दिशा एवं विदिशा के भूखण्ड व भवन

दिशा एवं विदिशा के भूखण्ड व भवन
भवन या भूखण्ड का उत्तर, चुम्बकीय उत्तर से 22.5◦ से कम घूमा होने से ऐसे भवन या भूखण्ड को दिशा में ही माना जाता है जबकि 22.5◦ या उससे अधिक घूमा हुआ हो तो उसे विदिशा या तिर्यक दिशा का भूखण्ड या भवन कहा जाता है। निम्न चित्र से स्पष्ट हो जायेगा।

वास्तु से सर्वसाधारण मूलभूत नियम
वास्तु नियमों को समझाने हेतु हम वास्तु को 3 भागों में विभक्त कर सकते हैं।
भूमि या भूखण्ड का वास्तु।
भवन का वास्तु।
आन्तरिक सज्जा का वास्तु।

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