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पूज्य बापूजी के स्वास्थ्य एवं कारावास मुक्ति के लिए विशेष कार्यक्रम

प्रिय आत्मन गुरु ॐ 

   पूज्य बापू जी ने कहा है की सोमवती अमावस्या के दिन किया गया जप ध्यान लाख गुना फलदायी होता है |

 जितना फल दीवाली ,जन्माष्टमी,होली और शिवरात्रि के दिनों में जप ध्यान करने से होता है उतना ही फल 

सोमवती अमावस्या के दिन भी करने से होता है | 
 

सभी क्षेत्रीय आपातकालीन समितियों को सूचित किया जाता है कि सभी सोमवती अमावस्या 

(28 अप्रैल दोपहर 12.41pm से 29 अप्रैल सूर्योदय तक) के दिन अपने क्षेत्र में निम्न कार्यक्रम कर सकते हैं :- 

PRO आदि के द्वारा इस कार्यक्रम की सूचना सभी साधकों तक दें । 
 

1 ) स्थानीय आश्रम अथवा आश्रम न होने पर कोई भी उचित स्थान पर दिन भर का सामूहिक जप एवं हवन आयोजन करें ।  

2 ) कार्यक्रम :- पूज्य बापूजी का केस कोर्ट में चल रहा है इसलिए संकल्प करें "पूज्य बापूजी के खिलाफ हो रहे कुप्रचार बंद हों 

तथा पूज्य गुरुदेव शीघ्र ही जेल से रिहा हो जाएँ "। हाथ में जल लेकर ऐसा संकल्प कर निम्न मन्त्रों के द्वारा सामूहिक जप एवं हवन करें:- 

I )  पवन तनय बल पवन समानाबुद्धि विवेक विज्ञान निधाना ।    

II )  ॐ ह्रीं ॐ  

III ) आदित्य हृदय स्तोत्र  

IV ) ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाये विच्चै।  

V )  बजरंग बाण एवं हनुमान चालीसा का पाठ  

VI ) पूज्य बापूजी के स्वास्थ्य एवं आरोग्यता हेतु इस दिन व्रत कर सकते हैं 

      व्रत का संकल्प :- प्रातः काल स्नान आदि के बाद हाथ में जल लेकर संकल्प करें  

"मैं आज यह संकल्प करता/करती हूँ कि आज मैं इस सोमवती अमावस्या का व्रत 

इस उदेश्य से कर रहारही हूँ कि इस व्रत का पुण्य मैं अपने पूज्य गुरुदेव संत श्री आशारामजी बापू के स्वास्थ्य , आरोग्य की रक्षा 

एवं वृद्धि हेतु उनके श्री चरणों में अर्पित करता/करती हूँ ।  "   

VII ) पूज्य बापूजी के आरोग्य हेतु महामृत्युंजय मंत्र का जप एवं हवन विशेष करें ।  

ॐ हौं जूँ सः | ॐ भूर्भुवः स्वः | ॐ त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम् उर्व्वारुकमिव बंधनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात ॐ | स्वः भुवः भूः ॐ | सः जूँ हौं ॐ | 

सोमवती अमावस्या के दिन 108 बार अगर तुलसी की परिक्रमा करते होओंकार का थोड़ा जप करते हो,सूर्य नारायण को अर्घ्य देते हो

यह सब साथ में करो तो अच्छा हैनहीं तो खाली तुलसी को 108 बार प्रदक्षिणा करने से तुम्हारे घर से दरिद्रता भाग जाएगी l  

जिस अमावस्या को सोमवार हो, उसी दिन इस व्रत का विधान है। प्रत्येक मास एक अमावस्या आती है,

परंतु ऐसा बहुत ही कम होता है,जब अमावस्या सोमवार के दिन हो। यह स्नान, दान के लिए शुभ और सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है।

ग्रंथों में कहा गया है कि सोमवार को अमावस्या बड़े भाग्य से ही पड़ती है। पाण्डव पूरे जीवन तरसते रहे, परन्तु उनके सम्पूर्ण

जीवन में सोमवती अमावस्या नहीं आई। 
 इस दिन को नदियों, तीर्थो में स्नान, गोदान, अन्नदान, ब्राह्मण भोजन, वस्त्र आदि दान के लिए विशेष माना जाता है।

सोमवार चंद्रमा का दिन है। इस दिन अमावस्या को सूर्य तथा चंद्र एक सीध में स्थित रहते हैं, इसलिए यह पर्व विशेष पुण्य देने वाला होता है। 
 सोमवार भगवान शिवजी का दिन माना जाता है और सोमवती अमावस्या तो पूर्णरूपेण शिवजी को समर्पित होती है। इस

दिन यदि गंगाजी जाना संभव न हो तो प्रात: किसी नदी या सरोवर आदि में स्नान करके भगवान शंकर, पार्वती और तुलसी की भक्तिपूर्वक पूजा करें। 

 नोट :- यह सूचना PRO आदि के माध्यम से अलग-अलग लोगों तक पहुंचाए ।

साधना में तीव्रता से आगे बढने

साधना में तीव्रता से आगे बढने के लिए :

पूज्य बापू जी ने कहा है की सोमवती अमावस्या के दिन किया गया जप ध्यान लाख गुना फलदायी होता है | जितना फल दीवाली ,जन्माष्टमी,होली और शिवरात्रि के दिनों में जप ध्यान करने से होता है उतना ही फल सोमवती अमावस्या के दिन भी करने से होता है |
पूज्य बापू जी ने कहा की साधको को  साधना में उन्नति के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए :

१: मौन का अधिक से अधिक सेवन करे या जितना कम संभव हो उतना कम बोले

२: अधिक से अधिक समय जप और ध्यान में लगाये

३: उपवास करे और सिर्फ दूध का सेवन करे

४: सोमवती अमावस्या के दिन और उससे एक रात पहले भूमि पर शयन का करें.

५: सोमवती अमावस्या से एक रात्रि पहले साधकों को चाहिए की वो एक मजबूत संकल्प ले की मै कल मौन रखूँगा सद्ग्रंथो जैसे की जीवन रसायन ,इश्वर की ओर और दिव्य प्रेरणा प्रकाश का पठन करूँगा  और अपने आपको सतत जप और ध्यान में संलग्न रखूँगा .

 महत्वपूर्ण संकेत :
पूज्य बापू जी ने कहा है की जो स्त्रियां अपने मासिक धर्म में हो वो इन सभी संकेतों को पालन करने से मुक्त है | परन्तु और सभी साधकों को ये नियम अवश्य पालन करना चाहिए |

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समृद्धि बढ़ाने के लिए

समृद्धि बढ़ाने के लिए / दरिद्रता मिटाने के लिए :

           सोमवती अमावस्या के दिन 108 बार अगर तुलसी की परिक्रमा करते हो, ओंकार का थोड़ा जप करते हो, सूर्य नारायण को अर्घ्य देते हो; यह सब साथ में करो तो अच्छा है, नहीं तो खाली तुलसी को 108 बार प्रदक्षिणा करने से तुम्हारे घर से दरिद्रता भाग जाएगी l पूज्य बापू जी कहा है की जिनको भी नौकरी धंधे में सफलता न मिलती और जिनको नौकरी मिली है पर डर लगा रहता हो की कही नौकरी चली ना जाए उनको भी इस विधि का लाभ लेना चाहिए |

        जिन लोगो ने व्यवसाय में असफलता पायी है या जिन लोगो ने क़र्ज़ लिया है उन लोगो के लिए भी यह विधि बहुत लाभदायक है |

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