गौरक्षा में कैसे दें अपना योगदान ?
Ashram India

गौरक्षा में कैसे दें अपना योगदान ?

यदि हम मानव को ईश्वर द्वारा प्रदत्त वरदान ‘गौ के आशीर्वाद से स्वस्थ व सुखी रहना चाहते हैं तो गाय के दूध, घी आदि का ही खाने-पीने तथा हवन-पूजन आदि में प्रयोग करें और डेयरियों आदि स्थानों पर गौ-उत्पाद की माँग करें । एलोपैथिक दवाओं की गुलामी छोडकर गौ-चिकित्सा का लाभ लें । निरोग रहने के लिए गोमूत्र व गोमय (गोबर के रस) से बनी औषधियों का सेवन करें ।

गायों की रक्षा के लिए जिनके पास गाय रखने की जगह हो वे कम-से-कम एक देशी गाय अवश्य पालें । जो गाय नहीं पाल सकते हों वे देशी गाय को रोज गोग्रास खिलायें । जिन्हें सम्भव हो वे गौरक्षा हेतु गौशालाओं का निर्माण करें । गोचर-भूमि की रक्षा करें ।

खेती में रासायनिक खाद व कीटनाशक के स्थान पर गोबर-खाद व गोमूत्र से बने कीटनाशक का ही प्रयोग करें । खेती करनेवाले सज्जनों को चाहिए कि वे गाय, बछडा, बैल आदि को निकम्मा जानकर बेचें नहीं । गायें और माँएँ बेचनी नहीं होती हैं । जब तक गाय दूध और बछडा देती है एवं बैल काम करता है तब तक उनको रखते हैं तथा जब वे बूढे हो जाते हैं तब उनको बेच देते हैं - यह कितनी कृतघ्नता की, पाप की बात है ! महात्मा गांधी ने लिखा था कि ‘बूढा बैल (या गाय) जितनी घास (चारा) खाता है, उतना अपना खर्चा गोबर व गोमूत्र से आप ही चुका देता है ।

गाय से इतने लाभ होने के बावजूद बहुत-सी गौशालाएँ बंद होने के कगार पर हैं । अतः हम स्वयं गाय से प्राप्त उत्पादों का उपयोग करें और गाय की महत्ता व आवश्यकता के बारे में ज्ञापन आदि के द्वारा गौरक्षा की माँग करें क्योंकि गाय है तो स्वास्थ्य, सुख-शांति और देश की उन्नति है ।

यदि हम अपना, परिवार का तथा राष्ट्र का भला चाहते हैं, अपने धर्म का पालन करना चाहते हैं तो हमें भारतीय संस्कृति के अभिन्न अंग ‘गौ की रक्षा करनी होगी । उसका पोषण, संवर्धन व सम्मान करना होगा ।

Previous Article गोवध = विनाश को आमंत्रण
Print
145 Rate this article:
No rating
Please login or register to post comments.

LKS recent Articles

E-Subscription of Lok Kalyan Setu