भगवन्नाम-जपः एक अमोघ साधन

भगवन्नाम जप-संकीर्तन से अनगिनत जीवों का उद्धार हुआ है एवं अनेक प्राणी दुःख से मुक्त होकर शाश्वत सुख को उपलब्ध हुए हैं।

 

भगवन्नाम-जापक, भगवान के शरणागत भक्तजन प्रारब्ध के वश नहीं रहते। कोई भी दीन, दुःखी, अपाहिज, दरिद्र अथवा मूर्ख पुरुष भगवन्नाम का जप करके, भगवान की भक्ति का अनुष्ठान करके इसी जन्म में कृतकृत्य हो सकता है।

 

भगवन्नाम की डोरी में प्रभु स्वयँ बँध जाते हैं और जिनके बंदी स्वयं भगवान हों, उन्हें फिर दुर्लभ ही क्या है?

इस असार संसार से पार होने के लिए भगवन्नाम-स्मरण एक सरल साधन है।

 

ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ

How mantra chanting changes fortune

chanting ,change fortune  
omkar 

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मन को शांत करने के उपाय
Ashram India

मन को शांत करने के उपाय

किसी भी प्रकार की व्याधि होने पर उस व्याधि की औषधि लेने के साथ-साथ मन को भी शांत करने के प्रयास करने चाहिए । वर्तमान समय में बहुत सारे रोगों का कारण अशांत मन है । स्वप्नदोष, श्वेतप्रदर, अनियमित मासिक धर्म, अनियंत्रित रक्तदाब (uncontrolled B.P.), मधुमेह (diabetes), दमा, जठर में अल्सर, मंदाग्नि, अम्लपित्त (hyper-acidity), अतिसार, अवसाद (depression), मिर्गी, उन्माद (पागलपन) और स्मरणशक्ति का ह्रास जैसे अनेक रोगों का कारण मन की अशांति है 

चित्त (मन) में संकल्प-विकल्प बढ़ते हैं तो चित्त अशांत रहता है, जिससे प्राणों का लय अच्छा नहीं रहता, तालबद्ध नहीं रहता । अनेक कार्यों में हमारी असफलता का यही कारण है ।

हमारे देश के ब्रह्मवेत्ता, जीवन्मुक्त संतों ने मन को शांत करने के विभिन्न उपाय बतलाये हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख, चुनिंदा उपाय इस प्रकार हैं :

(1) उचित आहार : मन को वश करने के लिए, शांत करने के लिए सर्वप्रथम आहार पर नियंत्रण होना अत्यावश्यक है । जैसा अन्न खाते हैं, हमारी मानसिकता का निर्माण भी वैसा ही होता है । इसलिए सात्त्विक, शुद्ध आहार का सेवन करना अनिवार्य है । अधिक भोजन करने से अपचन की स्थिति निर्मित होती है, जिससे नाड़ियों में कच्चा रस ‘आम’ बहता है, जो हमारे मन के संकल्प-विकल्पों में वृद्धि करता है । फलतः मन की अशांति में वृद्धि होती है । अतएव भूख से कम आहार लें । भोजन समय पर करें । रात को जितना हो सके, अल्पाहार लें । तला हुआ, पचने में भारी व वायुकारक आहार के सेवन से सदैव बचना चाहिए । साधक को चाहिए कि वह कब्ज का निवारण करके सदा ही पेट साफ रखे ।

(2) अभ्यास, वैराग्य व ब्रह्मचर्य : भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है :

अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृह्यते ।।

अभ्यास और वैराग्य से मन शांत होता है । वैराग्य दृढ़ बनाने के लिए इन्द्रियों का अनावश्यक उपयोग न करें, अनावश्यक दर्शन-श्रवण से बचें । समाचार पत्रों की व्यर्थ बातों व टी.वी., रेडियो या अन्य बातों में मन न लगायें । ब्रह्मचर्य का दृढ़ता से अधिकाधिक पालन करें ।

(3) आसन-प्राणायाम : इन्द्रियों का स्वामी मन है और मन का स्वामी प्राण है । प्राण जितने अधिक सूक्ष्म होंगे, मन उतना ही अधिक शांत रहेगा । प्राण सूक्ष्म बनाने के लिए नियमित आसन-प्राणायाम करें । पद्मासन, सिद्धासन, पादपश्चिमोत्तानासन, सर्वांगासन, मयूरासन, ताड़ासन, वज्रासन एवं अन्यान्य आसनों का नियमित अभ्यास स्वास्थ्य और एकाग्रता के लिए हितकारी है, सहायक है । आसन-प्राणायाम के 25-30 मिनट बाद ही किसी आहार अथवा पेय पदार्थ का सेवन करें । प्राणायाम व आसन का अभ्यास खाली पेट ही करें अथवा भोजन के 3-4 घंटे के बाद ही करें । प्राणायाम का अभ्यास आरम्भ में किन्हीं अनुभवनिष्ठ योगी महापुरुष के मार्गदर्शन में करना चाहिए ।

(विभिन्न आसनों की सचित्र जानकारी हेतु पढ़ें आश्रम व समिति के सेवाकेन्द्रों पर उपलब्ध पुस्तक योगासन। - संकलक)

(4) श्वासोच्छ्वास की गिनती : सुखासन, पद्मासन या सिद्धासन में बैठकर श्वासोच्छ्वास की गिनती करें । इसमें न तो श्वास गहरा लेना है और न ही रोकना है । केवल जो श्वास चल रहा है, उसे गिनना है । श्वास की गणना कुछ ऐसे करें :

श्वास अंदर जाय तो ‘राम...’, बाहर निकले तो ‘1’... श्वास अंदर जाय तो ‘आनंद’... बाहर निकले तो ‘2’... श्वास अंदर जाय तो ‘शांति’... बाहर निकले तो ‘3’... इस प्रकार की गणना जितनी शांति, सतर्कता से करेंगे, हिले बिना करेंगे, उतनी एकाग्रता होगी, उतना सुख-शांति, प्रसन्नता और आरोग्य का लाभ होगा ।

(5) त्राटक : मन को वश में करने का अगला उपाय है त्राटक । अपने इष्टदेव, स्वस्तिक, ॐकार अथवा सद्गुरु की तस्वीर को एकटक देखने का अभ्यास बढ़ायें । फिर आँखें बंद कर उसी चित्र का भ्रूमध्य में अथवा कंठ में ध्यान करें ।

(6) जप-अनुष्ठान : मंत्रजप का अधिक अभ्यास करें । वर्ष में 1-2 जपानुष्ठान करें तथा पवित्र आश्रम, पवित्र स्थान में थोड़े दिन निवास करें ।

(7) क्षमायाचना करना एवं शांत होना : मन की शांति अनेक जन्मों के पुण्यों का फल है अतएव जाने-अनजाने में हुए अपराधों के बदले में सद्गुरु या भगवान की तस्वीर अपने पास रखकर अथवा ऐसे ही मन-ही-मन प्रायश्चितपूर्वक उनसे क्षमा माँगना एवं शांत हो जाना भी एक चिकित्सा है ।

(8) आत्मचिंतन : आत्मचिंतन करते हुए देहाध्यास को मिटाते रहें । जैसे कि ‘मैं आत्मस्वरूप हूँ... तंदुरुस्त हूँ... मुझे कोई रोग नहीं है । बीमार तो शरीर है । काम, क्रोध जैसे विकार तो मन में हैं । मैं शरीर नहीं, मन नहीं, निर्विकारी आत्मा हूँ । हरि ॐ... आनंद... आनंद... ।’

     (9) प्रसन्नता : हर रोज प्रसन्न रहने का अभ्यास करें । किसी बंद कमरे में जोर से हँसने (देव-मानव हास्य प्रयोग) और सीटी बजाने का अभ्यास करें ।

इन 9 बातों का जो मनुष्य दृढ़तापूर्वक पालन करता है, वह निश्चय ही अपने मन को वश में कर लेता है । आप भी अपने मन को सुखमय, रसमय, अनासक्त, एकाग्र करते हुए अपने सदा रहनेवाले आत्मस्वरूप में जग जाओ । - - पूज्य बापूजी

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Ways to calm the Mind 

– Pujya Bapuji

On suffering from any sort of ailment, apart from taking medication to cure it, one should also try to relax the mind. In recent times, it has been found that a restless mind is the cause of quite a lot of diseases. Restlessness of mind is the root-cause of many ailments (psychosomatic disorders), like nocturnal-emissions, leucorrhoea, irregular menses, uncontrolled blood-pressure, diabetes, asthma, peptic ulcers, indigestion, hyperacidity, diarrhoea, depression, epilepsy, hysteria (madness) and amnesia.

With the increase in Sankalpa (will-thought) and Vikapla (doubt), the mind gets restless, because of which, the rhythm of the Pranas gets disturbed and it becomes arrhythmic. This, verily, is the major cause of our failure in numerous tasks.

The Self-realized, Jivanmukta saints of our country have expounded various measures to calm the mind, of which, the major, the select ones are as under:

(1) Appropriate Food: In order to control and calm the mind, first things first, it is extremely necessary to have control over the diet. Our mentality depends upon food for its formation. Hence, it is essential to take a pure, sattvic diet. Excessive food intake leads to indigestion, which in turn causes the undigested food ‘Aama’ to enter our nadis and thereby increases Sankalpas and vikalpas of the mind. This consequently, increases the restlessness of mind. Hence, eat moderately and eat at the proper time. As far as possible, eat moderately in the evening. One should always avoid heavy, fried food and foods which increase vata. A sadhaka ought to relieve constipation; and thus, keep the digestive system clean and healthy all the time.

(2) Spiritual practice, vairagya (dispassion) and continence: Lord Shri Krishna said in The Gita:

Aä`mgoZ Vw H$m¡ÝVo` d¡am½`oU M J¥øVo &&

Meaning: O son of Kunti, the mind is brought under control through practice and detachment.

In order to develop intense vairagya one should avoid unnecessary sense indulgence and must refrain from unnecessary watching and hearing. One shouldn’t pay attention to useless things published in newspapers, on the T.V., radio or other unimportant stuff. One must strictly observe Brahmacharya (celibacy) as much as possible.

(3) Asana & Pranayama: The mind is the master of the senses, and the Prana is the master of the mind. The subtler the Prana, the calmer the mind. Practice Asana & Pranayama regularly in order to make the Prana subtler. Regular practice of asanas like: Padmasana (Lotus Posture), Siddhasana (Accomplished Pose), Pada-Pashchimottanasana (Forward Bend Pose), Sarvangasana (Shoulder-stand pose), Mayurasana (Peacock Pose), Tadasana,  Vajrasana and other asanas, are helpful & beneficial for health and concentration. Make sure to take any food or drink only after 25-30 minutes of the practice of Asanas & Pranayamas. Practice Asanas & Pranayamas only on an empty stomach or allow at least 3 to 4 hours to elapse before starting the practice. One should practice Pranayamas only under the guidance of a great experienced Yogi.

(Read the book Yogasana available at ashrams and centers of samiti to get more information regarding various asanas with pictures. – Compiler)

(4) Breath-counting: Count your incoming and outgoing breaths while seated in Sukhasana, Padmasana or Siddhasana. For this, you don’t have to inhale deeply, nor do you need to hold the breath. All one needs to do is – count the breaths. Breaths should be counted as under:

Mentally chant ‘Rama…’ while inhaling, and count ‘1’ while exhaling… Then mentally chant ‘Ananda’ (i.e. Bliss) while inhaling…, and count ‘2’ while exhaling…; then mentally chant ‘Shanti’ (i.e. peace) while inhaling, and count ‘3’ while exhaling. The more you count your breaths with a calm and vigilant mind without any movement, the more you will obtain the benefit of concentration, peace, happiness, cheerfulness and health.

(5) Trataka: The next measure for mind control is – Trataka. Increase the practice of looking, with a fixed gaze at the image of your Ishtadeva (i.e. presiding deity), Swastika, Omkar or SatGuru. Then close your eyes, take the awareness to the eyebrow centre or throat centre and visualise the same image there.

(6) Japa-Anushthana: Do japa of the Mantra more and more. Perform 1-2 japa-anushthanas (i.e. japa of a mantra for a fixed number on a daily basis with a fixed purpose and a fixed duration) every year and make sure to stay in a holy ashram or a holy place for a few days (at least).

(7) Apologizing and then calming down: Peace of mind is the fruit of merits accrued over numerous births. Hence, before the picture of SatGuru or any deity or even mentally asking for apology as atonement for sins committed knowingly or unknowingly, and then becoming quiet, is also one of the remedial measures.

(8) Self-contemplation: Keep effacing dehadhyasa (i.e. false identification with the body) by regular self-contemplation. Like, ‘I am Atman myself, I am healthy… and I don’t suffer from any ailment. It’s the body that is sick. Passions such as lust, desire and anger are in the mind. But I am neither body, nor mind; and am a changeless Soul instead. Hari Aum… Ananda (Bliss)… Ananda…’ 

(9) Cheerfulness: Practice being cheerful every day. In a closed room, practice laughing-out loud (Divine-humane laughter therapy) and even blowing a whistle.

The one, firmly sticking to the aforementioned eight points, certainly gains complete control over the mind. So, you too, wake up in your eternal Self making your mind, happy, joyful, non-attached and one-pointed.

 

[Rishi Prasad -August 2018- ISSUE308]
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बीजमन्त्रों से स्वास्थ्य-सुरक्षा

 

बीजमन्त्र                    लाभ

कं                            मृत्यु के भय का नाश, त्वचारोग व रक्त विकृति में।

ह्रीं                            मधुमेह, हृदय की धड़कन में।

घं                             स्वपनदोष व प्रदररोग में।

भं                             बुखार दूर करने के लिए।

क्लीं                           पागलपन में।

सं                         बवासीर मिटाने के लिए।

वं                             भूख-प्यास रोकने के लिए।

लं                             थकान दूर करने के लिए।

Handy Mantra List


बीजमंत्रों का महत्त्व समझकर उनका उच्चारण किया जाय तो बहुत सारे रोगों से छुटकारा मिलता है। उनका अलग-अलग अंगों एवं वातावरण पर असर होता है।
ʹૐʹ के ʹओʹ उच्चारण से ऊर्जाशक्ति का विकास होता है तो ʹमʹ से मानसिक शक्तियाँ विकसित होती हैं। ʹૐʹ से मस्तिष्क, पेट और सूक्ष्म इन्द्रियों पर सात्त्विक असर होता है। ʹह्रींʹ उच्चारण करने से पाचन-तंत्र, गले व हृदय पर तथा ʹह्रंʹ से पेट, जिगर, तिल्ली, आँतों व गर्भाशय पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। औषधि को एकटक देखते हुए ʹૐ नमो नारायणाय।ʹ मंत्र का 21 बार जप करके फिर औषधि लेने से उसमें भगवद्-चेतना का प्रभाव आता है और विशेष लाभ होता है। रात को नींद न आती हो तो ʹशुद्धे-शुद्धे महायोगिनी महानिद्रे स्वाहा।ʹ इस मंत्र का जप-स्मरण करें। स्मरण करते-करते अवश्य अच्छी नींद आयेगी।


दाँत-दाढ़ के दर्द पर मंत्र प्रयोगः

ॐ नमो आदेश गुरु का... बन में ब्याई अंजनी...जिन जाया हनुमंत.... कीड़ा मकड़ा माकड़ा.... ये तीनों भस्मंत.... गुरु की भक्ति.... मेरी भक्ति.... फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा।एक नीम की टहनी लेकर दर्द के स्थान पर छुआते हुए सात बार इस मंत्र को श्रद्धा से जपें। ऐसा करने से दाँत या दाढ़ का दर्द समाप्त हो जायगा और पीड़ित व्यक्ति आराम का अनुभव करेगा।

Note: Guru Mantra (Mantra given by Sath Guru during Mantra Diksha) is a connection between SathGuru and Shishya (Disciple) and should not be revelead to anyone ever.  Below are some useful powerful mantras that help Sadhaks in various way.

Beeja Mantra

for Memory, Intellect and in Coma

‘ऐं’ बीजमंत्र मस्तिषक को प्रभावित करता है। इससे बुद्धि, धारणाशक्ति व स्मृति का आश्चार्यकारक विकास होता है।
‘ऐं’ बीजमंत्र मस्तिषक को प्रभावित करता है। इससे बुद्धि, धारणाशक्ति व स्मृति का आश्चार्यकारक विकास होता है। इसके विधिवत जप से कोमा में गये हुए रुग्ण भी होश में आ जाते हैं। अनेक रुग्णों ने इसका प्रत्यक्ष अनुभव किया है।

for Liver, Brain, Hepatitis-B, Bronchitis

‘खं’ बीजमंत्र लीवर, हृदय व मस्तिषक को शक्ति प्रदान करता है। लीवर के रोगों में इस मंत्र की माला करने से अवश्य लाभ मिलता है। ‘हिपेटायटिस-बी’ जैसे असाध्य माने गये रोग भी इस मंत्र के प्रभाव से ठीक होते देखे गये हैं ब्रोन्कायटिस में भी ‘खं’ मंत्र बहुत लाभ पहुँचाता है।

Monthly Periodic Problems of Women Cured with Vedic Mantra Power

‘थं’ मंत्र मासिक धर्म को सुनिश्चित करता है। इससे अनियमित तथा अधिक मासिक स्राव में राहत मिलती है। महिलाएँ इन तकलीफों से छुटकारा पाने के लिए हारमोन्स की जो गोलियाँ लेती हैं, वे होने वाली संतान में विकृति तथा गर्भाशय के अनेक विकार उत्पन्न करती हैं। उनके लिए भगवान का प्रसाद है यह ‘थं’ बीजमंत्र।

Health Mantra – How to get Healthy –

स्वास्थ्यप्राप्ति के लिए सिर पर हाथ रखकर मंत्र का 108 बार उच्चारण करें।
अच्युतानन्त गोविन्द नामोचारणभेषजात्।
नश्यन्ति सकला रोगाः सत्यं सत्यं वदाम्यहम्।।
हे अच्युत! हे अनन्त! हे गोविन्द! – इस नामोच्चारणरूप औषध से तमाम रोग नष्ट हो जाते हैं, यह मैं सत्य कहता हूँ…… सत्य कहता हूँ।

Brahmcharya Raksha Mantra

ॐ अर्यमायै नमः |

Om Aryamaayai Namah |
Japa this mantra whenever anti-brahmcharya thoughts comes in mind, Do japa for 21 times before going to sleep to avoid bad dreams.

A Mantra useful in celibacy

Take some milk in a cup. While gazing at the milk, repeat the following mantra twenty-one times and thereafter drink the milk. This is an excellent aid to Brahmacharya. This Mantra is worth remembering by heart.

ॐ नमो भगवते महाबले पराक्रमाय मनोभिलाषितमं मनः स्तम्भ कुरु कुरु स्वाहा |

Om namo bhagwate mahabale parakramaay manobhilashitam manah stambh kuru kuru swaha |

Health Protection Mantra

ॐ हंसं हंसः

Om hansam hansaha

रोज सुबह-शाम श्रद्धापूर्वक इस मंत्र की १-१ माला करने से शीघ्रता से स्वास्थ्य लाभ होता है


बीजमन्त्रों से स्वास्थ्य-सुरक्षा – Param Pujya Sant Shri Asaram Ji Bapu


कं -मृत्यु के भय का नाश, त्वचारोग व रक्त विकृति में। 
Relieves one from the fear of death; is useful in skin diseases and blood disorders.


ह्रीं -मधुमेह, हृदय की धड़कन में। 
Is beneficial in diabetes mellitus and palpitation.


घं – स्वपनदोष व प्रदररोग में। 
Helps in nocturnal emissions and leucorrhoea.


भं -बुखार दूर करने के लिए। 
Relief from fever.


क्लीं -पागलपन में। 
Is useful in mental disorders.


सं -बवासीर मिटाने के लिए। 
– Cures piles.


वं -भूख-प्यास रोकने के लिए। 
Prevents hunger and thirst.


लं -थकान दूर करने के लिए। 
Relieves fatigue and exhaustion.

for Marriage only for females

जय जय गिरिवर राज किशोरी, जय महेश मुख चंद्र चकोरी

jai jai girivar raaj kishori, jai mahesh mukh chandra chakori

Nirogi va sampann hone ke Liye Mantra [ Health Mantra]

निरोगी व श्री सम्पन्न होने के लिये 

ॐ हुं विष्णवे नमः ।


निरोगी व श्री सम्पन्न होने के लिये इस मन्त्र की एक माला रोज जप करें, तो आरोग्यता और सम्पदा आती हैं

For accident-free Journey

ॐ हौं जूँ सः | ॐ भूर्भुवः स्वः | ॐ त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम् उर्व्वारुकमिव बंधनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात ॐ | स्वः भुवः भूः ॐ | सः जूँ हौं ॐ |

om haum joom saha | om bhoorbhuvaha svaha | om trayambakam yajaamahe sugandhim pushtivardhnam urvvarukamiva bandhanaanmrityormuksheeya maamrataat om | svaha bhuvaha bhooh om | saha joom haum om |
Chant this Mahamrityunjay mantra once before starting your journey.

For problem-free Journey

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ।

om namo bhagvate vaasudevaay
Chant one mala of above mantra before starting your journey.

For Job,Marriage related problems

ॐ घं काली कालीकायै नमः |

Om gham kaalee kaaleekaayai namah |

Japa this mantra to remove hurdles in marriage, job or other important occasions.

For Court-cases related problems

पवनतनय बल पवन समाना |
बुद्धि विवेक विज्ञान निधाना ||

pavantanaya bal pavan samaana |
buddhi vivek vigyaan nidhaana ||
Do one mala daily of above mantra to get true results of court-cases. Keep your court related files in North-East direction not locked in Almirah.Keep the file in lotus feet of your beloved Ishta.

Blow away the Impediments

‘tam’ (टं)
is a beej mantra, representing chandradeva, the presiding deity of the Moon. The japa of this mantra is just enough to do away with the sudden impediment inflicting your life.
Write ‘tam’(टं) on a piece of ‘Bhojpatra and insert it into an amulet. Then put this amulet on your right hand. This will remove all sorts of obstacles out of your way.
Just wear an amulet having in it the mantra, ‘tam’(टं)written eleven times on a piece of paper. This helps in cases of deficiency of calcium, poor lactation among women and also comes in handy in soothing a fretting child.

Mantra for Sound Sleep

शुद्धे शुद्धे महायोगिनी महानिद्रे स्वाहा ।

shuddhe shuddhe mahaayogini mahaanidre swaahaa

The japa of this mantra before going to bed ends the harrowing streak of your sleepless nights and ushers a propitious era of sound and refreshing sleep into your life.

Digestion Mantra

अगस्त्यम कुम्भकर्णं च शनिंच बडवानलं |
आहार परिपाकार्थ स्मरेद भीमं च पंचमं ||

Agastyam kumbhakarnam cha shanim cha badavaanalam
Aahaara paripaakaartham smared bhimam cha panchakam
Chant this mantra while caressing your stomach with your left hand in the anti clock wise direction after having your meal. It helps in quick digestion.

Mantra to cure all types of diseases

Dharmarajavrata (mantra mahodadhi) Eliminates all diseases:

Even if you are suffering from incurable diseases wake up early in the morning,


ॐ क्रौं ह्रीं आं वैवस्वताय धर्मराजाय भक्तानुग्रहक्रते नमः ।

aum kraum hrim a am vaivasvataya dharmarajaya bhaktanugrahakrite namah

Do constant jap of this mantra. It will help cure all your Diseases and deliver you from all sins
and afflictions.

Mantra to attain Wealth

People practise several methods to acquire Lakshmi (wealth) at the time of Dipawali. Following is a very simple 3-day method for this purpose:

Starting from the day of Diwali till the day of Bhai Dooj (for 3 days), light Dhoop, Deep & Agarbatti in a clean room early in the morning, wear yellow colored clothes, put the Tilak of Kesar (saffron) on the forehead, then do 2 mala of the following mantra on a mala with beeds of Sfatik.

ॐ नमः भाग्यलक्ष्मी च विद्महे |
अष्टलक्ष्मी च धीमहि | तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात | 
om namah bhagyalakshmi cha vidmahe|
ashtalakshmi cha dheemahi | tanno lakshmi prachodayaat |

It is more beneficial to do japa by concentrating on the picture of Lakshmi, Guru or Ishtha (Tratak).
Deepawali is the birthday of Lakshmi ji. Lakshmi ji had appeared at the time of the Samudra-Manthan from the Kshir-Sagar. Therefore Lakshmi ji bestows her blessings to the person who does this sadhna with the desire that Laksmi stays in his/her home, poverty gets removed & one is able to earn daily bread & butter easily.

Mantra To Elleviate Sudden Trouble

Chanting this mantra 108 times everyday, elleviates one from miseries and sudden trouble.

ॐ रां रां रां रां रां रां रां रां मम् कष्टं स्वाहा

Aum raan raan raan raan raan raan raan raan mam kashtam svaahaa
we can replace मम् (mam) with name of person, whose problems have to be removed.
Note:- in above mantra raan is for 8 times,

For Victory Vijaya

Chant Aditya Hridya Stotra 3 Times facing east direction.

‘इसलिए तुम एकाग्रचित होकर इन देवाधिदेव जगदीश्वर की पूजा करो। इस आदित्य हृदय का तीन बार जप करने से तुम युद्ध में विजय पाओगे।’


 



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The Magnificence of Mantras

Even in this present age of materialistic life Mantra-Shakti can prove to be more powerful than the Yantra-Shakti. Mantra is a divine instrument with the rare potential of arousing our dormant consciousness. Thus it helps develop our latent powers and brings our original greatness to the fore. The parents give birth merely to our physical body whereas the True Brahmanishtha Sadgurus, the personages established in their True Self, give birth to our Chinmay Vapoo through Mantra-Diksha. Man can attain greatness by developing his dormant powers through Mantra. The regular japa of a mantra reduces restlessness of the mind, brings restraint in life; and works wonders in developing the concentration and memory. A Mantra has different effects on different energy centres of the body. Many personages like Mahavir, Buddha, Kabir, Guru Nanak, Swami Vivekanand, Ramkrishna Paramhansa, Swami Ramtirtha, Pujyapaad Swami Sri Lilashahji Maharaj, etc. have attained respect and reverence all around the world through their awareness of the True glory of Mantra.

Beej Mantras:

 

बीजमन्त्रों से स्वास्थ्य-सुरक्षा

बीजमन्त्र                    लाभ

कं                            मृत्यु के भय का नाश, त्वचारोग व रक्त विकृति में।

ह्रीं                            मधुमेह, हृदय की धड़कन में।

घं                             स्वपनदोष व प्रदररोग में।

भं                             बुखार दूर करने के लिए।

क्लीं                           पागलपन में।

सं                         बवासीर मिटाने के लिए।

वं                             भूख-प्यास रोकने के लिए।

लं                             थकान दूर करने के लिए।

 

To marry to good husband New!

 

जय जय गिरिवर राज किशोरीजय महेश मुख चंद्र चकोरी 

jai jai girivar raaj kishori, jai mahesh mukh chandra chakori 

 

Chintamani Mantra htm-pdf

 

Tulsi Mantra

तुलसी माता पर जल चढ़ाते हुए इस मंत्र को बोलें

महाप्रसाद जननी सर्वसौभाग्यवर्धिनी
आधि व्याधि जरा मुक्तं तुलसी त्वाम् नमोस्तुते
mahaprasad janani sarvasaubhagyavadhini
aadhi vyaadhi jara muktam tulsi tvaam namostute

 

Brahmcharya Raksha Mantra

ॐ अर्यमायै नमः |

Om Aryamaayai Namah |

Japa this mantra whenever anti-brahmcharya thoughts comes in mind, Do japa for 21 times before going to sleep to avoid wet dreams.

A Mantra useful in celibacy

Take some milk in a cup. While gazing at the milk, repeat the following mantra twenty-one times and thereafter drink the milk. This is an excellent aid to Brahmacharya. This Mantra is worth remembering by heart.

ॐ नमो भगवते महाबले पराक्रमाय मनोभिलाषितमं मनः स्तम्भ कुरु कुरु स्वाहा |

Om namo bhagwate mahabale parakramaay manobhilashitam manah stambh kuru kuru swaha |


Health Protection Mantra

ॐ हंसं हंसः |
Om hansam hansaha|
रोज सुबह-शाम श्रद्धापूर्वक इस मंत्र की १-१ माला करने से शीघ्रता से स्वास्थ्य लाभ होता है |

For accident-free Journey

ॐ हौं जूँ सः | ॐ भूर्भुवः स्वः | ॐ त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम् उर्व्वारुकमिव बंधनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात ॐ | स्वः भुवः भूः ॐ | सः जूँ हौं ॐ |

om haum joom saha | om bhoorbhuvaha svaha | om trayambakam yajaamahe sugandhim pushtivardhnam urvvarukamiva bandhanaanmrityormuksheeya maamrataat om | svaha bhuvaha bhooh om | saha joom haum om |

Chant this Mahamrityunjay mantra once before starting your journey.

For problem-free Journey

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

om namo bhagvate vaasudevaay

Chant one mala of above mantra before starting your journey.

For Job,Marriage related problems

घं काली काली कायै नमः |
Om gham kaalee kaaleekaayai namah |

Japa this mantra to remove hurdles in marriage, job or other important occasions.

For Court-cases related problems

पवनतनय बल पवन समाना |
बुद्धि विवेक विज्ञान निधाना ||

pavantanaya bal pavan samaana |

buddhi vivek vigyaan nidhaana ||

Do one mala daily of above mantra to get true results of court-cases. Keep your court related files in North-East direction not locked in Almirah.Keep the file in lotus feet of your beloved Ishta.

 

Lakshmi Barkat Mantra

अपने जीवन से विषाद को भगाने का पक्का इरादा करलो; और दरिद्रता भगानी हो तो फालतू खर्च न करो, व्याज भरकर गाडियाँ और मकान न बनाओ, और आय को बढाना हो, अथवा, बरकत लानी हो, तो एक मन्त्र बताता हूँ, ११ माला कुछ दिन तक जप करो, फिर 21बार जप करके पानी में देखो, और, बाँया नथुना चले, बाँया स्वर चले, दाँया नथुना बन्द करके वह पानी पी लिया करे|
ऐसे भी कोई पेय वस्तु दाँया नथुना चले तब पीते हैं, तो धातु कमज़ोर रहता है; अगर दाँया नथुना बंद करके बाँये नथुने से श्वास चलाकर पीते हैं, तो धातु मजबूत रहता है, तो ओज और बल बढ़ता है |
मंत्र है -

ॐ अच्युताय नमः
Om Achyutaaya Namah

जिसका पद कभी च्युत नहीं होता, इन्द्र पद भी च्युत हो जाता है, ब्रह्माजी का पद भी च्युत हो जाता है, लेकिन फिर भी, जो च्युत नहीं होते, अपने स्वभाव से, अपने आप से, वह परमेश्वर अच्युत को हम नमस्कार करते हैं...अच्युतम केशवं राम नारायणं..."
ॐ अच्युताय नमः - ११ माला जप करें कुछ दिन, फिर गुरूवार को २१ बार जप करे, और गुरूवार से गुरूवार तक ११ मालायें जप करे; २ गुरूवार करे, ४ गुरूवार करे, मतलब ४ सप्ताह, २ सप्ताह - "ॐ अच्युताय नमः, ॐ अच्युताय नमः..." - कुछ ही दिनों में यह मंत्र सिद्ध हो जायेगा, फिर, २१ बार जप करके वह पानी पिए |

Blow away the Impediments

  • tam’(टं)
    is a beej mantra, representing chandradeva, the presiding deity of the Moon. The japa of this mantra is just enough to do away with the sudden impediment inflicting your life.

  • Write ‘tam’(टं) on a piece of ‘Bhojpatra and insert it into an amulet. Then put this amulet on your right hand. This will remove all sorts of obstacles out of your way.

  • Just wear an amulet having in it the mantra, ‘tam’(टं)written eleven times on a piece of paper. This helps in cases of deficiency of calcium, poor lactation among women and also comes in handy in soothing a fretting child.

Mantra for Sound Sleep

शुद्धे शुद्धे महायोगिनी महानिद्रे स्वाहा
shuddhe shuddhe mahaayogini mahaanidre swaahaa
  • The japa of this mantra before going to bed ends the harrowing streak of your sleepless nights and ushers a propitious era of sound and refreshing sleep into your life.

  • Digestion

    अगस्त्यम कुम्भकर्णं च शनिंच बडवानलं |
    आहार परिपाकार्थ स्मरेद भीमं च पंचमं ||

     

    Agastyam kumbhakarnam cha shanim cha badavaanalam

    Aahaara paripaakaartham smared bhimam cha panchakam

    • Chant this mantra while caressing your stomach with your left hand in the anti clock wise direction after having your meal. It helps in quick digestion.

    Mantra to attain Wealth

    People practise several methods to acquire Lakshmi (wealth) at the time of Dipawali. Following is a very simple 3-day method for this purpose:

    Starting from the day of Diwali till the day of Bhai Dooj (for 3 days), lightDhoop, Deep & Agarbatti in a clean room early in the morning, wear yellow colored clothes, put the Tilak of Kesar (saffron) on the forehead, then do 2 mala of the following mantra on a mala with beeds of Sfatik.

     

    om namah bhagyalakshmi cha vidmahe|

    ashtalakshmi cha dheemahi | tanno lakshmi prachodayaat |

    It is more beneficial to do japa by concentrating on the picture ofLakshmi, Guru or Ishtha (Tratak).

    Deepawali is the birthday of Lakshmi ji. Lakshmi ji had appeared at the time of the Samudra-Manthan from the Kshir-Sagar. Therefore Lakshmi ji bestows her blessings to the person who does this sadhna with the desire that Laksmi stays in his/her home, poverty gets removed & one is able to earn daily bread & butter easily.

    Mantra To Alleviate Sudden Trouble

    Chanting this mantra 108 times everyday, alleviates one from miseries and sudden trouble.

    ॐ रां रां रां रां रां रां रां रां मम् कष्टं स्वाहा

    Aum raam raam raam raam raam raam raam raam mam kashtam svaahaa

    Note:- in above mantra raam is for 8 times 

     

    Mantras by Shri Sureshanandji

    Mantras by Sureshanandji(mp3)

    कार्यसिद्धिकेलिए

    ॐ गं गणपतये नमः

    Om gam ganpatay Namah

    हर कार्य शुरु करने से पहले इस मंत्र का 108 बार जप करेंकार्य सिद्ध होगा |

    -Uttrayan Shivir Amdavad 2008

    Surya Gayatri Mantra

     आदित्याय विदमहे भास्कराय धीमहि तन्नो भानु प्रचोदयात् |

     

    om aadityaay vidmahe bhaaskaraaye dheemahi tanno bhaanu prachodayaat

     

    Mala Mantra

    जप करने से पूर्व माला को प्रणाम कर के मंत्र बोलें 

    ॐ ऐं श्री अक्ष मालाय नमः

    Before mala jap, recite the following mantra offering obeisances to the mala
    om aim shree aksh maalaay namah

     

    दाँत-दाढ़ के दर्द पर मंत्र प्रयोगः

    ॐ नमो आदेश गुरु का... बन में ब्याई अंजनी...जिन जाया हनुमंत.... कीड़ा मकड़ा माकड़ा.... ये तीनों भस्मंत.... गुरु की भक्ति.... मेरी भक्ति.... फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा।

    एक नीम की टहनी लेकर दर्द के स्थान पर छुआते हुए सात बार इस मंत्र को श्रद्धा से जपें। ऐसा करने से दाँत या दाढ़ का दर्द समाप्त हो जायगा और पीड़ित व्यक्ति आराम का अनुभव करेगा।

    दाँत-दाढ़ के दर्द पर मंत्र प्रयोगः

    ॐ नमो आदेश गुरु का... बन में ब्याई अंजनी...जिन जाया हनुमंत.... कीड़ा मकड़ा माकड़ा.... ये तीनों भस्मंत.... गुरु की भक्ति.... मेरी भक्ति.... फुरो मन्त्र ईश्वरो वाचा।

    एक नीम की टहनी लेकर दर्द के स्थान पर छुआते हुए सात बार इस मंत्र को श्रद्धा से जपें। ऐसा करने से दाँत या दाढ़ का दर्द समाप्त हो जायगा और पीड़ित व्यक्ति आराम का अनुभव करेगा।

    7 janmon ki daridrata mitane keliye

     

    Jo 7 Janmon Ki daridrata dur kerna chahte hain ve 7 saptah tak 120 mala Omkar Mantra ki Japen , aur Surya Narayan ko Khir ka bhog lagaker , brumadhya me Surya Narayan Ka Dhyan karen