अच्छी संगत औ' संस्कार, पाओ आकर 'बाल संस्कार'
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अच्छी संगत औ' संस्कार, पाओ आकर 'बाल संस्कार'

बापूजी के हम बच्चे हैं, 
          इसीलिए तो हम अच्छे हैं।
बाल संस्कार' नित जाते हैं,
           शुभ संस्कार हम पाते हैं।
 ब्रेड,चाय,कोल्डड्रिक छोड़,
           नित घी दूध हम खाते हैं।
हम प्रातः ही उठ जाते हैं, 
          फिर कराग्रे लक्ष्मी गाते हैं।
माता पिता गुरु चरणों में, 
            श्रद्धा से शीश झुकाते हैं।
बापूजी के हम सब बच्चे, 
         कभी नहीं हम रहते कच्चे।
नित करते हम संध्या ध्यान, 
         बनेंगे सहज सफल महान।
 सदी,गर्मी या हो बरसात, 
         हम नित सुबह नहाते हैं ।
 करके योग औ' प्राणायाम, 
        संयम,स्वास्थ्य बढ़ाते हैं।
चित्त को शांत एकाग्र करके, 
           जपयोग में नित लगाते हैं। 

विद्यादायक सुखद मंत्र से, 
              बुद्धि कुशाग्र बनाते हैं।
 गुरुदेव से सारस्वत्य मंत्र तो     
          किस्मतवाले ही पाते है
समता-प्रसन्नता है सर्वोपरि भक्ति,     
           बापू ये बताते हैं।
 हास्य-प्रयोग नित्य करके हम, 

        प्रेमाभक्ति जगाते हैं।

 हम सब बापू के बच्चे हैं, 
             बापू हमारे सच्चे हैं।
व्यवहार में भी कुशल बन, 
          हम अध्यात्म बढ़ाते हैं।
 कैसे खाना कैसे पीना, 
            कैसे उठना कैसे जीना। 
 सफल बनेगा कैसे जीवन,
            सब कुछ हमें सिखाते हैं

 अच्छी संगत औ संस्कार, पाओ आकर बाल संस्कार ।।

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