क्या है आत्मचिंतन का सुगम उपाय ?
Ashram India
/ Categories: Dec-2018

क्या है आत्मचिंतन का सुगम उपाय ?

एक बार श्री उड़िया बाबाजी से एक भक्त ने पूछा : ‘‘बाबा ! आपने जो कहा कि आत्मदर्शन अत्यंत सुगम है, सो किस प्रकार ? आत्मचिंतन का वह सुगम उपाय क्या है ?’’

बाबा ने कहा : ‘‘पहले असंग-भावना करनी चाहिए । इसमें निष्ठा हो जाने पर चराचर जगत की उपेक्षा कर देने से हर समय आत्मचिंतन स्वाभाविक हो जायेगा, कोई कष्ट नहीं करना पड़ेगा । परंतु यह स्थिति तभी होती है जब अपने-आपमें (आत्मा में) प्रेम हो । अपने-आपमें प्रेम होना बड़ा कठिन है क्योंकि चित्त जगह-जगह बँटा हुआ है । अतः दूसरों में तो आसक्ति हो जाती है किंतु आत्मरति नहीं होती । सब शरीर को ही हृष्ट-पुष्ट चाहते हैं अथवा स्त्री-पुत्रादि के लालन-पालन में लगे हुए हैं । इससे सिद्ध होता है कि अधिकतर लोगों की आसक्ति अनात्मा में ही है । अतः जब सब ओर से हटकर आत्मा में ही प्रेम हो तब समझो कि अब मेरा पुण्योदय हुआ, अब अवश्य कल्याण हो जायेगा ।


[LKS-Edition-260-February-2019]

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