युवाओं की एक बड़ी समस्या व उसका समाधान
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युवाओं की एक बड़ी समस्या व उसका समाधान

- भगवत्पाद साँईं श्री लीलाशाहजी महाराज

कई नौजवान यह पूछ रहे हैं कि ‘हम प्रयत्न करते हुए भी स्वप्नदोष को रोक नहीं पाते हैं, इसके लिए क्या करना चाहिए ?’ पहले यह समझना चाहिए कि स्वप्नदोष क्या है ? ‘स्वप्नदोष’ का अर्थ है - नींद में स्वयं को रोक न पाना तथा वीर्य का पात होना अथवा निकल जाना, जिसे ‘एहतिलाम’ भी कहते हैं । कई नौजवान पहले भूलवश या कुसंग में पड़कर गुप्त ताकत को व्यर्थ गँवाने की आदत डालते हैं तो कई थोड़ा आनंद लेने हेतु अपनी अनमोल वस्तु ‘वीर्य’ हाथ द्वारा व दूसरी बुरी आदतों द्वारा व्यर्थ बरबाद करते हैं । उसके बाद धीरे-धीरे स्वप्नदोष होना शुरू होता है, जिसमें पहले तो रात को कभी-कभी स्वप्नदोष होता है परंतु फिर सप्ताह में कोई दिन खाली नहीं जाता है ।

बच्चे पैदा करनेवाली शक्ति को बचपन में ही नष्ट करने से कमर, नसें, दिल, दिमाग, आँतें आदि कमजोर होने से भोजन पूरी तरह हजम नहीं होता । फिर आजकल का समय तो ऐसा आ गया है कि बीमार होते हुए भी सारा दिन दुकान आदि पर बैठे रहते हैं । सुबह-शाम एक-दो मील पैदल चलना या व्यायाम करना भी लोगों से नहीं होता, और तो और रात को सोने से कुछ समय पहले घर के आँगन में ही घूमना-फिरना भी नहीं होता, जिस कारण अच्छी नींद नहीं आती है । परंतु फिल्में व नाटक देखना, अश्लील गाने सुनना, रजोगुणी राग सुनना, गंदी तस्वीरें देखना, अश्लील बातें करना व उन्हें बार-बार दोहराना, अपने मन व दिमाग में काम-वासना की बातें सोचते रहना अथवा मासूम बच्चों के दिलों पर ऐसी बुरी बातों का बीज बोना ही अपना कर्तव्य समझ रहे हैं ।

आजकल सोते समय सबको बिस्तर नर्म चाहिए तथा भोजन भी तामसी चाहिए, फिर यदि स्वप्नदोष हुआ तो कौन-सी बड़ी बात है ? स्वप्नदोष को रोकने के लिए पूरे-पूरे सदाचार की आवश्यकता है । कहावत है कि ‘संग1 तैरावे, कुसंग डुबोवे ।’ कुसंग करने के कारण व्यक्ति न सिर्फ बदनाम होता है बल्कि बीमार भी होता है, उसे गुप्त रोग होते हैं । व्यर्थ, अश्लील पुस्तक पढ़ने व चित्र देखने से उनका मन पर गहरा प्रभाव पड़ता है अतः घर में सुंदर धार्मिक पुस्तकें व महात्माओं के, संयमी पुरुषों के चित्र लगाने चाहिए, जिससे सुंदर विचार प्रकट हों । संगदोष अर्थात् बुरे संग ने बड़े-बड़ों को बरबाद कर दिया है । याद रखना चाहिए कि अच्छा संग वह वस्तु है जो मनुष्य को देवता बना देती है तथा कुसंग मनुष्य को हैवान से भी बुरा बना देता है । हम जो बुरा व्यवहार करते हैं, उससे न सिर्फ स्वयं के लिए बल्कि आम लोगों के लिए भी परेशानी पैदा करते हैं ।

1. सत्संग

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A big problem faced by youth and its solution

Many youths ask, ‘Despite making all efforts, we are not able to stop nocturnal discharge; what should we do?’ First, one should understand what nocturnal discharge or night pollution is. Nocturnal discharge means involuntary seminal discharge during sleep. It is also called Ehtilaam. Many youths falling prey to bad company, or by mistake, develop the habit of wasting their sexual energy. To get a little pleasure, some youths waste their precious sexual fluid- ‘semen’ by masturbation or by other bad habits. After that, nocturnal discharge starts occurring. Initially it happens only occasionally, but later on it starts happening daily.

Due to wasting sexual energy during childhood (puberty), the waist, nerves, heart, brain and intestines, etc. become weak and as a result of this, food doesn’t get digested properly. Nowadays, some people sit in their shops or other places even when they are sick, the whole day. People are not even able to walk 1-2 miles a day in the morning or evening or do physical exercise. People are not even able to have a stroll before sleep, as a result of which they do not get proper sleep. People consider it their duty to watch movies and dramas, listen to lewd songs and passionate music, watch porn, indulge in obscene talks repeatedly, entertain lustful thoughts and sow the seeds of such bad habits in the hearts of children.

Nowadays, people want soft beds to sleep on and tamasic food; no wonder they get nocturnal discharge. Absolute good conduct is required to stop nightfall. There is a saying that ‘Good company elevates and bad company destroys.’ Due to bad company, one does not just get ill-repute but also becomes ill and contracts of venereal diseases. Reading vulgar books or seeing obscene pictures exercises a great influence on the mind. Hence one should keep good religious books at home and should display pictures of Saints and continent persons instead, so that one gets sublime thoughts. Bad company has destroyed even virtuous people. Remember, good company makes man a god and bad company makes man worse than the devil. Our evil conduct creates trouble not only for ourselves but also for common people.


[August 2018]


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