भगवन्नाम-जपः एक अमोघ साधन

भगवन्नाम जप-संकीर्तन से अनगिनत जीवों का उद्धार हुआ है एवं अनेक प्राणी दुःख से मुक्त होकर शाश्वत सुख को उपलब्ध हुए हैं।

 

भगवन्नाम-जापक, भगवान के शरणागत भक्तजन प्रारब्ध के वश नहीं रहते। कोई भी दीन, दुःखी, अपाहिज, दरिद्र अथवा मूर्ख पुरुष भगवन्नाम का जप करके, भगवान की भक्ति का अनुष्ठान करके इसी जन्म में कृतकृत्य हो सकता है।

 

भगवन्नाम की डोरी में प्रभु स्वयँ बँध जाते हैं और जिनके बंदी स्वयं भगवान हों, उन्हें फिर दुर्लभ ही क्या है?

इस असार संसार से पार होने के लिए भगवन्नाम-स्मरण एक सरल साधन है।

 

ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ

7 janmon ki daridrata mitane keliye

 

Jo 7 Janmon Ki daridrata dur kerna chahte hain ve 7 saptah tak 120 mala Omkar Mantra ki Japen , aur Surya Narayan ko Khir ka bhog lagaker , brumadhya me Surya Narayan Ka Dhyan karen

बीजमन्त्रों से स्वास्थ्य-सुरक्षा

 

बीजमन्त्र                    लाभ

कं                            मृत्यु के भय का नाश, त्वचारोग व रक्त विकृति में।

ह्रीं                            मधुमेह, हृदय की धड़कन में।

घं                             स्वपनदोष व प्रदररोग में।

भं                             बुखार दूर करने के लिए।

क्लीं                           पागलपन में।

सं                         बवासीर मिटाने के लिए।

वं                             भूख-प्यास रोकने के लिए।

लं                             थकान दूर करने के लिए।

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शुभ संकल्प करने एवं सुसंग व सुज्ञान पाने का पर्व : उत्तरायण
Ashram India

शुभ संकल्प करने एवं सुसंग व सुज्ञान पाने का पर्व : उत्तरायण

- पूज्य बापूजी

भगवान के होकर आगे बढ़ो !

उत्तरायण का वाच्यार्थ यही है कि सूर्य का उत्तर की तरफ प्रस्थान । ऐसे ही मानव ! तू उन्नति की तरफ चल, सम्यक् क्रांति कर । सोने की लंका पा लेना अथवा बाहर की पदवियाँ ले लेना, मकान-पर-मकान बना के और कम्पनियों-पर-कम्पनियाँ खोलकर उलझना - यह राक्षसी उन्नति है । आधिभौतिक उन्नति में अगर आध्यात्मिक सम्पुट नहीं है तो वह आसुरी उन्नति है । रावण के पास सोने की लंका थी लेकिन अंदर में सुख-शांति नहीं थी । क्या काम की वह उन्नति ! हिटलर, सिकंदर की उन्नति क्या काम की ? उनको ही ले डूबी । राजा जनक, राजा अश्वपति, राजा रामजी की उन्नति वास्तविक उन्नति है । रामजी के राज्याभिषेक की तैयारियाँ हो रही थीं तो वे हर्ष में फूले नहीं और एकाएक कैकेयी के कलह से वनवास का माहौल बना तो दुःखी, शोकातुर नहीं हुए । घोड़े हुंकार रहे हैं, हाथी चिंघाड़ रहे हैं, युद्ध के मैदान में एक-दूसरे के रक्त के प्यासे राग-द्वेष में छटपटा रहे हैं... उस माहौल में अंतरात्मरस में तृप्त बंसीधर की बंसी बज रही है... श्रीकृष्ण की गीता के ज्ञान से अर्जुन का ‘नष्टो मोहः स्मृतिर्लब्धा’ हो गया । वास्तविक उन्नतिदाता के, गीता के आत्मज्ञान के प्रसाद से, बंसीधर की अनुभव-पोथी ‘गीता’ से अर्जुन तो शोक, मोह से तर गया और वह गीता-ज्ञान आज भी असंख्य लोगों की वास्तविक उन्नति का पथ-प्रदर्शन कर रहा है । हे मानव ! ऐसे तेरे महान आत्मवैभव को पा ले, पहचान ले !

‘अपने बल से मैं यह कर लूँगा, वह कर लूँगा...’ अगर अपने बल से कुछ करने में सफल हो गये तो अहंकार पछाड़ देगा और नहीं कर पाये तो विषाद दबा देगा लेकिन ‘देवो भूत्वा देवं यजेत् ।’ भगवान के होकर भगवान से मिल के आप आगे बढ़िये, बड़े सुरक्षित, उन्नत हो जाओगे । बड़ा आनंदित, आह्लादित जीवन बिताकर जीवनदाता को भी पा लोगे । चिन्मय सुख प्रकट होगा । संसारी सुख शक्ति का ह्रास करता है । विकारी सुख पहले प्रेम जैसा लगता है, बाद में खिन्नता, बीमारी और बुढ़ापा ले आता है लेकिन भगवत्सुख वास्तव में भगवन्मय दृष्टि देता है, भगवद्ज्ञान, भगवत्शांति, भगवत्सामर्थ्य से आपको सम्पन्न कर देता है ।

निसर्ग से दूर न होओ और अंतरात्मा की यात्रा करो

सूर्य को अर्घ्य देने से मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं । सूर्य की कोमल धूप में सूर्यस्नान करना और नाभि में सूर्य का ध्यान करना, इससे मंदाग्नि दूर होती है, स्वास्थ्य-लाभ मिलता है । सूर्यनमस्कार करने से बल और ओज-तेज की वृद्धि होती है । कहाँ तुमसे सूर्य दूर है, कहाँ परे है, कहाँ पराया है ! कपड़ों-पर-कपड़े पहनकर निसर्ग से दूर होना कुदरत के साथ द्रोह करना है । ऐसा करनेवाला मानव तुच्छ, पेटपालू प्राणी की नाईं भटकता रहता है, थक जाता है । थोड़ा अंतरंग साधन करो, थोड़ी अंतरात्मा की ओर यात्रा करो । चिन्मय सुख में आ जाओ, चिन्मय शांति में आ जाओ ।

वेद कहता है :

मित्रस्य मा चक्षुषा सर्वाणि भूतानि समीक्षन्ताम् । (यजुर्वेद : 36.18)

मेरा सब भूत-प्राणियों के साथ मित्रभाव है । मैं सबको प्यार करता हूँ, सब मुझे प्यार से देखते हैं । मैं सबका हित चाहता हूँ, मैं सबका मित्र हूँ ।

इसलिए उत्तरायण के पर्व पर गुड़ और तिल - तिल की स्निग्धता व गुड़ की मधुरता का मिश्रण करके महाराष्ट्र में एक-दूसरे को लड्डू बाँटते हैं । ऐसे ही तुम भी आपस में स्निग्धता और मधुरता अपने आत्मा-परमात्मा के साथ बरसाते जाओ ।

हजारों जन्मों का कार्य एक जन्म में

यह उत्तरायण का पर्व है । दक्षिणायन छोड़कर सूर्यनारायण का रथ उत्तर की तरफ बढ़ता है । ऐसे ही हे साधक ! तू नीचे का केन्द्र छोड़कर अब उत्थान की तरफ चल । यह उत्तरायण, मकर संक्रांति पर्व प्रकृति में परिवर्तन लाता है । सर्दियों पर गर्मियों की, अंधकार पर प्रकाश की विजय होती है । आलस्य पर उत्साह की, निद्रा पर जागरण की विजय होती है । हे साधक ! तू भी मोहनिद्रा पर ज्ञान-जागृति करके आगे बढ़ने का संकल्प कर ।

उत्तरायण वह समय है, जिसकी प्रतीक्षा भीष्म पितामह ने की थी । उत्तरायण पर्व का दिन देवताओं का प्रभातकाल है । इस दिन देवता जागते हैं, सात्त्विकता फैलाते हैं । कु-मुहूर्त सु-मुहूर्त में, शुभ मुहूर्त में बदलते हैं । ऐसे ही हे मानव ! तेरे जीवन में कुचेष्टा सुचेष्टा में, कुज्ञान सुज्ञान में, कुसंग सुसंग में और कुमाँग सुमाँग में बदले तो तेरा जीवन धन्य हो जायेगा । सुमाँग... ‘मुझे आत्मज्ञान चाहिए’, सुमित्र... ‘मुझे सत्संगी चाहिए’, सुचेष्टा... ‘मुझे परहित का कर्म चाहिए’ - इस प्रकार का दृष्टिकोण तेरे जीवन में आये । तू जगत की भाषा समझ ले, तू प्रकृति की भाषा को जान ले । जो प्रकृति तलवार की धार पर काम कराये वह मक्खन-मिश्री खिलाकर भी करवा सकती है । तू प्रकृति को, परमात्मा को सहयोग दे, वे तुझे आगे बढ़ाना चाहते हैं ।

हजारों जन्मों का काम तू एक जन्म में पूरा कर ! इस दिन से तेरे जीवन का रथ उन्नति की तरफ चले । इस दिन दृढ़ निश्चय कर ले कि ‘अब मैं उन्नति की तरफ चलूँगा अर्थात् शुभ संकल्प करूँगा, सुसंग और सुज्ञान प्राप्त करूँगा ।’

उत्तरायण को बनाओ महापर्व !

उत्तरायण दान करने का दिन है । अपने दिल के गाँव में ही उत्तरायण के इस महापर्व के दिन तुम दान कर दो अपने अहं का, अपनी क्षुद्र इच्छा-वासनाओं का । दान कर दो उस दाता परमात्मा को प्रेम का, दान कर दो अपने-आपे का । इससे बड़ा दान और क्या कर सकते हो तुम ?

जैसे प्रकृति में परिवर्तन आता है तो उसका प्रभाव हमारे तन-मन पर पड़ता है, ऐसे ही देवता जागते हैं तो हमारे मन पर प्रभाव पड़ता है, उत्तरायण के दिन का भी हमारे तन-मन पर प्रभाव पड़ता है और उसमें फिर हरि-प्यार और हरि-कीर्तन मिला दो तो तुम्हारी बहुत शीघ्र उन्नति होती है ।

तुम पठित हो या अपठित, प्यार कर सकते हो; अतः तिल की स्निग्धता और गुड़ की मिठास को निमित्त बनाकर अपनी स्निग्धता बाँटो - यह उत्तरायण पर्व बताता है । तुम्हारे हृदय का स्नेह और प्रभु की प्रीति - इन दोनों को मिलाओ तो तुम्हारा उत्तरायण महापर्व हो जायेगा बाबा !


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A Festival to make good resolves, be in holy company

and gain pious Knowledge: Uttarayana      

– Pujya Bapuji

Move ahead with the feeling of belonging to God!

Uttarayana etymologically implies the day on which the sun begins to move northwards. Likewise, O man! You begin to move towards progress and bring about right revolution. Obtaining the golden city of Lanka, attaining big external posts, getting engrossed in building one house after another, having one company after another- all are but demoniac progress. If physical progress is not counterbalanced by the spiritual progress, it is a demoniac progress. Ravana possessed the golden city of Lanka, but did not have inner peace and happiness. Then of what use is such progress? Of what use was the progress attained by the likes of Hitler and Alexander? It only led to them to utter ruin. The progress made by King Janaka, King Ashwapati and King Ramaji was true progress. Ramaji was not elated when preparations for his coronation were being made; and he did not grieve when all of a sudden he was exiled to forest due to Kaikeyi’s mischief. In the battlefield, horses were neighing and elephants were trumpeting around; blood thirsty warriors impelled by attachment and aversion were attacking one another; Lord Krishna, contented with the bliss of inner self, was as delighted as if He was playing on His flute. Arjuna’s delusion was destroyed and he regained the memory (Knowledge) through Krishna’s instructions in the form of the Gita. The gift of Self-knowledge given by the Giver of true progress through the Gita, the book of flute player’s realizations, helped Arjuna pass beyond sorrow and delusion; and that knowledge of Gita is guiding innumerable people treading the path of true progress even today. O man! You attain such a great majesty of Atman through its realization!

One may think, ‘I shall do this and that with my own power…’. However, should one succeed in achieving some goal on one’s own strength, he will be knocked down by the resultant egotism; and
if on the other hand he fails to do it, he will be depressed. Hence
‘देवो भूत्वा देवं यजेत् ।’ i.e. ‘One should become divine in order to worship God.’ Move ahead after meeting God, considering yourself of God and you will be well protected and elevated. You will not only lead a supremely joyous and blissful life but also attain the Giver of life (God). The bliss of consciousness will manifest in your life. Worldly enjoyments only deplete your energy. Carnal pleasure appears as love in the beginning, but brings dejection, disease and senility in the end; whereas, divine joy blesses you with divine vision and equips you with divine Knowledge, divine Peace and divine Power.

Do not go against Nature

And undertake a journey to the inner self

Offering oblation to the sun fulfils our wishes. Taking a sunbath in soft sunrays, visualizing the sun at your navel (center) cures indigestion and gives health-benefits. Doing Surya Namaskara (sun salutation) increases your strength, vigour, and brilliance. Is the sun far away from you? Is the sun beyond your reach? Is the sun others’? Covering the body with many layers of clothes is to go against Nature. The man who does this wanders like a petty selfish animal, living from hand to mouth, and gets exhausted in the end. Do some inward Sadhana, and undertake a journey to the inner self. The Vedas say:

मित्रस्य मा चक्षुषा सर्वाणि भूतानि समीक्षन्ताम् ।

 (The Yajurveda: 36.18)

i.e. “I am friendly with all beings. I love all, and they look at me affectionately. I wish everyone’s good, I am a friend of all.”

This is why the people in Maharashtra prepare Laddoos on the Uttarayana festival by mixing sesame seeds (unctuousness) and jaggery (sweetness), and give them to one another. Likewise, you continue to shower affection and sweetness on all around you along with the joy of your Atman, the Supreme Self.

Accomplish the task of thousands of births in one life

This is the festival of Uttarayana. On this day the Sun god embarks on a northerly journey leaving the southerly one. Similarly, O Sadhaka, you march to higher chakras from the lower ones. This Uttarayana or Makara Sankranti brings about the change of season. It marks the victory of the summer over the winter; and of light over the darkness; of zeal over lethargy and awakening over sleep. O Sadhaka! You too make a resolve to move ahead to become victorious over the slumber of delusion with the awakening of knowledge.

Uttarayana is that period for which Grandsire Bhishma waited to give up his body. The day of the Uttarayana festival is the dawn for the devas (gods). They wake up on this day and spread pious vibes all around. They turn bad muhurta into good muhurta. Likewise, O Man! Your life will be blessed if you turn your bad actions, knowledge, company and demand into good ones. Good demand… ‘I aspire for Self-Knowledge’; good friend… ‘I want satsangi friends’, Good actions… ‘I want to do benevolent acts’. May you develop such perspective in your life. Learn the language of the world; learn the language of nature. The nature that makes people act at gunpoint, can also motivate you do the same act affectionately. Co-operate with Nature and the Lord; they only wish your progress.

Accomplish the task that may take thousands of births, in a single life! Let the chariot of your life move northwards. Make a strong resolve on this day, ‘Now, I will move northwards, i.e. make auspicious resolves, keep good company and attain good knowledge.’

Let this Uttarayana become Grand Uttarayana!

Uttarayana is the day for doing charity. Donate your ego and petty desires in the village of your own heart on this great festival of Uttarayana. Donate love and even your individual self to that Giver, Lord! What bigger charity can you ever do?

The change in the season also affects our body and mind; similarly, the awakening of the gods and even the day of Uttarayana affects our body and mind. If you only add the love for Lord Hari along with collective chanting of His Name Divine thereto, it will ensure your quick progress.

Irrespective of whether you are a learned person or illiterate, you surely have the ability to love; so just bring the unctuousness of sesame seeds and sweetness of jaggery to your behaviour and dole out your affection to all –this is the message of the Uttarayana Festival. Just combine the affection in your heart with the benign love of the Lord, and then this Uttarayana will become the grand Uttarayana for you.

 


[Rishi Prasad-Issue-312-December-2018]


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Mantra Article

Handy Mantra List


बीजमंत्रों का महत्त्व समझकर उनका उच्चारण किया जाय तो बहुत सारे रोगों से छुटकारा मिलता है। उनका अलग-अलग अंगों एवं वातावरण पर असर होता है।
ʹૐʹ के ʹओʹ उच्चारण से ऊर्जाशक्ति का विकास होता है तो ʹमʹ से मानसिक शक्तियाँ विकसित होती हैं। ʹૐʹ से मस्तिष्क, पेट और सूक्ष्म इन्द्रियों पर सात्त्विक असर होता है। ʹह्रींʹ उच्चारण करने से पाचन-तंत्र, गले व हृदय पर तथा ʹह्रंʹ से पेट, जिगर, तिल्ली, आँतों व गर्भाशय पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। औषधि को एकटक देखते हुए ʹૐ नमो नारायणाय।ʹ मंत्र का 21 बार जप करके फिर औषधि लेने से उसमें भगवद्-चेतना का प्रभाव आता है और विशेष लाभ होता है। रात को नींद न आती हो तो ʹशुद्धे-शुद्धे महायोगिनी महानिद्रे स्वाहा।ʹ इस मंत्र का जप-स्मरण करें। स्मरण करते-करते अवश्य अच्छी नींद आयेगी।


दाँत-दाढ़ के दर्द पर मंत्र प्रयोगः

ॐ नमो आदेश गुरु का... बन में ब्याई अंजनी...जिन जाया हनुमंत.... कीड़ा मकड़ा माकड़ा.... ये तीनों भस्मंत.... गुरु की भक्ति.... मेरी भक्ति.... फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा।एक नीम की टहनी लेकर दर्द के स्थान पर छुआते हुए सात बार इस मंत्र को श्रद्धा से जपें। ऐसा करने से दाँत या दाढ़ का दर्द समाप्त हो जायगा और पीड़ित व्यक्ति आराम का अनुभव करेगा।

Note: Guru Mantra (Mantra given by Sath Guru during Mantra Diksha) is a connection between SathGuru and Shishya (Disciple) and should not be revelead to anyone ever.  Below are some useful powerful mantras that help Sadhaks in various way.

Beeja Mantra

for Memory, Intellect and in Coma

‘ऐं’ बीजमंत्र मस्तिषक को प्रभावित करता है। इससे बुद्धि, धारणाशक्ति व स्मृति का आश्चार्यकारक विकास होता है।
‘ऐं’ बीजमंत्र मस्तिषक को प्रभावित करता है। इससे बुद्धि, धारणाशक्ति व स्मृति का आश्चार्यकारक विकास होता है। इसके विधिवत जप से कोमा में गये हुए रुग्ण भी होश में आ जाते हैं। अनेक रुग्णों ने इसका प्रत्यक्ष अनुभव किया है।

for Liver, Brain, Hepatitis-B, Bronchitis

‘खं’ बीजमंत्र लीवर, हृदय व मस्तिषक को शक्ति प्रदान करता है। लीवर के रोगों में इस मंत्र की माला करने से अवश्य लाभ मिलता है। ‘हिपेटायटिस-बी’ जैसे असाध्य माने गये रोग भी इस मंत्र के प्रभाव से ठीक होते देखे गये हैं ब्रोन्कायटिस में भी ‘खं’ मंत्र बहुत लाभ पहुँचाता है।

Monthly Periodic Problems of Women Cured with Vedic Mantra Power

‘थं’ मंत्र मासिक धर्म को सुनिश्चित करता है। इससे अनियमित तथा अधिक मासिक स्राव में राहत मिलती है। महिलाएँ इन तकलीफों से छुटकारा पाने के लिए हारमोन्स की जो गोलियाँ लेती हैं, वे होने वाली संतान में विकृति तथा गर्भाशय के अनेक विकार उत्पन्न करती हैं। उनके लिए भगवान का प्रसाद है यह ‘थं’ बीजमंत्र।

Health Mantra – How to get Healthy –

स्वास्थ्यप्राप्ति के लिए सिर पर हाथ रखकर मंत्र का 108 बार उच्चारण करें।
अच्युतानन्त गोविन्द नामोचारणभेषजात्।
नश्यन्ति सकला रोगाः सत्यं सत्यं वदाम्यहम्।।
हे अच्युत! हे अनन्त! हे गोविन्द! – इस नामोच्चारणरूप औषध से तमाम रोग नष्ट हो जाते हैं, यह मैं सत्य कहता हूँ…… सत्य कहता हूँ।

Brahmcharya Raksha Mantra

ॐ अर्यमायै नमः |

Om Aryamaayai Namah |
Japa this mantra whenever anti-brahmcharya thoughts comes in mind, Do japa for 21 times before going to sleep to avoid bad dreams.

A Mantra useful in celibacy

Take some milk in a cup. While gazing at the milk, repeat the following mantra twenty-one times and thereafter drink the milk. This is an excellent aid to Brahmacharya. This Mantra is worth remembering by heart.

ॐ नमो भगवते महाबले पराक्रमाय मनोभिलाषितमं मनः स्तम्भ कुरु कुरु स्वाहा |

Om namo bhagwate mahabale parakramaay manobhilashitam manah stambh kuru kuru swaha |

Health Protection Mantra

ॐ हंसं हंसः

Om hansam hansaha

रोज सुबह-शाम श्रद्धापूर्वक इस मंत्र की १-१ माला करने से शीघ्रता से स्वास्थ्य लाभ होता है


बीजमन्त्रों से स्वास्थ्य-सुरक्षा – Param Pujya Sant Shri Asaram Ji Bapu


कं -मृत्यु के भय का नाश, त्वचारोग व रक्त विकृति में। 
Relieves one from the fear of death; is useful in skin diseases and blood disorders.


ह्रीं -मधुमेह, हृदय की धड़कन में। 
Is beneficial in diabetes mellitus and palpitation.


घं – स्वपनदोष व प्रदररोग में। 
Helps in nocturnal emissions and leucorrhoea.


भं -बुखार दूर करने के लिए। 
Relief from fever.


क्लीं -पागलपन में। 
Is useful in mental disorders.


सं -बवासीर मिटाने के लिए। 
– Cures piles.


वं -भूख-प्यास रोकने के लिए। 
Prevents hunger and thirst.


लं -थकान दूर करने के लिए। 
Relieves fatigue and exhaustion.

for Marriage only for females

जय जय गिरिवर राज किशोरी, जय महेश मुख चंद्र चकोरी

jai jai girivar raaj kishori, jai mahesh mukh chandra chakori

Nirogi va sampann hone ke Liye Mantra [ Health Mantra]

निरोगी व श्री सम्पन्न होने के लिये 

ॐ हुं विष्णवे नमः ।


निरोगी व श्री सम्पन्न होने के लिये इस मन्त्र की एक माला रोज जप करें, तो आरोग्यता और सम्पदा आती हैं

For accident-free Journey

ॐ हौं जूँ सः | ॐ भूर्भुवः स्वः | ॐ त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम् उर्व्वारुकमिव बंधनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात ॐ | स्वः भुवः भूः ॐ | सः जूँ हौं ॐ |

om haum joom saha | om bhoorbhuvaha svaha | om trayambakam yajaamahe sugandhim pushtivardhnam urvvarukamiva bandhanaanmrityormuksheeya maamrataat om | svaha bhuvaha bhooh om | saha joom haum om |
Chant this Mahamrityunjay mantra once before starting your journey.

For problem-free Journey

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।

om namo bhagvate vaasudevaay
Chant one mala of above mantra before starting your journey.

For Job,Marriage related problems

ॐ घं काली कालीकायै नमः |

Om gham kaalee kaaleekaayai namah |

Japa this mantra to remove hurdles in marriage, job or other important occasions.

For Court-cases related problems

पवनतनय बल पवन समाना |
बुद्धि विवेक विज्ञान निधाना ||

pavantanaya bal pavan samaana |
buddhi vivek vigyaan nidhaana ||
Do one mala daily of above mantra to get true results of court-cases. Keep your court related files in North-East direction not locked in Almirah.Keep the file in lotus feet of your beloved Ishta.

Blow away the Impediments

‘tam’ (टं)
is a beej mantra, representing chandradeva, the presiding deity of the Moon. The japa of this mantra is just enough to do away with the sudden impediment inflicting your life.
Write ‘tam’(टं) on a piece of ‘Bhojpatra and insert it into an amulet. Then put this amulet on your right hand. This will remove all sorts of obstacles out of your way.
Just wear an amulet having in it the mantra, ‘tam’(टं)written eleven times on a piece of paper. This helps in cases of deficiency of calcium, poor lactation among women and also comes in handy in soothing a fretting child.

Mantra for Sound Sleep

शुद्धे शुद्धे महायोगिनी महानिद्रे स्वाहा ।

shuddhe shuddhe mahaayogini mahaanidre swaahaa

The japa of this mantra before going to bed ends the harrowing streak of your sleepless nights and ushers a propitious era of sound and refreshing sleep into your life.

Digestion Mantra

अगस्त्यम कुम्भकर्णं च शनिंच बडवानलं |
आहार परिपाकार्थ स्मरेद भीमं च पंचमं ||

Agastyam kumbhakarnam cha shanim cha badavaanalam
Aahaara paripaakaartham smared bhimam cha panchakam
Chant this mantra while caressing your stomach with your left hand in the anti clock wise direction after having your meal. It helps in quick digestion.

Mantra to cure all types of diseases

Dharmarajavrata (mantra mahodadhi) Eliminates all diseases:

Even if you are suffering from incurable diseases wake up early in the morning,


ॐ क्रौं ह्रीं आं वैवस्वताय धर्मराजाय भक्तानुग्रहक्रते नमः ।

aum kraum hrim a am vaivasvataya dharmarajaya bhaktanugrahakrite namah

Do constant jap of this mantra. It will help cure all your Diseases and deliver you from all sins
and afflictions.

Mantra to attain Wealth

People practise several methods to acquire Lakshmi (wealth) at the time of Dipawali. Following is a very simple 3-day method for this purpose:

Starting from the day of Diwali till the day of Bhai Dooj (for 3 days), light Dhoop, Deep & Agarbatti in a clean room early in the morning, wear yellow colored clothes, put the Tilak of Kesar (saffron) on the forehead, then do 2 mala of the following mantra on a mala with beeds of Sfatik.

ॐ नमः भाग्यलक्ष्मी च विद्महे |
अष्टलक्ष्मी च धीमहि | तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात | 
om namah bhagyalakshmi cha vidmahe|
ashtalakshmi cha dheemahi | tanno lakshmi prachodayaat |

It is more beneficial to do japa by concentrating on the picture of Lakshmi, Guru or Ishtha (Tratak).
Deepawali is the birthday of Lakshmi ji. Lakshmi ji had appeared at the time of the Samudra-Manthan from the Kshir-Sagar. Therefore Lakshmi ji bestows her blessings to the person who does this sadhna with the desire that Laksmi stays in his/her home, poverty gets removed & one is able to earn daily bread & butter easily.

Mantra To Elleviate Sudden Trouble

Chanting this mantra 108 times everyday, elleviates one from miseries and sudden trouble.

ॐ रां रां रां रां रां रां रां रां मम् कष्टं स्वाहा

Aum raan raan raan raan raan raan raan raan mam kashtam svaahaa
we can replace मम् (mam) with name of person, whose problems have to be removed.
Note:- in above mantra raan is for 8 times,

For Victory Vijaya

Chant Aditya Hridya Stotra 3 Times facing east direction.

‘इसलिए तुम एकाग्रचित होकर इन देवाधिदेव जगदीश्वर की पूजा करो। इस आदित्य हृदय का तीन बार जप करने से तुम युद्ध में विजय पाओगे।’


 



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The Magnificence of Mantras

Even in this present age of materialistic life Mantra-Shakti can prove to be more powerful than the Yantra-Shakti. Mantra is a divine instrument with the rare potential of arousing our dormant consciousness. Thus it helps develop our latent powers and brings our original greatness to the fore. The parents give birth merely to our physical body whereas the True Brahmanishtha Sadgurus, the personages established in their True Self, give birth to our Chinmay Vapoo through Mantra-Diksha. Man can attain greatness by developing his dormant powers through Mantra. The regular japa of a mantra reduces restlessness of the mind, brings restraint in life; and works wonders in developing the concentration and memory. A Mantra has different effects on different energy centres of the body. Many personages like Mahavir, Buddha, Kabir, Guru Nanak, Swami Vivekanand, Ramkrishna Paramhansa, Swami Ramtirtha, Pujyapaad Swami Sri Lilashahji Maharaj, etc. have attained respect and reverence all around the world through their awareness of the True glory of Mantra.

Beej Mantras:

 

बीजमन्त्रों से स्वास्थ्य-सुरक्षा

बीजमन्त्र                    लाभ

कं                            मृत्यु के भय का नाश, त्वचारोग व रक्त विकृति में।

ह्रीं                            मधुमेह, हृदय की धड़कन में।

घं                             स्वपनदोष व प्रदररोग में।

भं                             बुखार दूर करने के लिए।

क्लीं                           पागलपन में।

सं                         बवासीर मिटाने के लिए।

वं                             भूख-प्यास रोकने के लिए।

लं                             थकान दूर करने के लिए।

 

To marry to good husband New!

 

जय जय गिरिवर राज किशोरीजय महेश मुख चंद्र चकोरी 

jai jai girivar raaj kishori, jai mahesh mukh chandra chakori 

 

Chintamani Mantra htm-pdf

 

Tulsi Mantra

तुलसी माता पर जल चढ़ाते हुए इस मंत्र को बोलें

महाप्रसाद जननी सर्वसौभाग्यवर्धिनी
आधि व्याधि जरा मुक्तं तुलसी त्वाम् नमोस्तुते
mahaprasad janani sarvasaubhagyavadhini
aadhi vyaadhi jara muktam tulsi tvaam namostute

 

Brahmcharya Raksha Mantra

ॐ अर्यमायै नमः |

Om Aryamaayai Namah |

Japa this mantra whenever anti-brahmcharya thoughts comes in mind, Do japa for 21 times before going to sleep to avoid wet dreams.

A Mantra useful in celibacy

Take some milk in a cup. While gazing at the milk, repeat the following mantra twenty-one times and thereafter drink the milk. This is an excellent aid to Brahmacharya. This Mantra is worth remembering by heart.

ॐ नमो भगवते महाबले पराक्रमाय मनोभिलाषितमं मनः स्तम्भ कुरु कुरु स्वाहा |

Om namo bhagwate mahabale parakramaay manobhilashitam manah stambh kuru kuru swaha |


Health Protection Mantra

ॐ हंसं हंसः |
Om hansam hansaha|
रोज सुबह-शाम श्रद्धापूर्वक इस मंत्र की १-१ माला करने से शीघ्रता से स्वास्थ्य लाभ होता है |

For accident-free Journey

ॐ हौं जूँ सः | ॐ भूर्भुवः स्वः | ॐ त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम् उर्व्वारुकमिव बंधनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात ॐ | स्वः भुवः भूः ॐ | सः जूँ हौं ॐ |

om haum joom saha | om bhoorbhuvaha svaha | om trayambakam yajaamahe sugandhim pushtivardhnam urvvarukamiva bandhanaanmrityormuksheeya maamrataat om | svaha bhuvaha bhooh om | saha joom haum om |

Chant this Mahamrityunjay mantra once before starting your journey.

For problem-free Journey

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

om namo bhagvate vaasudevaay

Chant one mala of above mantra before starting your journey.

For Job,Marriage related problems

घं काली काली कायै नमः |
Om gham kaalee kaaleekaayai namah |

Japa this mantra to remove hurdles in marriage, job or other important occasions.

For Court-cases related problems

पवनतनय बल पवन समाना |
बुद्धि विवेक विज्ञान निधाना ||

pavantanaya bal pavan samaana |

buddhi vivek vigyaan nidhaana ||

Do one mala daily of above mantra to get true results of court-cases. Keep your court related files in North-East direction not locked in Almirah.Keep the file in lotus feet of your beloved Ishta.

 

Lakshmi Barkat Mantra

अपने जीवन से विषाद को भगाने का पक्का इरादा करलो; और दरिद्रता भगानी हो तो फालतू खर्च न करो, व्याज भरकर गाडियाँ और मकान न बनाओ, और आय को बढाना हो, अथवा, बरकत लानी हो, तो एक मन्त्र बताता हूँ, ११ माला कुछ दिन तक जप करो, फिर 21बार जप करके पानी में देखो, और, बाँया नथुना चले, बाँया स्वर चले, दाँया नथुना बन्द करके वह पानी पी लिया करे|
ऐसे भी कोई पेय वस्तु दाँया नथुना चले तब पीते हैं, तो धातु कमज़ोर रहता है; अगर दाँया नथुना बंद करके बाँये नथुने से श्वास चलाकर पीते हैं, तो धातु मजबूत रहता है, तो ओज और बल बढ़ता है |
मंत्र है -

ॐ अच्युताय नमः
Om Achyutaaya Namah

जिसका पद कभी च्युत नहीं होता, इन्द्र पद भी च्युत हो जाता है, ब्रह्माजी का पद भी च्युत हो जाता है, लेकिन फिर भी, जो च्युत नहीं होते, अपने स्वभाव से, अपने आप से, वह परमेश्वर अच्युत को हम नमस्कार करते हैं...अच्युतम केशवं राम नारायणं..."
ॐ अच्युताय नमः - ११ माला जप करें कुछ दिन, फिर गुरूवार को २१ बार जप करे, और गुरूवार से गुरूवार तक ११ मालायें जप करे; २ गुरूवार करे, ४ गुरूवार करे, मतलब ४ सप्ताह, २ सप्ताह - "ॐ अच्युताय नमः, ॐ अच्युताय नमः..." - कुछ ही दिनों में यह मंत्र सिद्ध हो जायेगा, फिर, २१ बार जप करके वह पानी पिए |

Blow away the Impediments

  • tam’(टं)
    is a beej mantra, representing chandradeva, the presiding deity of the Moon. The japa of this mantra is just enough to do away with the sudden impediment inflicting your life.

  • Write ‘tam’(टं) on a piece of ‘Bhojpatra and insert it into an amulet. Then put this amulet on your right hand. This will remove all sorts of obstacles out of your way.

  • Just wear an amulet having in it the mantra, ‘tam’(टं)written eleven times on a piece of paper. This helps in cases of deficiency of calcium, poor lactation among women and also comes in handy in soothing a fretting child.

Mantra for Sound Sleep

शुद्धे शुद्धे महायोगिनी महानिद्रे स्वाहा
shuddhe shuddhe mahaayogini mahaanidre swaahaa
  • The japa of this mantra before going to bed ends the harrowing streak of your sleepless nights and ushers a propitious era of sound and refreshing sleep into your life.

  • Digestion

    अगस्त्यम कुम्भकर्णं च शनिंच बडवानलं |
    आहार परिपाकार्थ स्मरेद भीमं च पंचमं ||

     

    Agastyam kumbhakarnam cha shanim cha badavaanalam

    Aahaara paripaakaartham smared bhimam cha panchakam

    • Chant this mantra while caressing your stomach with your left hand in the anti clock wise direction after having your meal. It helps in quick digestion.

    Mantra to attain Wealth

    People practise several methods to acquire Lakshmi (wealth) at the time of Dipawali. Following is a very simple 3-day method for this purpose:

    Starting from the day of Diwali till the day of Bhai Dooj (for 3 days), lightDhoop, Deep & Agarbatti in a clean room early in the morning, wear yellow colored clothes, put the Tilak of Kesar (saffron) on the forehead, then do 2 mala of the following mantra on a mala with beeds of Sfatik.

     

    om namah bhagyalakshmi cha vidmahe|

    ashtalakshmi cha dheemahi | tanno lakshmi prachodayaat |

    It is more beneficial to do japa by concentrating on the picture ofLakshmi, Guru or Ishtha (Tratak).

    Deepawali is the birthday of Lakshmi ji. Lakshmi ji had appeared at the time of the Samudra-Manthan from the Kshir-Sagar. Therefore Lakshmi ji bestows her blessings to the person who does this sadhna with the desire that Laksmi stays in his/her home, poverty gets removed & one is able to earn daily bread & butter easily.

    Mantra To Alleviate Sudden Trouble

    Chanting this mantra 108 times everyday, alleviates one from miseries and sudden trouble.

    ॐ रां रां रां रां रां रां रां रां मम् कष्टं स्वाहा

    Aum raam raam raam raam raam raam raam raam mam kashtam svaahaa

    Note:- in above mantra raam is for 8 times 

     

    Mantras by Shri Sureshanandji

    Mantras by Sureshanandji(mp3)

    कार्यसिद्धिकेलिए

    ॐ गं गणपतये नमः

    Om gam ganpatay Namah

    हर कार्य शुरु करने से पहले इस मंत्र का 108 बार जप करेंकार्य सिद्ध होगा |

    -Uttrayan Shivir Amdavad 2008

    Surya Gayatri Mantra

     आदित्याय विदमहे भास्कराय धीमहि तन्नो भानु प्रचोदयात् |

     

    om aadityaay vidmahe bhaaskaraaye dheemahi tanno bhaanu prachodayaat

     

    Mala Mantra

    जप करने से पूर्व माला को प्रणाम कर के मंत्र बोलें 

    ॐ ऐं श्री अक्ष मालाय नमः

    Before mala jap, recite the following mantra offering obeisances to the mala
    om aim shree aksh maalaay namah

     

    दाँत-दाढ़ के दर्द पर मंत्र प्रयोगः

    ॐ नमो आदेश गुरु का... बन में ब्याई अंजनी...जिन जाया हनुमंत.... कीड़ा मकड़ा माकड़ा.... ये तीनों भस्मंत.... गुरु की भक्ति.... मेरी भक्ति.... फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा।

    एक नीम की टहनी लेकर दर्द के स्थान पर छुआते हुए सात बार इस मंत्र को श्रद्धा से जपें। ऐसा करने से दाँत या दाढ़ का दर्द समाप्त हो जायगा और पीड़ित व्यक्ति आराम का अनुभव करेगा।

    दाँत-दाढ़ के दर्द पर मंत्र प्रयोगः

    ॐ नमो आदेश गुरु का... बन में ब्याई अंजनी...जिन जाया हनुमंत.... कीड़ा मकड़ा माकड़ा.... ये तीनों भस्मंत.... गुरु की भक्ति.... मेरी भक्ति.... फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा।

    एक नीम की टहनी लेकर दर्द के स्थान पर छुआते हुए सात बार इस मंत्र को श्रद्धा से जपें। ऐसा करने से दाँत या दाढ़ का दर्द समाप्त हो जायगा और पीड़ित व्यक्ति आराम का अनुभव करेगा।