ग्रहण से आनेवाली विपत्ति से मानव-समाज की रक्षा के लिए...
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ग्रहण से आनेवाली विपत्ति से मानव-समाज की रक्षा के लिए...

पूर्व में पूज्य बापूजी के द्वारा बताया गया ग्रहण के दुष्प्रभाव से बचने का उपाय

चन्द्रग्रहण में और सूर्यग्रहण में जो लोग करणीय नहीं करते हैं और अकरणीय करते हैं उनकी जीवनीशक्ति का ह्रास हो जाता है और दंड भोगते हैं । जैसे - ग्रहण के समय निद्रा में पडे रहें तो रोगी बनेंगे और रोग मिटाना है तो उन रोगियों को भी ग्रहण के समय रोग मिटानेवाला जप करना चाहिए ।

मनुष्यों के लिए ग्रहण के बाद के दिन ब‹डे दुःखदायी होते हैं । क्लेश, झगडा, रोग, युद्ध, अशांति आदि होते हैं । तो मैं अब सोच रहा हूँ कि इस आनेवाली विपत्ति से मानव-समाज की रक्षा के लिए व्यापक सेवा चाहिए । इसका केवल एक ही सुंदर उपाय है कि ‘मानव-जाति में कलह न हो, अशांति न हो, झगडे न हों प्रभु ! इसलिए हम तेरे को पुकार रहे हैं । बस, श्रद्धा-प्रीति से यह भावना करके अगर (अपने-अपने घर में) कीर्तन चालू कर दिया तो शूली में से काँटा हो जायेगा, बडी-बडी विपत्तियाँ चली जायेंगी, बिल्कुल पक्की बात है !

अपने लिए कुछ करना यह कंगालियत है, अपना स्वार्थ छोडकर बहुतों के लिए करना यह ईश्वरीय सत्ता के साथ एकाकार होना है ।

ग्रहण में न करने योग्य काम छोडकर जप करेंगे, मौन रखेंगे, ध्यान करेंगे और ॐकार की उपासना करेंगे तो सच्चिदानंद परमात्मा के निकटवर्ती हो के जीवन्मुक्त भी हो सकते हैं और इष्ट के लोक की इच्छा है तो इष्टलोक तक की यात्रा कर सकते हैं ।

(सूर्यग्रहण की विस्तृत जानकारी पढें ऋषि प्रसाद, अप्रैल-मई २०२० के संयुक्तांक के पृष्ठ ३५ पर ।)

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