International Day Of Yoga

Mudras

प्रातः स्नान आदि के बाद आसन बिछा कर हो सके तो पद्मासन में अथवा सुखासन में बैठें। पाँच-दस गहरे साँस लें और धीरे-धीरे छोड़ें। उसके बाद शांतचित्त होकर निम्न मुद्राओं को दोनों हाथों से करें। विशेष परिस्थिति में इन्हें कभी भी कर सकते हैं।

Morning after taking bath , spread out an Asana and sit comfortably in Padmasan or Sukhasan.Take 5-10 deep breaths  and exhale slowly.After that sit calmly and perform Mudras as given below.In special cases these can be done any time.Mudras start electromagnetic currents within the body which balance various constituting elements and restore health. The joining of fingers creates an effect on the human body. Mudras create an energy field and can be used in healing.

पूज्यश्री कहते हैं

पूज्यश्री कहते हैं- तुम अपने को दीन-हीन कभी मत समझो। तुम आत्मस्वरूप से संसार की सबसे बड़ी सत्ता हो। तुम्हारे पैरों तले सूर्य और चन्द्र सहित हजारों पृथ्वियाँ दबी हुई हैं। तुम्हें अपने वास्तविक स्वरूप में जागने मात्र की देर है। अपने जीवन को संयम-नियम और विवेक वैराग्य से भरकर आत्माभिमुख बनाओ। अपने जीवन में ज़रा ध्यान की झलक लेकर तो देखो! आत्मदेव परमात्मा की ज़री झाँकी करके तो देखो! बसफिर तो तुम अखण्ड ब्रह्माण्ड के नायक हो ही। किसने तुम्हें दीन-हीन बनाए रखा है? किसने तुम्हें अज्ञानी और मूढ़ बनाए रखा है? मान्यताओं ने ही ना...? तो छोड़ दो उन दुःखद मान्यताओं को। जाग जाओ अपने स्वरूप में। फिर देखो, सारा विश्व तुम्हारी सत्ता के आगे झुकने को बाध्य होता है कि नहीं? तुमको सिर्फ जगना है.... बस। इतना ही काफी है। तुम्हारे तीव्र पुरूषार्थ और सदगुरू के कृपा-प्रसाद से यह कार्य सिद्ध हो जाता है।

कुण्डलिनी प्रारम्भ में क्रियाएँ करके अन्नमय कोष को शुद्ध करती है। तुम्हारे शरीर को आवश्यक हों ऐसे आसन, प्राणायाम, मुद्राएँ आदि अपने आप होने लगते हैं। अन्नमय कोष, प्राणमय कोष,मनोमय कोष की यात्रा करते हुए कुण्डलिनी जब आनन्दमय कोष में पहुँचती है तब असीम आनन्द की अनुभूति होने लगती है। तमाम शक्तियाँ, सिद्धियाँ, सामर्थ्य साधक में प्रकट होने लगता है। कुण्डलिनी जगते ही बुरी आदतें और व्यसन दूर होने लगते हैं।

इस योग को सिद्धयोग भी कहा जाता है। आनन्दमय कोष से भी आगे गुणातीत अवस्था करने के लिए इस सिद्धयोग का उपयोग हो सकता है तथा आत्मज्ञान पाकर जीवन्मुक्त के ऊँचे शिखर पर पहुँचने के लिए योगासन सहाय रूप हो सकते हैं।

Simple Yogasanas & Exercise Videos

Read about common Asanas in English

Tadasan vajrasan
 sarvangasan  chakrasan
 dhanurasan  mahamudra
 thalbasti  

आसनों की प्रकिया में आने वाले कुछ शब्दों की समझ

रेचक का अर्थ है श्वास छोड़ना।

पूरक का अर्थ है श्वास भीतर लेना।

कुम्भक का अर्थ है श्वास को भीतर या बाहर रोक देना। श्वास लेकर भीतर रोकने की प्रक्रिया को आन्तर या आभ्यान्तर कुम्भक कहते हैं। श्वास को बाहर निकालकर फिर वापस न लेकर श्वास बाहर ही रोक देने की क्रिया को बहिर्कुम्भक कहते हैं।

चक्रः चक्र, आध्यात्मिक शक्तियों के केन्द्र हैं। स्थूल शरीर में चर्मचक्षु से वे दिखते नहींक्योंकि वे हमारे सूक्ष्म शरीर में स्थित होते हैं। फिर भी स्थूल शरीर के ज्ञानतन्तु,

स्नायु केन्द्र के साथ उनकी समानता जोड़कर उनका निर्देश किया जाता है। हमारे शरीर में ऐसे सात चक्र मुख्य हैं। 1. मूलाधारः गुदा के पास मेरूदण्ड के आखिरी मनके के पास होता है। 2. स्वाधिष्ठानः जननेन्द्रिय से ऊपर और नाभि से नीचे के भाग में होता है। 3. मणिपुरः नाभिकेन्द्र में होता है। 4. अनाहतः हृदय में होता है। 5. विशुद्धः कण्ठ में होता है। 6. आज्ञाचक्रः दो भौहों के बीच में होता है। 7. सहस्रारः मस्तिष्क के ऊपर के भाग में जहाँ चोटी रखी जाती है, वहाँ होता है।

नाड़ीः प्राण वहन करने वाली बारीक नलिकाओं को नाड़ी कहते हैं। उनकी संख्या 72000 बतायी जाती है। इड़ापिंगला और सुषुम्ना ये तीन मुख्य हैं। उनमें भी सुषुम्ना सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण है।

Pranayams for physical & spiritual progress by Bapuji

आवश्यक निर्देश


1.      भोजन के छः घण्टे बाद, दूध पीने के दो घण्टे बाद या बिल्कुल खाली पेट ही आसन करें।

2.      शौच-स्नानादि से निवृत्त होकर आसन किये जाये तो अच्छा है।

3.      श्वास मुँह से न लेकर नाक से ही लेना चाहिए।

4.      गरम कम्बल, टाट या ऐसा ही कुछ बिछाकर आसन करें। खुली भूमि पर बिना कुछ बिछाये आसन कभी न करें, जिससे शरीर में निर्मित होने वाला विद्युत-प्रवाह नष्ट न हो जायें।

5.      आसन करते समय शरीर के साथ ज़बरदस्ती न करें। आसन कसरत नहीं है। अतः धैर्यपूर्वक आसन करें।

6.      आसन करने के बाद ठंड में या तेज हवा में न निकलें। स्नान करना हो तो थोड़ी देर बाद करें।

7.      आसन करते समय शरीर पर कम से कम वस्त्र और ढीले होने चाहिए।

8.      आसन करते-करते और मध्यान्तर में और अंत में शवासन करके, शिथिलीकरण के द्वारा शरीर के तंग बने स्नायुओं को आराम दें।

9.      आसन के बाद मूत्रत्याग अवश्य करें जिससे एकत्रित दूषित तत्त्व बाहर निकल जायें।

10.  आसन करते समय आसन में बताए हुए चक्रों पर ध्यान करने से और मानसिक जप करने से अधिक लाभ होता है।

11.  आसन के बाद थोड़ा ताजा जल पीना लाभदायक है. ऑक्सिजन और हाइड्रोजन में विभाजित होकर सन्धि-स्थानों का मल निकालने में जल बहुत आवश्यक होता है।

12.  स्त्रियों को चाहिए कि गर्भावस्था में तथा मासिक धर्म की अवधि में वे कोई भी आसन कभी न करें।

13.  स्वास्थ्य के आकांक्षी हर व्यक्ति को पाँच-छः तुलसी के पत्ते प्रातः चबाकर पानी पीना चाहिए। इससे स्मरणशक्ति बढ़ती है, एसीडीटी एवं अन्य रोगों में लाभ होता है।

Bapuji ki yog siddhi

Kundalini Yog

Rare Video of DadGuruji doing yoga

 

Developing the Life force

 

स्वास्थ्य सत्संग

 

Book

साधारण मनुष्य अन्नमय, प्राणमय और मनोमय कोष में जीता है। जीवन की तमाम सुषुप्त शक्तियाँ नहीं जगाकर जीवन व्यर्थ खोता है। इन शक्तियों को जगाने में आपको आसन खूब सहाय रूप बनेंगे। आसन के अभ्यास से तन तन्दरूस्त, मन प्रसन्न और बुद्धि तीक्षण बनेगी। जीवन के हर क्षेत्र में सुखद स्वप्न साकार करने की कुँजी आपके आन्तर मन में छुपी हुई पड़ी है। आपका अदभुत सामर्थ्य प्रकट करने के लिए ऋषियों ने समाधी से सम्प्राप्त इन आसनों का अवलोकन किया है।

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हजारों वर्ष की कसौटियों में कसे हुए, देश-विदेश में आदरणीय लोगों के द्वारा आदर पाये हुए इन आसनों की पुस्तिका देखने में छोटी है पर आपके जीवन को अति महान बनाने की कुँजियाँ रखती हुई आपके हाथ में पहुँच रही है।

इस पुस्तिका को बार-बार पढ़ो, आसनों का अभ्यास करो। हिम्मत रखो। अभ्यास का सातत्य जारी रखो। अदभुत लाभ होगा....... होगा........ अवश्य होगा। समिति की सेवा सार्थक बनेगी।

संत श्री आसारामजी बापू

Normal humans live whole their lives at physical, astral or up until causal sheaths. Without awakening all hidden powers, life is laid finally to worthless state. Practice of yogic postures will prove you very helpful in awakening these powers. With its practice, you’ll have your body fit, thoughts happy and mental capacity- vital and sharp. In every field of life, the key to achieve your dreamt success is nested deep within you. To unveil the deep strength present in you, the ascetics have evaluated these asanas deep within Samadhi.

                Enriched over thousand years, after earning respect from worthy and notable names of lands – domestic and foreign, this small booklet seeds within herself all the keys to lead your life to its highest planes of ascension.

                Read this book again and again. Practice the asanas within. Be courageous and willing. Keep the sanctity of continuity in your practice. Amazing results will manifest… surely… yes, yes and yes. The organization’s handworks will also borne fruits.

 

Saint Shri Asharamji Bapu