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Diksha Articles
अर्थ और महत्व अर्थ और महत्व :
अर्थ दिव्यं जनानां यतो दद्यात ,कुर्यत पपस्या संक्षयं | तस्मात् दिक्सेती सा प्रोक्ता ,देसीकैस तत्त्व कोविदै: || आध्यात्मिक पुरुष जिन्होंने तत्व/ सत्य को जाना है द्वारा, वह विधि जो शिष्य को दिव्य ( अनुभवातित / अतिश्रेष्ठ ) ज्ञान देती है और पापों को नष्ट करती है , उसे दीक्षा कहते हैं । महत्व - पूज्य ब...



मंत्रदीक्षा से दिव्य लाभ मंत्रदीक्षा से दिव्य लाभ :
मंत्रदीक्षा से दिव्य लाभ पूज्य बापू जी से मंत्रदीक्षा लेने के बाद साधक के जीवन में अनेक प्रकार के लाभ होने लगते हैं, जिनमें 18 प्रकार के प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं- 1. गुरुमंत्र के जप से बुराइयाँ कम होने लगती हैं। पापनाश व पुण्य संचय होने लगता है। 2. मन पर सुख-दुःख का प्रभाव पहले जैसा नहीं पड़ता। 3. ...



गुरुमंत्र के जप से उत्पन्न 15 शक्तियाँ गुरुमंत्र के जप से उत्पन्न 15 शक्तियाँ :
गुरुमंत्र के जप से उत्पन्न 15 शक्तियाँ 1. भुवनपावनी शक्तिः नाम कमाई वाले संत जहाँ जाते हैं, जहाँ रहते हैं, यह भुवनपावनी शक्ति उस जगह को तीर्थ बना देती है। 2. सर्वव्याधिनाशिनी शक्तिः सभी रोगों को मिटाने की शक्ति। 3. सर्वदुःखहारिणी शक्तिः सभी दुःखों के प्रभाव को क्षीण करने की शक्ति। 4. कलिकालभुजंगभयन...



आशीर्वाद मंत्र के लाभ आशीर्वाद मंत्र के लाभ :
मंत्रदीक्षा में मिलने वाले आशीर्वाद मंत्र के लाभ पूज्य बापूजी मंत्रदीक्षा के समय गुरुमंत्र या सारस्वत्य मंत्र के साथ एक आशीर्वाद मंत्र भी देते हैं। रोज इस मंत्र का एक माला जप करने से हार्टअटैक आदि हृदय के विकारों से रक्षा होती है। दिमाग के रोगों में भी लाभ होता है। यदि यकृत (लीवर) खराब हो गया हो तो...



गुरुमंत्र के जप से खुल जाते हैं भाग्य के ताले गुरुमंत्र के जप से खुल जाते हैं भाग्य के ताले :
गुरुमंत्र के जप से खुल जाते हैं भाग्य के ताले गुरुमंत्र के जप से व्यक्ति की जन्मकुंडली में विभिन्न स्थानों की शुद्धि होती है और अनेक लाभ प्राप्त होते हैं जो इस प्रकार हैं- 1 करोड़ जपः तन स्थान की शुद्धि, रज-तम नाश, सत्त्ववृद्धि, रोग बीज नाश, शुभ स्वप्न, स्वप्न में संत देव दर्शन, वार्ता। 2 करोड़ जपः...



शास्त्रों के अनुसार महत्व शास्त्रों के अनुसार महत्व :
श्रीमद् भगवदगीता तद्विद्धि प्रणिपातेन परिप्रश्नेन सेवया। उपदेक्ष्यन्ति ते ज्ञानं ज्ञानिनस्तत्त्वदर्शिनः || उस ज्ञान को तू तत्त्वदर्शी ज्ञानियों के पास जाकर समझ, उनको भली भाँति दण्डवत प्रणाम करने से, उनकी सेवा करने से और कपट छोड़कर सरलतापूर्वक प्रश्न करने से वे परमात्म-तत्त्व को भली भाँति जानने वाले...



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