Articles
Raghav
/ Categories: Spirituality

Lilashahji Bapuji ke prasang-1 (सरलता और व्यवहारकुशलता)

सरलता और व्यवहारकुशलता


संतों की लीला अनोखी होती है। सामान्य मानव की बुद्धि से तो उसे नापना संभव ही नहीं है। उनकी लीला को समझना यह अपनी सीमित बुद्धि के बाहर की बात है।


एक बार पाटण से पूज्य स्वामीजी प्रस्थान कर रहे थे। भक्तों न एक जीप गाड़ी को सजाकर पूज्य स्वामी जी की भावभीनी विदाई के कार्यक्रम का आयोजन किया। बैण्ड-बाजे समेत हजारों भक्त उस शोभायात्रा में जुड़े हुए थे। शोभायात्रा पाटण के मुख्य मार्गों से गुजरती हुई रेलवे स्टेशन के पास पहुँची।


तब अचानक पूज्य स्वामीजी ने अपने सुसज्जित जीप गाड़ी रुकवा दी। स्वयं नीचे उतर पड़े। बैण्ड-बाजे वालों को, सजी हुई जीप गाड़ीवालों को संकेत कियाः "तुम आगे चलो... मैं जामफल (अमरूद) लेकर आता हूँ।"

एक जामफल वाली के पास जाकर वे जामफल लेने बैठ गये। जामफल के ढेर में से बड़े-बड़े अच्छे तीन जामफल तुलवाये। तौलने में उस जामफलवाली ने डंडी मारी तब पूज्य स्वामी जी ने कहाः
"
तौलने में ठगी मत कर।"
जामफलवाली जरा लोभी थी, अतः ज्यादा भाव माँगने लगी। स्वामी जी ने उससे ठीक भाव लगाने के लिए कहा। भाव की रकझक होने लगी...


जिन्होंने लाखों-करोड़ों रूपये दैवी कार्यों में लुटा दिये थे। ऐसे महापुरुष गलत ढंग से दो पैसे के लिए भी ठगाना नहीं चाहते। हजारों की संख्या में लोग जिनका जय-जयकार कर रहे है उस वाहवाही में भी उनकी मस्ती उलझ नहीं जाती।
'
तुम आगे चलो... मैं जामफल लेकर आता हूँ...' कहने में भी उनकी कितनी सरलता ! कितनी सहजता ! कितनी स्वाभाविकता ! कैसी बेपरवाही !


इस दश्य को मैंने अपनी आँखों से निहारा था। उस समय जामफल चुनने और खरीदने में मैं भी साथ ही था।
एक तरफ स्वामीजी की शोभायात्रा और दूसरी तरफ स्वामी जी इतने सादे और सरल बनकर रास्ते पर से जामफल खरीद रहे हैं ! जितने सरल स्वभाव के उतने ही व्यवहारकुशल भी।


जामफलवाली के साथ हो रहे भाव-ताव को देखकर कई भक्तों ने आकर पूज्य स्वामीजी से प्रार्थना कीः
"
साँई ! जामफलवाली जो पैसे माँगेगी, हम उसे दे देंगे। शोभायात्रा को आगे बढ़ाना है। हजारों लोग आपके दर्शन की इच्छा से आँखें बिछाए मार्ग पर खड़े हैं।"


फिर भी स्वामी जी तो योग्य भाव करके, व्यवहारकुशलता को पूरी तरह निभाकर बाद में ही शोभायात्रा में जुड़े।
सचमुच, उनकी सहजता को किस तरह जान सकोगे? लोग क्या कहेंगे?' इसकी उन्हें जरा भी परवाह नहीं होती ऐसे महापुरुष शाहों के शाह होते हैं

Print
4587 Rate this article:
4.0
Please login or register to post comments.

Activity - Feed

Blog-Evite

Photos

Videos


Latest Sadhaks Blog Posts