ऐसी है उनकी अहैतुकी कृपा !

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ऐसी है उनकी अहैतुकी कृपा !

(मातृ-पितृ पूजन दिवस: 14 फरवरी)

14 फरवरी को बच्चे-बच्चियाँ और उनके माँ-बाप ‘मातृ-पितृ पूजन दिवस’ मनायें । माँ-बाप बच्चों पर ऐसे ही मेहरबान होते हैं, बेटे-बेटियाँ माँ-बाप का पूजन करेंगे तो उनकी गहराई का आशीर्वाद बेटे-बेटियों को दीर्घजीवी, यशस्वी, बुद्धिमान बनायेगा और वे बुरी संगत, बुरे कर्मों से बचेंगे । वेलेंटाइन डे से तो प्रेमी-प्रेमिका बनने-बनाने में सत्यानाश होता है, बुरी संगत होती है लेकिन माँ-बाप के पूजन व सम्मान से पुत्र-पुत्री बुरी संगत से बचकर स्नेह व अच्छे संस्कार पायेंगे ।

माँ-बाप व सद्गुरु का हृदय जीतो

जो युवक-युवती संयम और पवित्र आचारों से अपनी उन्नति करके माँ-बाप का दिल नहीं जीतते, उनके दिल को ठेस पहुँचे ऐसा आचरण करते हैं उनका भविष्य अच्छा नहीं होता । अभी भले मेरी बात उनको अच्छी नहीं लगे पर मैं सही कहता हूँ । कोशिश करो, माँ-बाप के हृदय को जीतो । माँ-बाप तो संतान को देखकर वैसे ही पिघलते रहते हैं लेकिन कुछ लोग नासमझी की अंधकारमय रेलगाड़ी में हैं न, इसीलिए उनको पता नहीं चलता ।

माँ-बाप को प्रसन्न रखना चाहते हो और वे प्रसन्न न रहें इस बात को हम नहीं मानते । उनका दयालु स्वभाव होता है । जैसे भगवान और सद्गुरु अहैतुकी कृपा करते हैं, ऐसे ही बेटे-बेटियों को देखकर माँ-बाप की अहैतुकी कृपा होती है ।

माता-पिता और सद्गुरु - इन तीनों का जिसके हृदय में स्थान है उससे भगवान नाराज हो जायें तो कोई परवाह नहीं । माँ-बाप और सद्गुरु - ये राजी हैं तो अपने-आप भगवान को राजी होना पड़ेगा । गुरुगीता में लिखा है कि ‘शिव के क्रोध से गुरुदेव रक्षण करते हैं लेकिन गुरुदेव के क्रोध से शिवजी रक्षण नहीं करते ।’

पिता के पास माता जैसा वात्सल्य नहीं होता है और माँ के पास पिता जैसा शासन नहीं होता है । और सखा से दिल खोलकर तुम जो बात कर सकते हो - अपने जीवन की या अपनी गलतियों की अथवा अपने कर्मों की, वह तुम माँ-बाप दोनों से नहीं कर सकते हो । किंतु सद्गुरु, बुद्धपुरुष एक ऐसी जगह हैं कि जहाँ तुम सखा की नाईं अपना दिल खोलकर अपनी करतूतें पेश कर सकते हो । जहाँ से तुम्हें माता जैसा प्यार मिल जाता है, पिता जैसा शासन मिल जाता है और इष्ट जैसा तुम्हें स्वराज्य मिल जाता है तथा सद्गुरु जैसा जहाँ से तुम्हें स्वरूप मिल जाता है वे हैं ब्रह्मवेत्ता सद्गुरु !

ऐसे सद्गुरु जिन्होंने पाये उनके लिए शिवजी कहते हैं :

धन्या माता पिता धन्यो गोत्रं धन्यं कुलोद्भवः ।

धन्या च वसुधा देवि यत्र स्याद् गुरुभक्तता ।।

बेटे-बेटियों को कैसा होना चाहिए ?

बेटे को तो ऐसा कहना चाहिए कि ‘पिताजी ! आपने कृपा करके मुझे बड़ा किया है । आपको 50-60 साल हो गये, अब आप आराम कीजिये, दो रोटी तो खानी हैं, क्या परिश्रम करते हैं ! नौकरी छोड़ दीजिये ।’ परंतु पाश्चात्य शिक्षण व अश्लील सिनेमाओं ने, भोगी व्यक्तियों के संग ने अच्छे-अच्छे खानदान के बच्चों की बुद्धि नष्ट कर दी ।

बेटा बाप से बोलता है : ‘‘मेरी पगार मैं रखूँगा, तुम्हारा घर तुम चलाओ ।’’

यह बेटा है कि राक्षस है ! बेटा था तो खानदानी लेकिन ये आसुरी संस्कार अंदर घुस गये ।

माता-पिता के आशीर्वाद से अंतःकरण की शुद्धि जल्दी होती है । गणपतिजी ने पार्वतीजी और शिवजी का पूजन किया था तो देखो गणपति कितने सम्मानित होते हैं ! मैंने अपने माता-पिता का आदर किया तो मेरे को क्या घाटा है ! अतः 14 फरवरी को बच्चे-बच्चियाँ अपने माँ-बाप का आदर-पूजन करेंगे और माँ-बाप भी उनको ‘तुममें यह गलती है, तू ऐसी है, तू ऐसा है...’ - इस प्रकार कहकर उनकी कमियों को और दृढ़ नहीं करेंगे अपितु इनसे बचायेंगे । ‘तुम्हारे मन में यह गलती, वह गलती आती है-जाती है । तुम उसे उखाड़ के फेंक सकते हो । बहादुर हो, वीर हो, हिम्मतवान हो !’ - इस प्रकार उनके सद्गुणों को उभारकर उन्हें उत्साहित करेंगे ।

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Jap Significance

On the holy eve of Janmastami, Sri Krishna himself incarnated on Night at 12. Janmastami Night , is one of the Mahaaraatris when doing Japa, Dhyan is uncountable times beneficial than on a normal day. Keeping fast on Janmastami is more than thousand times beneficial than Ekadashi fast. A person, who, on this day, worships Lord Krishna washes away his sins, either great or small, or performed in childhood, youth, or maturity, in seven births.

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अहमदाबाद आश्रम में जन्माष्टमी (24 अगस्त)


पूज्य बापूजी का विडियो सत्संगः सुबह ९ से १०

श्री आशारामायणजी का पाठः सुबह १० से १०-३०

श्रीगुरुपादुका पूजनः सुबह १०-३० से ११-३०

दोपहर की संध्याः दोपहर ११-४५ से १२-४५

पूज्य बापूजी का विडियो सत्संगः दोपहर ३ से ४

सामूहिक जपः शाम ४ से ५ 

जप,पाठ, सत्संग व जन्माष्टमी उत्सवः रात्रि ९-३० से १२-३०

(बहनों के लिए महिला आश्रम में)

* एक जन्माष्टमी का व्रत एक हजार एकादशी के बराबर है ।

* भारतवर्ष में रहनेवाला जो प्राणी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का व्रत करता है, वह सौ जन्मों के पापों से मुक्त हो जाता है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण)

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