ये चार काम बनायेंगे विद्यार्थियों को महान
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ये चार काम बनायेंगे विद्यार्थियों को महान

संत विनोबाजी भावे अपने को सदा विद्यार्थी मानते रहे । वे कहते थे कि ‘मैं और जो कुछ भी हूँ, सबसे पहले विद्यार्थी हूँ । मेरी पढ़ाई आज भी जारी है ।’ विनोबाजी कहते थे कि विद्यार्थियों को ये चार काम करने चाहिए :

(1) दिमाग को आजाद रखना: विद्यार्थियों को अपना दिमाग बिल्कुल आजाद (खुला) रखना चाहिए । माँ कहती है : ‘‘बेटा ! यह चन्द्रमा है ।’’ तो बेटा उसे मान लेता है कि ‘माँ ने कहा है तो ठीक है, यह चन्द्रमा ही होगा ।’ माँ में उसकी श्रद्धा नहीं रहेगी तो उसे ज्ञान नहीं होगा लेकिन उसे यहीं नहीं रुकना है । ज्ञान शुरू होगा श्रद्धा से पर वह पूरा होना चाहिए बुद्धि से ।

(2) अपने-आप पर नियंत्रण रखना: अपने ऊपर नियंत्रण रखें । विद्यार्थियों की स्वतंत्रता का तभी कोई मतलब है जब वे अपने पर अपना नियंत्रण रखें । उनमें ऐसी निष्ठा रहे कि ‘मैं जो बात तय करूँगा, जो संकल्प करूँगा उसे जरूर पूरा करूँगा ।’ जैसे - चार बजे उठना है तो चार बजे ही उठूँगा, फिर उसमें कोई ढुलमुलपना नहीं होगा ।

विद्यार्थी अपनी इन्द्रियों पर, मन व बुद्धि पर काबू रखें तभी वे जल्दी निर्णय कर सकेंगे । उन्हें यह तय करना चाहिए कि ‘मैं जो शास्त्र व संत सम्मत निश्चय करूँगा या व्रत लूँगा वह टल नहीं सकता, भले उसके लिए जो कुछ भी सहना पड़े, न्योछावर करना पड़े ।’ इन्द्रियों को काबू कर लेने पर ही ऐसी शक्ति आयेगी ।

(3) हमेशा सेवा करते रहना: हमेशा गुरुजनों की सेवा करने की आदत डालें । सेवा के बिना ज्ञान नहीं खिलता । रामायण में बताया गया है कि श्रीरामचन्द्रजी व लक्ष्मणजी ने गुरु विश्वामित्रजी की सेवा करते-करते विद्या प्राप्त की थी ।

(4) सदा सावधान रहना: सदा सावधान रहें । सारी हलचलें देखें-सुनें पर सबसे अलग होकर सोचें । अपने को किसी जाति, मजहब, पंथ, भाषा में बँधा हुआ न मानें । सारी दुनिया को अपना घर समझें । किसी तरह की ओछी या छिछली भावना नहीं रहनी चाहिए ।

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