बाल्यकाल में किससे सावधान रहना चाहिए
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बाल्यकाल में किससे सावधान रहना चाहिए

दुष्टों के संग से, स्वार्थियों की अक्ल और होशियारी से, मूर्खों से । अदूरदर्शन,थोड़ी सी चोरी, थोड़ा-सा आलस्य, थोड़ा-सा ऐसा-वैसा स्वभाव, थोड़ा-सा यह चलेगा, जरा यह चलेगा, चल जायेगा-चल जायेगा - ऐसा करते-करते अपने सद्गुण छोड़ते जाते हैं और 'दुर्गुण चल जायेगा' - ऐसा सोचते हैं तो इससे वह महादुर्गुणी हो जाता है।

पाँच सावधानियाँ हैं :
(१) अभिमान न करें -  पढ़ाई में, कबड्डी में, खेल में जीत गये तो अभिमान न आये ।
(२) किसी पर क्रोध न करें ।
(३) 'पाठ बाद में याद कर लेंगे' इस प्रकार का प्रमाद न करें । इससे भी बच्चों का विकास होगा।
(४) संयम रखें - बुरी नजर से लड़की- लड़के को देखे, लड़का लड़की को देखे, इससे जीवनीशक्ति नाश होती है।
(५) आलस्य न करें - यह भी विद्यार्थी जीवन में बहुत नुकसान करता है। जिस समय जो काम करना है, तत्परता से करो । लापरवाही से काम को बिगाड़े नहीं तो अच्छे विद्यार्थी बनेंगे ।
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