ब्रह्मचर्यासन

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 ब्रह्मचर्यासन के नियमित अभ्यास से ब्रह्मचर्य-पालन में खूब सहायता मिलती है अर्थात् इसके अभ्यास से अखंड ब्रह्मचर्य की सिद्धि होती है इसलिए योगियों ने इसका नाम ‘ब्रह्मचर्यासन’ रखा है ।

विलक्षण है सर्वसमर्थ गुरुदेव का संस्कृतिप्रेम व परदुःखकातरता

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सन् 2006 में मैं दीपावली पर्व के निमित्त अहमदाबाद आश्रम में अनुष्ठान करने हेतु आयी थी । लगभग 1.5 वर्ष तक मुझे वाटिका में अनुष्ठान करने का सौभाग्य मिला । इस दौरान मुझे गुरुदेव का सत्संग-सान्निध्य, सीधा मार्गदर्शन मिलने से बहुत कुछ सीखने को मिला ।

प्राण धारण करने की विधि

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प्रकृति की समग्र शक्तियों का वह स्वामी बन जाता है क्योंकि उस योगी ने प्राणायाम सिद्ध करके समष्टि प्राण को अपने काबू में किया है । जो प्रतिभावान युगप्रवर्तक महापुरुष मानव-समाज में अद्भुत शक्ति का संचार कर उसे ऊँची स्थिति पर ले जाते हैं, वे अपने प्राण में ऐसे उच्च और सूक्ष्म आंदोलन उत्पन्न कर सकते हैं कि दूसरों के मन पर उनका प्रगाढ़ प्रभाव हो ।

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