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Raksha Bandhan

Raksha Bandhan Newsletter - Vedic Rakhi || Chandra-Grahan

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शुभ संकल्पों के द्वारा रक्षा करनेवाला पर्व : रक्षाबंधन (7 अगस्त)
रक्षा-सूत्र बाँधने का उत्तम समय: 11:15 am - 1:52 pm

येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः । तेन त्वां अभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल ।।
ऋषि-पूजन का दिवस, यज्ञोपवीत पहनने व बदलने का दिवस, स्वाध्याय और आत्मिक शुद्धि के लिए अनुष्ठान करने या पूर्णाहुति करने का दिवस है रक्षाबंधन ।

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सर्व मांगल्यकारी वैदिक रक्षासूत्र

वैदिक राखी का महत्व: वैदिक राखी में डाली जानेवाली वस्तुएँ हमारे जीवन को उन्नति की ओर ले जानेवाले संकल्पों को पोषित करती हैं ।
(१) दूर्वा : जैसे दूर्वा का एक अंकुर जमीन में लगाने पर वह हजारों की संख्या में फैल जाती है, वैसे ही ‘हमारे भाई या हितैषी के जीवन में भी सद्गुण फैलते जायें, बढ़ते जायें...’ इस भावना का द्योतक है दूर्वा । दूर्वा गणेशजी की प्रिय है अर्थात् हम जिनको राखी बाँध रहे हैं उनके जीवन में आनेवाले विघ्नों का नाश हो जाय ।
(२) अक्षत (साबूत चावल) : हमारी भक्ति और श्रद्धा भगवान के, गुरु के चरणों में अक्षत हो, अखंड और अटूट हो, कभी क्षत-विक्षत न हो - यह अक्षत का संकेत है । अक्षत पूर्णता की भावना के प्रतीक हैं । जो कुछ अर्पित किया जाय, पूरी भावना के साथ किया जाय ।
(३) केसर या हल्दी : केसर की प्रकृति तेज होती है अर्थात् हम जिनको यह रक्षासूत्र बाँध रहे हैं उनका जीवन तेजस्वी हो । उनका आध्यात्मिक तेज, भक्ति और ज्ञान का तेज बढ़ता जाय । केसर की जगह पिसी हल्दी का भी प्रयोग कर सकते हैं । हल्दी पवित्रता व शुभ का प्रतीक है । यह नजरदोष व नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करती है तथा उत्तम स्वास्थ्य व सम्पन्नता लाती है ।
(४) चंदन : चंदन दूसरों को शीतलता और सुगंध देता है । यह इस भावना का द्योतक है कि जिनको हम राखी बाँध रहे हैं, उनके जीवन में सदैव शीतलता बनी रहे, कभी तनाव न हो । उनके द्वारा दूसरों को पवित्रता, सज्जनता व संयम आदि की सुगंध मिलती रहे । उनकी सेवा-सुवास दूर तक फैले ।
(५) सरसों : सरसों तीक्ष्ण होती है । इसी प्रकार हम अपने दुर्गुणों का विनाश करने में, समाज-द्रोहियों को सबक सिखाने में तीक्ष्ण बनें ।

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A festival for Self – Development

This is the festival for self-development. So, on this festival of Nariali Poonam, Raksha Bandhan or Shravani Poonam, which gives us the message of awakening, we should make a firm resolve to attain Divine Joy, Divine Knowledge and Divine Love in this life itself.

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गुरु संकल्प को साकार करनेवाली : श्रावणी पूर्णिमा

गुरुपूर्णिमा गुरु संकल्प करानेवाली पूर्णिमा है । यह लघु इन्द्रियों, लघु मन और लघु विकारों में भटकते हुए जीवन में से गुरु सुख-बडा सुख, आत्मसुख, गुरुज्ञान-आत्मज्ञान की ओर ले चलती है । लघु ज्ञान से लघु जीवनों से तो यात्रा करते-करते चौरासी लाख जन्मों से यह जीव भटकता आया । तो आषाढी पूर्णिमा, गुरुपूर्णिमा के बिल्कुल बाद की जो पूर्णिमा है, वह श्रावणी पूर्णिमा है; गुरुपूर्णिमा का संकल्प साकार करने के लिए है रक्षाबंधन पर्व, नारियली पूनम, श्रावणी पूनम। गुरुपूर्णिमा का गुरु संकल्प क्रिया में लाने की यह पूर्णिमा है । उसे व्यवहार में लाने के लिए यह पूर्णिमा प्रेरणा देती है ।

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Actual Meaning of Raksha Bandhan

Pujya Bapuji ka Satsang

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Raksha Bandhan Special Satsang Ganga

 

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Chandra-Grahan on 7th August

 

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Aap Sabhi Ko Raksha Bandhan ke Parv ki Badhai!!

 

Previous Article 23rd July 2017
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