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AkhilBharatiya

Divine Satsang by Shri Rama Bhai : Chhattisgarh

10th - 26th May


पूज्य बापूजी के 83 वे अवतरण दिवस उपलक्ष्य में 
श्री रामा भाई जी के सान्निध्य में विशाल हरिनाम संकीर्तन यात्रा :  बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में 
10 मई  सुबह 10 बजे से 
यात्रा रूट :  जगमल चौक हॉटल इंटरसिटी से प्रारम्भ होकर गांधी चौक,गोलबाजार,सदर बाजार,देवकीनन्दन चौक, पुराना सरकंडा होते हुये सत्संग हाल सीपत चौक समापन, बिलासपुर, छत्तीसगढ़ 
संपर्क : 9300235421,9301867372, 9027570456,9300712371


श्री रामा भाई का सत्संग : बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में 
11 व 12 मई सुबह 11 बजे से 
स्थान : संत श्री आशाराम जी बापू आश्रम,सेंदरी, रतन पुर रोड, बिलासपुर, छत्तीसगढ़ 
संपर्क : 9300235421,9301867372, 9027570456,9300712371


वैशाखी पूर्णिमा निमित्त
श्री रामा भाई का सत्संग : रायपुर (छ.ग.) में 
18 मई सुबह 9.30 बजे से 
स्थान : संत श्री आशारामजी बापू आश्रम, लव कुश वाटिका, रायपुर (छत्तीसगढ़)
संपर्क : 9200099248


श्री रामाभाई के सान्निध्य में विद्यार्थी उज्ज्वल भविष्य निर्माण शिविर (केवल भाइयों के लिए) : राजनांदगाँव (छ.ग.) में 
24,25 एवं 26 मई 
विद्यार्थियों के लिए विशेष सत्र 25 एवं 26 मई,दोपहर 12 बजे,तक 
26 मई  दोपहर 2 बजे से ,जाहिर सत्संग सभी के लिए 
स्थान :  
संत श्री आशाराम जी बापू आश्रम ,मोहारा,वार्ड नं 47,राजनादगांव (छ ग)
संपर्क : 9340188734,9752783584,7869838326,9826190154,9229810567
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LocationChhattisgarh
Date_Time10th - 26th May
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सबका मंगल ,सबका भला का उदघोष करनेवाले प्रातः स्मरणीय पूज्य संत श्री आशारामजी बापू अपने साधकों को भक्तियोग, ज्ञानयोग के साथ-साथ निष्काम कर्मयोग का भी मार्ग बताते है | देशभर में फैली श्री योग वेदांत सेवा समितियों के सहयोग से राष्ट्रभर में नई आध्यात्मिक चेतना जगाकर पूज्यश्री का दिव्य सत्संग एवं दैवीकार्यों का लाभ गाँव-गाँव में जन-जन तक पहुँचाना, अखिल भारतीय श्री योग वेदांत सेवा समिति का मुख्य उद्देश्य है |

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FROM “ASUMAL” TO SANT SHRI ASHARAMJI BAPU

Shri Asharamji Bapu was born as "Asumal" in Berani village of Nawabshah district in the state of Sindh (undivided India). As a result of partition of India in 1947; his family leaving their entire properties migrated to Ahmedabad due to intense love for Hindu Dharma and India. Since childhood, he was always seen inclined towards the practice of Yoga and Self-Knowledge. 

At the very young age he developed the yearning for God-Realization which led him to his guru Sai Shri Lilashahji Maharaj. The supremely kind-hearted Sai Shri Lilashahji Maharaj instructed him to do sadhana. After doing intense spiritual practices, on the second lunar day of the bright fortnight of Ashwin of the year 2021 (7th October 1964 according to Gregorian calendar) at 2.30 PM, he attained Self- realization with the grace of his Guru. The perfected Guru made the disciple well established in Guru-Tattva. Asumal became Sant Shri Asharamji Bapu.


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