कैसे विलक्षण लक्षणों से सम्पन्न थे हनुमानजी !
Ashram India
/ Categories: Year-2018, Nov-2018

कैसे विलक्षण लक्षणों से सम्पन्न थे हनुमानजी !

कहते हैं, अंगद ने हनुमानजी से पूछा : ‘‘हनुमानजी ! रावण ने भी लंका इतनी नहीं छान मारी होगी जितनी आपने छानी ! क्या कारण था ? लंका के घर-घर, गली-गली - सबको रात्रि में छान मारा !’’

हनुमानजी ने बड़ा सुंदर उत्तर दिया : ‘‘भई, वैद्य होता है न, तो मृतक जैसे लक्षण दिखने पर इधर की नाड़ी देखेगा, ललाट पर हाथ लगायेगा, उधर देखेगा । देखता है कि कोई नाड़ी चल तो नहीं रही है । ऐसा नहीं कि जल्दी से घोषणा कर दे कि ‘यह मृतक है ।’ जहाँ प्राण की कोई सम्भावना है वहाँ खोजता है । जब देखता है कि प्राण की कोई सम्भावना नहीं है तो फिर घोषित करता है कि ‘यह मृत शरीर है ।’ ऐसे ही मैंने देखा कि लंका में तो सौंदर्य है, सुविधा भी है, बाग-बगीचे भी हैं, बड़ी-बड़ी अट्टालिकाएँ (बहुमंजिला इमारतें) भी हैं लेकिन भक्तिरूपी प्राण नहीं दिख रहे हैं । जहाँ भक्तिरूपी, भगवद्रसरूपी प्राण नहीं, जीवन वहाँ निस्सार है ।

तो मैंने देखा कि लंका की स्थिति निस्सार, निःस्पंद है लेकिन विभीषण के यहाँ और त्रिजटा जहाँ थी वहाँ स्पंदन (भक्तिरूपी प्राण) दिखा, जीवन दिखा । तो जहाँ जीवन है वहाँ मैं श्मशान-यात्रा क्यों करवाऊँ  और जहाँ मृतक हैं वहाँ उनको सड़ने क्यों दूँ ? फिर मेरी पूँछ में लगा उन्हींका घी, उन्हींका तेल, उन्हींके कपड़े... पूँछ बढ़ाते-बढ़ाते चारों तरफ वहाँ घुमायी जहाँ भक्तिरूपी माता का जीवन नहीं और रामरस नहीं था । पूँछ में लगी आग से रावण की एक चौथाई सेना भी जल गयी और युद्ध के बड़े-बड़े साधन भी जल गये । जो युद्ध करने में सक्षम थे वे दहल गये और योद्धाओं की जो संतानें होनेवाली थीं, ‘हूप’ (गर्जना) करके कई राक्षसियों का गर्भपात भी करा दिया ताकि पैदा होनेवाले राक्षस भी समाप्त हो जायें ।’’

तो हनुमानजी कर्म-कौशल्य के धनी हैं । कर्मघाट (कर्मयोग) से कर्म करते हैं । रामजी ने तो भेजा कि ‘सीताजी कुशल हैं, कैसा है जरा देख के आओ, खोज के आओ ।’ एक काम बताया लेकिन हनुमानजी - सीताजी को जिसने कैद किया उसकी सेना कैसी है, उसके बलवान-बलवान योद्धे कैसे हैं, परकोटे (सुरक्षा हेतु बनीं बड़ी-बड़ी चाहरदीवारियाँ) कैसे हैं, उन्हें कैसे तोड़ें यह पता लगा के आये और कुछ तो (परकोटे) खुद ही तोड़ के आये और एक चौथाई सेना भी समाप्त करके आये तथा शत्रु के घर कैसे धावा बोलना है और कैसे अपने स्वामी सफल हों - सारी खबर ले के आये ।

तो ऐसे बड़े विलक्षण लक्षणों से सम्पन्न थे हनुमानजी !

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