हनुमान जी के जीवन चरित्र से प्रेरणा

हनुमान तेहि परसा कर पुनि कीन्ह प्रनाम ।

राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहाँ बिश्राम ।।

 

  हनुमानजी ने मैनाक पर्वत को हाथों से छू दिया, फिर प्रणाम करके कहा – भाई ! श्रीरामचन्द्रजी का काम किये बिना मुझे विश्राम कहाँ?

तो जिस प्रकार श्री राम के कार्य को पूर्ण किये बिना हनुमान जी को विश्राम भाता नहीं, उसी तरह हम साधकों का भी यही दृड़ निश्चय होना चाहिए कि गुरुदेव हमें जिस परम लक्ष्य तक पहुँचना चाहते हैं, हम उसे पाए बिना रुके नहीं और कहीं विश्राम के लिए रुके नहीं ! हनुमान जी के जीवन चरित्र से प्रेरणा लेते हुए हमें भी इसी तरह नित-निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए !

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    Mountain View Sadguno ki Khaan: Shri Hanumanji
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हनुमान जी के २ मूल मन्त्र

बापू जी ने अनेको बार अपने सत्संग में हनुमान जी के गुणों की चर्चा कर अपने साधकों को प्रेरित किया और समझाया कि अष्टसिधियों और नवनिधियों के धनी हनुमान जी श्री राम जी की शरण में गये और पूर्णता को प्राप्त हुये तभी तो स्वयं भगवान राम ने अगस्त मुनि से हनुमान जी के गुणों का बखान भी किया था

॥राम कथा सुनवे को रसिया, राम काज बिन कहां विश्रामा

यह हनुमान जी का मूल-मंत्र है और राम कथा सुनवे को रसिया जिसके जीवन में भगवत-कथा नहीं उसके जीवन में भगवत​-ज्ञान भी नहीं, भगवत- रस भी नहीं, भगवत​-विश्रांति भी नहीं है तो फिर बचा क्या जीवन में भगवत-ज्ञान  नहीं,भगवत​- रस नहीं है , भगवत​-विश्रांति नहीं है तो विकारी ज्ञान,विकारी रस और विकारी हरकतें और फिर मुसीबतें तो उत्तेजक फिल्मों के कारण ,शराब के कारण वर्णन ना कर सकें ऐसी गंदी हरकतें समाज में जगह ले रही हैं । और हनुमान जी की जयंती ब्रह्मचर्य के समर्थक , आजीवन बाल ब्रह्मचारी हनुमान जी के विचार ,हनुमान जी का उद्देश्य । हनुमान  जी का उद्देश्य क्या था हनुमान जी के पास अष्टसिद्धियाँ  और नवनिधियाँ  थी फिर भी हनुमान जी उस अष्टसिद्ध का सामर्थ्य सारी धरती के राजा मिलकर ,सेनापति मिलकर ,राष्ट्रपति मिलकर बराबरी नहीं कर सकते । जब हनुमान जी राम जी की शरण गये उस समय राम जी के सान्निधय के बाद वाले हनुमान जी नहीं , राम जी की शरण जाने के पहले वाले हनुमान जी के पास अष्टसिद्धियां थी अणिमा-छोटे हो जायें, गरिमा-बड़े हो जायें ,लघिमा इस प्रकार की सिद्धियाँ  थी अष्टसिद्धि, नवनिद्धि थी फिर भी हनुमान जी श्री राम जी की शरण गये  

बिन शर्ति शरणागति ले ली , राम कथा सुनवे को रसिया और राम काज बिन कहां विश्रामा , यह हनुमान जी के दो मूलमंत्र थे तो जिससे आत्म​-ज्ञान पाना है जिससे पूर्ण गुरु कृपा मिली पूर्ण गुरु का ज्ञान आसुमल से हो गये साईं आसाराम वो तत्व पाना है तो उसके दैवीय कार्य के बिना विश्राम क्या जो गुरु के दैवीय कार्य को खोज नहीं पाता , कर नहीं पाता वो गुरु के दैवीय अनुभव को क्या खोजेगा क्या करेगा उस ब्रह्मपरमात्मा के ज्ञान को पाने के लिये हनुमान जी राम जी के चरणों में बिन शर्ति शरणागति स्वीकार करें राम जी के पास जाने से पहले हनुमान जी के पास वह शक्ति थी ब्राह्मण रुप बन गये थे ,उड़  कर पहुँच  गये थे हनुमान जी राम जी और लक्ष्मण जी को कंधों पर बिठा कर उड़ान भरने में समर्थ थे , लेकिन उस ब्रह्मपरमात्मा के ज्ञान के अभाव में राम जी की सेवा में लग गये

ज्ञात्वा देवं मुच्यते सर्व पाशेभ्य - उस आत्मदेव को जानने के बाद सब पाशों से , सब बंधनों से व्यक्ति मुक्त हो जाता है तुम्हारे अंदर इतनी संभावना है , इतनी योग्यता है,इतनी महानता है कि हनुमान जी जैसे अष्टसिद्धि, नवनिद्धि आने के बाद भी तुम्हें उस आत्म​-ज्ञान का उद्देश्य उसको सुनने का समझने का नजरिया होना चाहिये

शास्त्र कहते हैं स्नातं तेनं सर्वतीर्थं -उसने सब तीर्थों में स्नान कर लिया, दानं तेनं सर्वदानम- उसने सब कुछ दान कर दिया , कृतं  तेनं सर्वयज्ञं येन क्षणं  मनः ब्रह्माविचारे स्थिरंकृत्वा - ब्रह्मपरमात्मा के विचार में एक  क्षण  के लिये मन स्थिर किया उसने सारे  तीर्थ कर लिये ,सारे यज्ञ कर लिये , सारा श्रेष्ठ कर लिया उस ज्ञान के लिये पहुंचने वाले हनुमान जी की जयंती है उसकी बधाई हो

हनुमान जी की उपासना , हनुमान जी की स्मृति बुद्धि, बल ,कीर्ति और धीरता देने वाली है , निर्भीकता,आरोग्यता,सुदृढ़ता  और वाकपटुता पाने वाले लोग भी इस हनुमान जयंती को हनुमान जी की गुणगाथा सुनकर अपने में वह धारण करने का मन करेंगे तो उनका संकल्प भी देर​-सवेर फल सकता है  

श्री रामचंद्र  जी अगस्त्य जी से हनुमान के गुणों का वर्णन करते हैं भगवान जिसके गुणों का वर्णन करें वह  है  हनुमान जी का महत्वपर्ण जीवन , शूरवीरता की प्रशंसा करते राम जी अघाते नहीं और दक्षता -किसी के पक्षपात में ना बह जाना ऐसी बुद्धि की दक्षता हनुमान जी की अर्थात आपकी बुद्धि की दक्षता बढे और आपकी मानसिक शूरवीरता और शारीरिक शूरवीरता रहे यह हनुमान जयंती का पर्व आपको उत्साहित करता है बल की प्रशंसा करते हैं इंद्रिय बल भी है, मनोबल भी है, ब्रह्मचर्य बल भी है धैर्य की प्रशंसा करते हैं और श्री राम जी अगस्त्य ऋषि के आगे हनुमान जी की विद्वता की प्रशंसा भूरि-भूरि  करते हैं लेकिन विद्वान केवल विद्वान ही नहीं हैं हनुमान जी नीति ज्ञान में भी निपुण हैं और पराक्रमी और प्रभावसम्पन्न हैं तो आपके जीवन में हनुमान जी के ये दिव्य गुण प्रभावसम्पन्न​, पराक्रमी, ज्ञान,नीति,विद्वता 

सार्टीफिकेट ना भी हो तभी भी विद्वता सत्संग के द्वारा हासिल हो जाती है धैर्य , बल​, दक्षता,शूरवीरता,सात्विक गुण निधानता यह हनुमान जी की परंपरा के हैं राम जी भक्त परंपरा के हैं ।हमारे लिये भी इन  दिव्य गुणों का वास हो अथवा इन दिव्य गुणों की तरफ हम भी नजरिया रखें तो विकसित हो सकते हैं  

संकटमोचन बारह नाम सोते समय अथवा प्रातः अथवा यात्रा के आरंभ के समय बारह नाम हनुमान जी के लेता है तो भयभीत व्यक्ति का भय दूर हो जाता है एक तो हनुमान दूसरा अंजनिसूत तीसरा वायुपुत्र चौथा महाबली पांचवा रामेष्ठ राम जी के प्रिय और छठा नाम है अर्जुन के मित्र फाल्गुन सख सातवां नाम है भूरे नेत्र वाले हनुमान जी पिंगाक्ष , आठवां नाम है अमित​-विक्रम और नौवां नाम है उदधीक्रमण -समुद्र लांघने वाले और दसवां नाम है सीता शोक विनाशक और ग्यारवां नाम है लक्ष्मण प्राण दाता और हनुमान जी का बारहवां नाम है दशग्रीव-दरपाहा अर्थात रावण के घमंड को दूर करने वाला यह बारह नाम का सुमिरन करने वाला रात को सोते समय , सुबह उठते समय अथवा यात्रा करते समय यह बारह नाम सुमिरन करे तो उसके भय का नाश होता है ऐसा लिखा है कलह को,क्लेश को ,रोग को,शारीरिक दुर्बलता को दूर करने के लिये मंत्र है जिसको घर में कलह मिटाना हो ,शारीरिक दुर्बलता मिटाना हो वो इस चौपाई का पुनरावृति किया करें

॥बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौ पवन कुमार, बल बुद्धि विद्या देहु मोहि हरहु क्लेश विकार

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20079 Rate this article:
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