प्रकृति के बहुमूल्य उपहारों में से एक : अंगूर

प्रकृति के बहुमूल्य उपहारों में से एक : अंगूर

अंगूर शीतल, वात-पित्तनाशक, बल-वीर्यवर्धक, रुचिकर, स्वर को उत्तम करनेवाला एवं आँखों के लिए हितकर है । इसके सेवन से शरीर में रक्त एवं मांस की वृद्धि होकर वजन बढ़ने में सहायता मिलती है । यह प्यास की अधिकता, पेट की जलन, मुख का स्वाद कड़वा हो जाना, खाँसी, पेशाब की जलन एवं रुकावट, कब्ज, खून की कमी, पीलिया, सामान्य कमजोरी आदि रोगों में लाभकारी है । अंगूर आँतों, गुर्दों (kidneys), यकृत (Liver) व आमाशय की कार्यक्षमता में वृद्धि करते हैं । शरीर में से विरोधी कणों को बाहर निकालते हैं, आँखों को शीतलता देते हैं और गर्मी की बीमारियों को मिटाते हैं ।

अंगूर रोगियों के लिए एक अच्छा पथ्य होने के साथ-साथ स्वस्थ मनुष्य को शक्ति और पुष्टि प्रदान करता है । कैंसर, टी.बी., पेट व आँतों की सूजन एवं घाव, बच्चों का सूखा रोग, आंत्रपुच्छ शोथ (appendicitis) तथा हृदय के रोगियों के लिए यह शक्तिदायक पथ्य है । 100-200 ग्राम अंगूर खाने से शरीर में शक्ति का शीघ्र ही संचार होता है । लम्बी बीमारी के बाद शरीर में आयी कमजोरी को दूर करने में यह रामबाण औषधि का काम करता है । बच्चों, वृद्धों व दुर्बल लोगों के लिए यह अनुपम आहार है ।

आधुनिक अनुसंधानों के अनुसार अंगूर में प्रचुर मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट एवं पोलिफिनोल पाये जाते हैं, जिससे यह विभिन्न प्रकार के कैंसर, उच्च रक्तदाब (High B.P..), हृदय की रक्तवाहिनियों का अवरोध (Blockage) आदि विभिन्न प्रकार के हृदयरोगों से रक्षा करने में सहायक है ।

पूज्य बापूजी द्वारा बताये गये अंगूर के गुणकारी प्रयोग

* जिसको कमजोरी मिटानी है वह भोजन के आधा घंटे बाद 25-30 ग्राम अंगूर का रस पिये । गर्भिणी को, बच्चों को भी पिलाओ । अंगूर नहीं मिलें तो किशमिश, द्राक्ष आदि लें । शरीर पुष्ट हो जायेगा ।

* जरा-जरा बात में क्रोधी होनेवाले लोगों को अंगूर प्रचुर मात्रा में खाने चाहिए ।

* बच्चों को दाँत निकलते समय दस्त होते हैं, अजीर्ण और कब्जियत होती है, पीड़ा होती है । उन दिनों में बच्चों को 1-2 चम्मच अंगूर का रस सुबह और शाम दो तो फिर उन्हें ठीक-ठीक भूख लगने लगती है ।

* जिनको भूख नहीं लगती उनके लिए भी अंगूर का भोजन अथवा अंगूर का नाश्ता हितकारी है । थोड़े दिन अंगूर का ही नाश्ता करें तो रक्ताल्पता ठीक हो जायेगी, रक्त बन जायेगा, हीमोग्लोबिन ठीक हो जायेगा ।

अंगूर के अन्य औषधीय प्रयोग

रक्तपित्त : प्रतिदिन 100-150 ग्राम मीठे अंगूर खाने से नाक, मुँह और मूत्रमार्ग से निकलनेवाले खून को रोकने में सहायता मिलती है ।

--------------------------

Grapes: A valuable gift from Nature

Grape is cool in potency; destroys Pitta and Vata, promotes strength and semen, makes voice excellent and is promoter of eyesight. Its consumption helps to gain body weight by increasing blood and flesh in the body. It helps in morbid thirst, burning in stomach, bitterness of mouth, cough, burning micturition, urinary retention, constipation, anemia, jaundice, general debility etc. Grapes increase the efficiency of intestines, kidneys, liver and stomach. They remove toxic particles from the body; give coolness to the eyes, and alleviate summer diseases.

Grapes are not only a wholesome food for the sick but also a source of energy and nourishment for the healthy. They are energy giving for patients of cancer, tuberculosis, inflammation of the stomach and intestines and their injuries, rickety children, appendicitis and heart disease. It is a surefire remedy for debility caused by chronic illness. It is a unique food for children, aged, and debilitated persons.

Modern research has revealed that they contain antioxidants and polyphenols in rich quantities. This helps in the prevention of various types of cancer, high blood pressure, heart disease like blockage of coronary arteries.

Uses of Grapes as Mentioned by Pujya Bapuji

* One who wants to cure weakness should drink the juice of 25-30 gm of grapes half an hour after meals. Give the same to pregnant women and also to children. Take currants (seedless dry grapes), raisins etc., if grapes are not available.

* Irascible people should consume grapes in large quantity.

* Children suffer from diarrhea, indigestion, constipation and pain at the time of dentition (teething). If you give 1-2 spoonful of grape juice to them in the morning and the evening. It will stimulate their appetite.

* Taking grapes as food or breakfast is good for those who have loss of appetite. If an anemic person takes only grapes as breakfast for a few days, he will be cured of anemia. His hemoglobin level will become normal and blood formation will take place.

Other medicinal uses of grapes

Raktapitta (a condition characterized by bleeding from different parts of the body): Taking the juice of 100-150 gm grapes everyday helps in bleeding from nose, mouth, and hematuria.

Retention of urine: Eating grapes helps greatly in cases of poor urinary flow, frequency of urination. It improves urine flow and removes the weakness of the urinary bladder.

Raisins, currants and Drakshavaleha can be used as alternatives of the grapes. Drakshavaleha helps in acidity, constipation, anemia, giddiness, jaundice, weakness, burning micturition, loss of appetite, bleeding from the nose, mouth, bloody urination etc.

(Raisins, black currants and Drakshavaleha are available at Ashrams and service centres of samitis.)

Caution: Grapes should be thoroughly washed before eating. They should be given in small quantities to the sick as they may cause diarrhea. Unripe and sour grapes are cool in potency and unctuous dry. Their consumption is harmful to the stomach and spleen, causing aggravation of Vata.  (Compilation: Narendra Patel)

Rishi Prasad Issue-291


Previous Article अनेक रोगों में लाभकारी स्वास्थ्यप्रदायक कलौंजी
Print
1111 Rate this article:
4.0

Please login or register to post comments.

Name:
Email:
Subject:
Message:
x