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पवनमुक्तासन
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पवनमुक्तासन

शरीर में स्थित पवन (वायु) यह आसन करने से मुक्त होता है इससे इसको पवनमुक्तासन कहा जाता है । ध्यान मणिपुर चक्र में श्वास पहले पूरक फिर कुम्भक और   रेचक

विधि : भूमि पर बिछे हुए आसन पर चित्त होकर लेट जायें पूरक करके फेफडों में श्वास भर लें अब किसी भी एक पैर को घुटने से मोड दें दोनों हाथों की अंगुलियों को परस्पर मिलाकर उसके द्वारा मोडे हुए घुटनों को पकडकर पेट के साथ लगा दें फिर सिर को ऊपर उठाकर मोडे हुए घुटनों पर नाक लगायें दूसरा पैर जमीन पर सीधा रहे इस क्रिया के दौरान श्वास को रोककर कुम्भक चालू रखें सिर और मोडा हुआ पैर भूमि पर पूर्ववत् रखने के बाद ही रेचक करें दोनों पैरों को बारी बारी से मोडकर यह क्रिया करें दोनों पैर एक साथ मोडकर भी यह आसन हो सकता है लाभ : पवनमुक्तासन के नियमित अभ्यास से पेट की चरबी कम होती है पेट की वायु नष्ट होकर पेट विकार रहित बनता है कब्ज दूर होता है पेट में अफरा हो तो इस आसन से लाभ होता है प्रातःकाल में शौचक्रिया ठीक से होती हो तो थोडा पानी पीकर यह आसन १५-२० बार करने से शौच खुलकर होगा

 लाभ : इस आसन से स्मरणशक्ति बढती है बौद्धिक कार्य करनेवाले डॉक्टर, वकील, साहित्यकार, विद्यार्थी तथा बैठकर प्रवृत्ति करनेवाले मुनीम, व्यापारी आदि लोगों को नियमित रूप से पवनमुक्तासन करना चाहिए

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