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पूज्य बापूजी के स्वास्थ्य एवं कारावास मुक्ति के लिए विशेष कार्यक्रम

 

प्रिय आत्मन गुरु ॐ

   पूज्य बापू जी ने कहा है की रविवारी सप्तमी के दिन किया गया जप ध्यान लाख गुना फलदायी होता है | जितना फल दीवाली ,जन्माष्टमी,होली और शिवरात्रि के दिनों में जप ध्यान करने से होता है उतना ही फल रविवारी सप्तमी के दिन भी करने से होता है |
 
सभी क्षेत्रीय आपातकालीन समितियों को सूचित किया जाता है कि सभी रविवारी सप्तमी के दिन अपने क्षेत्र में निम्न कार्यक्रम कर सकते हैं :-

PRO आदि के द्वारा इस कार्यक्रम की सूचना सभी साधकों तक दें ।
 
1 ) स्थानीय आश्रम अथवा आश्रम न होने पर कोई भी उचित स्थान पर दिन भर का सामूहिक जप एवं हवन आयोजन करें । 

2 ) कार्यक्रम :- पूज्य बापूजी का केस कोर्ट में चल रहा है इसलिए संकल्प करें "पूज्य बापूजी के खिलाफ हो रहे कुप्रचार बंद हों तथा पूज्य गुरुदेव शीघ्र ही जेल से रिहा हो जाएँ "। हाथ में जल लेकर ऐसा संकल्प कर निम्न मन्त्रों के द्वारा सामूहिक जप एवं हवन करें:-

I )  पवन तनय बल पवन समाना, बुद्धि विवेक विज्ञान निधाना ।   

II )  ॐ ह्रीं ॐ 

III ) आदित्य हृदय स्तोत्र 

IV ) ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाये विच्चै। 

V )  बजरंग बाण एवं हनुमान चालीसा का पाठ 

VI ) पूज्य बापूजी के स्वास्थ्य एवं आरोग्यता हेतु इस दिन व्रत कर सकते हैं

      व्रत का संकल्प :- प्रातः काल स्नान आदि के बाद हाथ में जल लेकर संकल्प करें  "मैं आज यह संकल्प करता/करती हूँ कि आज मैं इस रविवारी सप्तमी का व्रत इस उदेश्य से कर रहा/ रही हूँ कि इस व्रत का पुण्य मैं अपने पूज्य गुरुदेव संत श्री आशारामजी बापू के स्वास्थ्य , आरोग्य की रक्षा एवं वृद्धि हेतु उनके श्री चरणों में अर्पित करता/करती हूँ ।  "  

VII ) पूज्य बापूजी के आरोग्य हेतु महामृत्युंजय मंत्र का जप एवं हवन विशेष करें । 

ॐ हौं जूँ सः | ॐ भूर्भुवः स्वः | ॐ त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम् उर्व्वारुकमिव बंधनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात ॐ | स्वः भुवः भूः ॐ | सः जूँ हौं ॐ |

 इस दिन को नदियों, तीर्थो में स्नान, गोदान, अन्नदान, ब्राह्मण भोजन, वस्त्र आदि दान के लिए विशेष माना जाता है।

नोट :- यह सूचना PRO आदि के माध्यम से अलग-अलग लोगों तक पहुंचाए ।

Raviwari Saptami

साधना में तीव्रता से आगे बढने के लिए :

पूज्य बापू जी ने कहा है की रविवारी सप्तमी  के दिन किया गया जप ध्यान अनंत गुना फलदायी होता है | जितना फल दीवाली ,जन्माष्टमी,होली और शिवरात्रि के दिनों में जप ध्यान करने से होता है उतना ही फल सोमवती अमावस्या के दिन भी करने से होता है |
पूज्य बापू जी ने कहा की साधको को  साधना में उन्नति के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए :

१: मौन का अधिक से अधिक सेवन करे या जितना कम संभव हो उतना कम बोले |

२: अधिक से अधिक समय जप और ध्यान में लगाये |

३: उपवास करे और सिर्फ दूध का सेवन करे (या नमक मिर्च बिना का भोजन करें ) |

४: रविवारी सप्तमी के दिन और उससे एक रात पहले भूमि पर शयन का करें |

५:
रविवारी सप्तमी से एक रात्रि पहले साधकों को चाहिए की वो एक मजबूत संकल्प ले की मै कल मौन रखूँगा सद्ग्रंथो जैसे की जीवन रसायन ,इश्वर की ओर और दिव्य प्रेरणा प्रकाश का पठन करूँगा  और अपने आपको सतत जप और ध्यान में संलग्न रखूँगा |

 महत्वपूर्ण संकेत :
पूज्य बापू जी ने कहा है की जो स्त्रियां अपने मासिक धर्म में हो वो इन सभी संकेतों को पालन करने से मुक्त है | परन्तु और सभी साधकों को ये नियम अवश्य पालन करना चाहिए |

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घातक रोगों से मुक्ति :

 >> रविवार सप्तमी के दिन बिना नमक का भोजन करें। बड़ दादा के १०८ फेरे लें ।

 >> सूर्य भगवान का पूजन करें, अर्घ दें व भोग दिखाएँ, दान करें । तिल के तेल का दिया सूर्य भगवान को दिखाएँ व ये मंत्र बोलें :-
"जपा कुसुम संकाशं काश्य पेयम महा द्युतिम । तमो अरिम सर्व पापघ्नं प्रणतोस्मी दिवाकर ।।"

नोट : घर में कोई बीमार रहता हो या घातक बीमारी हो तो परिवार का सदस्य ये विधि करें तो बीमारी दूर होगी ।

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सूर्य पूजन विधि :

१) सूर्य भगवान को तिल के तेल का दिया जला कर दिखाएँ , आरती करें |

२) जल में थोड़े चावल ,शक्कर , गुड , लाल फूल या लाल कुमकुम मिला कर सूर्य भगवान को अर्घ्य दें |

सूर्य अर्घ्य मंत्र : 1. ॐ मित्राय नमः। 2. ॐ रवये नमः। 3. ॐ सूर्याय नमः। 4. ॐ भानवे नमः। 5. ॐ खगाय नमः। 6. ॐ पूष्णे नमः। 7. ॐ हिरण्यगर्भाय नमः। 8. ॐ मरीचये नमः। 9. ॐ आदित्याय नमः। 10. ॐ सवित्रे नमः। 11. ॐ अर्काय नमः। 12. ॐ भास्कराय नमः। 13. ॐ श्रीसवितृ-सूर्यनारायणाय नमः।

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