संत श्री आशारामजी बापू की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में होनेवाली सत्प्रवृत्तियों की झलक
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संत श्री आशारामजी बापू की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में होनेवाली सत्प्रवृत्तियों की झलक

संत श्री आशारामजी बापू की प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में होनेवाली सत्प्रवृत्तियों की झलक

सत्संग-कार्यक्रमों एवं विद्यार्थी उत्थान शिविरों द्वारा जनजागृति : सत्संग-कार्यक्रम, विद्यार्थी शिविर देश के विभिन्न शहरों, गाँवों व विद्यालयों में अविरत जारी रहते हैं । जिनके माध्यम से समाज में सद्विचारों व संस्कारों का प्रचार होता है।

धर्मांतरण से रक्षा एवं धर्मनिष्ठा की जागृति : विभिन्न सेवा-प्रवत्तियों द्वारा हिन्दू धर्म के प्रति लोगों में दृढ़ निष्ठा जागृत की जा रही है एवं धर्मांतरण पर रोक लगाने का कार्य अथक रूप से जारी है । पूज्य बापूजी ने देश-विदेश में घूम-घूमकर तथा शबरी कुम्भ, नर्मदा कुम्भ आदि आदिवासी क्षेत्रों में भी सतत दस्तक देकर आम जनता के साथ-साथ पिछड़े क्षेत्रों के लोगों में भी धर्म-निष्ठा को मजबूत किया है । जाने-माने हिन्दुत्ववादी सुब्रमण्यम स्वामी ने घोषणा की है कि धर्मांतरण का प्रतिकार करने में संत आशारामजी बापू सबसे आगे हैं । इसी वजह से उन्हें बोगस केस में फँसाया गया है । वे पूरी तरह निर्दोष हैं ।

  आदिवासी, वनवासी व पिछड़े लोगों का विकास धर्मांतरण से रक्षा एवं धर्मनिष्ठा की जागृति : ‘वनवासी उत्थान केन्द्रों’ द्वारा देश के विभिन्न क्षेत्रों में विशेष सेवा जैसे नियमित निःशुल्क अनाज-वितरण, भंडारों (भोजन-प्रसाद वितरण) के अलावा समय-समय पर बापूजी द्वारा वनवासियों को अन्न, वस्त्र, बर्तन, बच्चों को नोटबुकें, मिठाइयाँ आदि के वितरण व भंडारे के साथ नकद दक्षिणा देने का कार्य बड़े पैमाने पर होता है। पिछड़े क्षेत्रों में कीर्तन व भंडारों का नियमित आयोजन आश्रम के सेवाकार्यों का एक मुख्य अंग बन चुका है। आज तक हजारों भंडारों द्वारा लाखों-लाखों दीन, अनाथ, गरीब, आदिवासी लाभान्वित हो चुके हैं।

अभावग्रस्त विद्यार्थियों को मदद : गरीब, अनाथ, असहाय विद्यार्थियों में नोटबुकें, पाठय-पुस्तकें, गणवेश आदि का निःशुल्क वितरण किया जाता है। विद्यार्थियों के लिए विशेष नोटबुकों का निर्माण किया जाता है, जिनमें नैतिक शिक्षाप्रद सुवाक्य-चित्र, प्रेरक प्रसंग, स्मरणशक्ति के विकास के उपाय व सफलता की कुंजियाँ दी जाती हैं।

ग्रामीण व आदिवासी पाठशालाओं में बिछात, डेस्क, कुर्सियाँ आदि भी प्रदान किये जाते हैं।

राशनकार्डों द्वारा अनाज आदि का वितरणः गरीबों, अनाश्रितों व विधवाओं के लिए आश्रम द्वारा हजारों राशनकार्ड वितरित किये गये हैं, जिनके माध्यम से उन्हें हर माह अनाज व जीवनोपयोगी वस्तुओं का वितरण किया जाता है।

‘भजन करो, भोजन करो, पैसा पाओ’ योजना : आश्रम-संचालित इस योजना के अंतर्गत जिनके पास आय का साधन नहीं है या जो नौकरी-धंधा करने में सक्षम नहीं हैं उन्हें सुबह से शाम तक जप, कीर्तन, सत्संग का लाभ देकर भोजन और पैसा दिया जाता है ताकि गरीबी, बेरोजगारी घटे साथ ही जप-कीर्तन से वातावरण की शुद्धि हो।

अनाथालयों में सेवाकार्य : अनाथालयों में जाकर जीवनोपयोगी सामग्री का वितरण किया जाता है।

बाल संस्कार केन्द्र : आश्रम संचालित हजारों ‘बाल संस्कार केन्द्र’ विद्यार्थियों में सुसंस्कार सिंचन के दैवी कार्य में रत हैं।

युवाधन सुरक्षा अभियान : विद्यार्थियों, युवाओं व जनसामान्य में लाखों की संख्या में ‘युवाधन सुरक्षा’ (दिव्य प्रेरणा-प्रकाश) पुस्तकें बाँटी गयी हैं, साथ ही हजारों ‘युवा उत्थान कार्यक्रम’ आयोजित किये जा चुके हैं। ‘युवाधन सुरक्षा अभियान’ से युवानों में नवचेतना आयी है।

युवा सेवा संघ : इसके द्वारा भारतभर में संस्कार सभाएँ चलायी जा रही हैं। हजारों की संख्या में युवान इस संगठन से जुड़कर अपना सर्वांगीण विकास कर रहे हैं।

महिला उत्थान मंडल : महिलाओं में भ्रूणहत्या आदि घृणित कर्मों के बारे में विरक्ति पैदा करके उनकी सुषुप्त शक्तियों को जगाने के लिए यह संगठन भी संस्कार सभाएँ चला रहा है। युवतियों एवं महिलाओं के शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक विकास हेतु इस संगठन द्वारा विभिन्न कार्यक्रम चलाये जाते हैं।

‘संत श्री आशारामजी गुरुकुलों’ की स्थापना : इनमें विद्यार्थियों को लौकिक शिक्षा के साथ-साथ स्मृतिवर्धक यौगिक प्रयोग, जप, योगासन, प्राणायाम, ध्यान आदि के माध्यम से उन्नत जीवन जीने की कला सिखायी जाती है । उनमें सुसंस्कारों का सिंचन किया जाता है तथा उन्हें अपनी महान वैदिक संस्कृति का ज्ञान प्रदान किया जाता है । इस प्रकार आधुनिकता के साथ आध्यात्मिकता का अनोखा संगम हैं ये आश्रम के गुरुकुल ।

गौ-सेवा : आश्रम द्वारा 9 बड़ी एवं अनेक छोटी गौशालाओं का संचालन हो रहा है, जिनमें 8500 गायों की सेवा की जा रही है । इनमें अधिकांश कत्लखाने ले जाने से बचायी गयीं गायें हैं ।

मातृ-पितृ पूजन दिवस (14 फरवरी) : ‘वेलेंटाइन डे’ जैसे संयम-विनाशक विदेशी त्यौहारों से अपने देश के किशोरों व युवक-युवतियों की रक्षा करने हेतु पूज्य बापूजी की प्रेरणा से हर वर्ष 14 फरवरी को विद्यालयों, महाविद्यालयों, सोसायटियों, गाँवों-पंचायतों-शहरों एवं घर-घर में ‘मातृ-पितृ पूजन दिवस’ मनाया जा रहा है । पूज्यश्री द्वारा समाज को दी गयी इस नयी दिशा से लाखों-लाखों विद्यार्थी अब तक लाभान्वित हुए हैं । छत्तीसगढ़ सरकार ने पूज्य बापूजी की इस पहल से प्रेरणा पाकर ‘मातृ-पितृ पूजन दिवस’ (14 फरवरी) को राज्यस्तरीय पर्व के रूप में मनाने का स्वर्णिम इतिहास रच दिया और हर वर्ष वहाँ यह पर्व अनिवार्यरूप से शैक्षणिक संस्थाओं, विद्यालयों में मनाया जा रहा है । माता-पिता की महिमा बतानेवाला सत्साहित्य ‘माँ-बाप को भूलना नहीं’ और फिल्म ‘माँ-बाप को मत भूलना’ बहुत लोकप्रिय हुए हैं ।

तुलसी पूजन दिवस (25 दिसम्बर) : पूज्य बापूजी की पावन प्रेरणा से 25 दिसम्बर को देश-विदेशों में ‘तुलसी पूजन दिवस’ मनाया जा रहा है ।

छाछ वितरण व जल प्याऊ सेवा : बस स्टैंडों, रेलवे स्टेशनों, सार्वजनिक स्थलों पर शीतल छाछ व जल की प्याऊ लगायी जाती है तथा इनका निःशुल्क वितरण किया जाता है।

प्राकृतिक प्रकोप व आपातकालीन सेवा : देश पर आयी प्राकृतिक आपदाओं में आश्रम की सेवाएँ और तत्परता हमेशा अग्रणीय स्थान पर रही हैं। चाहे लातूर, भुज के भूकंप हों या गुजरात का अकाल, उड़ीसा व गुजरात में आयी बाढ़ हो या सुनामी का महातांडव - सभी जगह आश्रम द्वारा निरंतर सेवाएँ हुई हैं।

व्यसनमुक्ति अभियान : आज आश्रम द्वारा चलाये जा रहे ‘व्यसनमुक्ति अभियान’ से बड़ी संख्या में व्यसनी लोग व्यसनमुक्त हो रहे हैं।

विद्यार्थी उज्ज्वल भविष्य निर्माण शिविर : विद्यार्थियों की छुट्टियों का सदुपयोग कर उन्हें संस्कारवान, बुद्धिमान, उद्यमी, परोपकारी बनाने हेतु शुरू किये गये ये शिविर विद्यार्थियों व उनके अभिभावकों द्वारा खूब सराहे गये हैं। इन शिविरों में विद्यार्थियों को यौगिक शिक्षा, आदर्श दिनचर्या, आदर्श विद्यार्थी कैसे बनें, परीक्षा में अच्छे अंक कैसे प्राप्त करें - जैसे महत्त्वपूर्ण पहलुओं पर उत्तम मार्गदर्शन दिया जा रहा है।

योग-प्रशिक्षण : साधक-साधिकाओं द्वारा विभिन्न विद्यालयों में ध्यान-साधना, स्मृतिवर्धक प्रयोग आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है।

पर्यावरण सुरक्षा अभियान : पर्यावरण की शुद्धि के लिए पीपल, आँवला, तुलसी, वट व नीम के पौधे लगाये जाते हैं । इससे अरबों रुपयों की दवाइयों का खर्च बचता है । ये वृक्ष शुद्ध वायु के द्वारा प्राणिमात्र को एक प्रकार का उत्तम भोजन प्रदान करते हैं । पूज्य संत श्री आशारामजी बापू कहते हैं कि ये पौधे एवं वृक्ष लगाने से आपके द्वारा प्राणिमात्र की बड़ी सेवा होगी ।

संकीर्तन यात्राएँ व प्रभातफेरियाँ : वातावरण में सात्त्विकता, पवित्रता लाने तथा वैचारिक प्रदूषण दूर करने हेतु भारतभर में हरिनाम संकीर्तन यात्राओं व प्रभातफेरियों का आयोजन किया जाता है, जिनके दौरान सत्साहित्य-वितरण भी किया जाता है।

चिकित्सा-सेवा : आयुर्वैदिक, होमियोपैथिक, प्राकृतिक चिकित्सा व एक्युप्रेशर - इन निर्दोष चिकित्सा पद्धतियों से निष्णात वैद्यों द्वारा विभिन्न स्थानों में उपचार किये जाते हैं, साथ ही देश के सुदूर क्षेत्रों में ‘निःशुल्क चिकित्सा शिविरों’ का आयोजन किया जाता है। आदिवासी व ग्रामीण क्षेत्रों में, जहाँ आसानी से चिकित्सा-सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाती, वहाँ भी सेवा के लिए आश्रम के चल-चिकित्सालय पहुँच जाते हैं।

अस्पतालों में सेवा : मरीजों में फल, दूध, दवाएँ व सत्साहित्य का वितरण किया जाता है।

सत्साहित्य केन्द्र : समाज के गरीब-से-गरीब, हर वर्ग के व्यक्ति को घर बैठे जीवनोद्धारक आध्यात्मिक मूल्यों का लाभ मिल सके इस उद्देश्य से देशभर में सत्साहित्य-वितरण के लिए स्थायी व चलित केन्द्र चलाये जा रहे हैं, जहाँ से अत्यल्प मूल्य में सत्साहित्य प्रदान किया जाता है।

जेलों में कैदी उत्थान सेवा : कैदियों के सर्वांगीण उत्थान हेतु पूरे भारतवर्ष में सैकड़ों जेलों में निःशुल्क सत्साहित्य-वितरण व सत्संग-कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। अब तक लाखों बंदियों को लाभ मिल चुका है। उन्हें भगवन्नाम-लेखन पुस्तिका दी गयी है ताकि वे फुरसत के समय का सदुपयोग कर भगवन्नाम-लेखन कर सकें। जेल के पुस्तकालय में आश्रम द्वारा प्रकाशित 118 किताबों का सेट व पूज्यश्री के सत्संग की सी.डी., कैसेट भी दी जाती हैं।

वातावरण व विचारों की शुद्धि : इस हेतु ‘विश्व शांति यज्ञ’, ‘विश्व मांगल्य यज्ञ’ एवं ‘महामृत्युंजय यज्ञ’ आदि का आयोजन होता है।

सत्साहित्य व मासिक पत्रिकाओं का प्रकाशनः आश्रम द्वारा 14 भाषाओं में 574 से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन किया जा रहा है। मासिक पत्रिका ‘ऋषि प्रसाद’ हिन्दी, मराठी, गुजराती, उड़िया, तेलुगु, कन्नड़, सिंधी, सिंधी (देवनागरी), बंगाली व अंग्रेजी भाषाओं में और मासिक समाचार पत्र ‘लोक कल्याण सेतु’ हिन्दी, मराठी, गुजराती व ओड़िया भाषाओं में प्रकाशित किया जा रहा है। ‘ऋषि प्रसाद’ के देश-विदेश में करोड़ों पाठक हैं।

मौन मंदिर : करीब 140 आश्रमों में ‘मौन मंदिर साधना’ की व्यवस्था है, जिसमें साधक सात दिन का मौन-व्रत लेकर दिव्य आध्यात्मिक अनुभूतियों का अनुभव करते हैं।

दिव्य प्रेरणा-प्रकाश ज्ञान प्रतियोगिता : विद्यार्थियों को संयम शिक्षा प्रदान करने हेतु देशभर में अनेक वर्षों तक आयोजित हुई इस प्रतियोगिता में हजारों विद्यालयों के लाखों विद्यार्थियों ने भाग लिया एवं पुरस्कार पाये ।

 

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