरुजी मंत्रोपदेश देते हैं ।
प्रश्न : किस अर्थ में गुरुदेव हमारे साथ हैं ?
माँ : यह बात अनेक अर्थों में बतायी जा सकती है । अखण्ड भाव से देखो तो गुरुदेव विश्वब्रह्माण्ड के अणु-अणु में व्याप्त हैं - इस अर्थ में वे तुम्हारे साथ हैं । विचार करने पर देखा जाता है कि जगत में एक ही सत् वस्तु है, वही गुरु और वही शिष्य है - इस अर्थ में गुरु तुम्हारे साथ हैं । इसके अलावा मंत्ररूप में गुरु तुम्हारे साथ हैं और विषय को खण्डरूप में देखने पर योगीगण योग के जरिये एक ही समय अनेक जगह रह सकते हैं । शिष्य के मंगल के लिए गुरु योगशक्ति के जरिये खण्डरूप में सभी शिष्यों के साथ सर्वदा रह सकते हैं । 
(लोक कल्याण सेतु : जून 2005)
Print
13881 Rate this article:
3.8
Please login or register to post comments.