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Swine flu (H1N1 flu) - Causes, Precautions, Preventions and Treatment

!!  क्या है ये स्वाइन फ्लू  !!

स्वाइन-फ्लू एक वाइरस के द्वारा होने वाला संक्रमण है, और यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में स्पर्श द्वारा तेजी से फैलता है। स्वाइन-फ्लू का वाइरस सुअर से मनुष्य में आया है और अब यह मनुष्यों में तेजी से फ़ैल रहा है। इसे एच 1 एन 1 फ्लू, पिग फ्लू, होग फ्लू, स्वाइन-इन्फ़्लुएन्ज़ा भी कहते हैं। सबसे पहले स्वाइन-फ्लू का अप्रैल 2009 में यूनाइटेड-स्टेट में पता चला था।
लक्षण :
स्वाइन-फ्लू के लक्षण सामान्य फ्लू के सामान ही होते हैं जैसे -
1) बुखार
2) खांसी
3) गले में दर्द
4) नाक से पानी बहना
5) शरीर में दर्द होना
6) ठण्ड लगना
7) सिरदर्द होना
8) थकान महसूस होना
9) भूख नहीं लगना
10) कुछ लोगों को दस्त और उल्टी भी हो सकती है
इसके अलावा भी कुछ और लक्षण हो सकते है जैसे -
बच्चों में –
1) सांस लेने में तकलीफ
2) उल्टी होना
3) बुखार के साथ रेशेज़ होना

बडों  में –
1) सांस लेने में तकलीफ
2) सीने या पेट में दबाव
3) थकान
4) कमजोरी
कैसे फैलता है स्वाइन-फ्लू -
स्वाइन-फ्लू एक सामान्य फ्लू की तरह ही फैलता है जैसे -
1) संक्रमित व्यक्ति की खांसी या छींक से।
2) स्वाइन-फ्लू से संक्रमित व्यक्ति की चीजों को छूने से।
किसको ज्यादा खतरा है एच 1 एन 1 से –
स्वाइन फ्लू का वाइरस सबसे पहले उन लोगो को अपना शिकार बनाता है जिनकी अपनी रोग प्रतिकारक क्षमता (इम्युनिटी) कम होती है जैसे...
1) गर्भवती महिलाऐ
2) एक साल से कम उम्र के बच्चे
3) 65 से अधिक उम्र के लोग
4) हार्ट के रोगी
5) एचआईवी से पीड़ित व्यक्ति
6) बहुत लम्बे समय से किसी रोग से पीड़ित व्यक्ति को जिसका इम्यून सिस्टम कमजोर हो गया हो
7) हॉस्पिटल में काम करने वाले डॉक्टर, नर्स और अन्य कर्मचारी
कैसे बचें स्वाइन-फ्लू से -
1) खांसते या छींकते समय नाक व मुंह पर टिशू-पेपर रखें और बाद में ठीक से कचरा पेटी में डालें।
2) खांसने या छींकने के बाद हांथ साबुन से धोएं।
3) संक्रमित व्यक्ति को छूने के बाद अपने आँख, मुंह और नाक को न छुएं क्योंकि इनसे संक्रमण जल्दी फैलता है।
4) स्वाइन-फ्लू से संक्रमित व्यक्ति से दूरी बना कर रखें।
5) अगर आप स्वाइन-फ्लू से संक्रमित हैं तो स्कूल या ऑफिस न जाकर घर पर ही रहें।
6) जहां तक हो, भीड़ से बचकर रहें।
7) सेनेटाइजर का उपयोग करना बेहतर होगा।
8) ज्यादा लोगों से मिल रहे हैं तो थोड़ी-थोड़ी देर में हाथ जरूर धोएं।
9) घर में किसी को सर्दी-खांसी-जुकाम हो तो उसे अलग रखें और खांसते समय मुंह पर रूमाल ज़रूर रखें।

आयुर्वेद  : आयुर्वेद के अनुसार तुलसी के पत्ते, कपूर और इलायची का उपयोग स्वाइन फ़्लू के वायरस से रक्षा करने में मददगार साबित होता है इन तीनों को समान मात्रा में लेकर पीस कर कपडे या टिश्यू पेपर में एक छोटी पुड़िया बनाकर अपने साथ रख लेना चाहिए, थोड़ी - थोड़ी देर में इसकी खूशबू सूंघने से शरीर में इस वायरस का मुकाबला करने की शक्ति बढ़ जाती है।
होमियोपैथीक चिकित्सा
*आपके नजदीकी "संत श्री आशाराम जी आश्रमों" में "स्वाइन फ्लू की प्रतिरक्षक होमियोपैथिक दवाइयाँ" उपलब्ध् हो सकती है, या "अहमदाबाद आश्रम में होमियोपैथीक चिकित्सा विभाग" से संपर्क कर उचित मूल्य पर इन्हें प्राप्त किया जा सकता है...इसके अलावा होमियोपैथी में रोगियों की सम्पूर्ण चिकित्सा व्यवस्था तथा स्वस्थ व्यक्तियों के लिए प्रतिरोधक औषधियां उपलब्ध है जिनकी सहायता से सर्व सामान्यजन इस रोग पर काबू पा सकते है.

उपचार : नीम के पत्ते हटाकर जो उसकी डाली होती है ना... डंठली.. वो ११ डंठली (बच्चा है तो ७ और मोटा है तो २१) और ढाई काली मिर्च लेकर पत्थर पे जैसे चटनी बनाते हैं ना, (ऊपर ऊपर का जो छिलका है वो तो निकल जायेगा, गिरी गिरी बचेगी), वो चाट लें और पानी पी लें l तुलसी के पत्ते कभी खा लें, फ्लू में आराम होगा |
- Pujya Bapuji Khargaon 25th Aug. 2009

video: https://www.ashram.org/MultiMedia/Videos/VideoPlayer/TabId/404/VideoId/8839/Natural-Ayurvedic-Remedy-For-Swine-Flu.aspx

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सबका मंगल ,सबका भला का उदघोष करनेवाले प्रातः स्मरणीय पूज्य संत श्री आशारामजी बापू अपने साधकों को भक्तियोग, ज्ञानयोग के साथ-साथ निष्काम कर्मयोग का भी मार्ग बताते है | देशभर में फैली श्री योग वेदांत सेवा समितियों के सहयोग से राष्ट्रभर में नई आध्यात्मिक चेतना जगाकर पूज्यश्री का दिव्य सत्संग एवं दैवीकार्यों का लाभ गाँव-गाँव में जन-जन तक पहुँचाना, अखिल भारतीय श्री योग वेदांत सेवा समिति का मुख्य उद्देश्य है |

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