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ब्रह्मचर्य रक्षा हेतु मंत्र

एक कटोरी दूध में निहारते हुए इस मंत्र का इक्कीस बार जप करें तदपश्चात उस दूध को पी लें, ब्रह्मचर्य रक्षा में सहायता मिलती है यह मंत्र सदैव मन में धारण करने योग्य है :

 

ॐ नमो भगवते महाबले पराक्रमाय

मनोभिलाषितं मनः स्तंभ कुरु कुरु स्वाहा |

 

ॐ अर्यमाय नमः’ ये मन्त्र जपने से ब्रम्हचर्य पालने में मदद मिलती है

 

जब कभी भी आपके मन में अशुद्ध विचारों के साथ किसी स्त्री के स्वरूप की कल्पना उठे तो आप ॐ दुर्गा देव्यै नमः मंत्र का बार-बार उच्चारण करें और मानसिक प्रणाम करें |”

-शिवानंदजी

 

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विवेक की धनीः कर्मावती

Admin 0 23316 Article rating: 4.0
यह कथा सत्यस्वरूप ईश्वर को पाने की तत्परता रखनेवाली, भोग-विलास को तिलांजलि देने वाली, विकारों का दमन और निर्विकार नारायण स्वरुप का दर्शन करने वाली उस बच्ची की है जिसने न केवल अपने को तारा, अपितु अपने पिता राजपुरोहित परशुरामजी का कुल भी तार दिया।
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