Divya Prerna Prakash

Youvan Suraksha-2

Apne Rakshak Aap


Photoनारी तू नारायणी


एक कटोरी दूध में निहारते हुए इस मंत्र का इक्कीस बार जप करें तदपश्चात उस दूध को पी लें, ब्रह्मचर्य रक्षा में सहायता मिलती है यह मंत्र सदैव मन में धारण करने योग्य है :

 

ॐ नमो भगवते महाबले पराक्रमाय

मनोभिलाषितं मनः स्तंभ कुरु कुरु स्वाहा |


ॐ अर्यमाय नमः’ ये मन्त्र जपने से ब्रम्हचर्य पालने में मदद मिलती है

जब कभी भी आपके मन में अशुद्ध विचारों के साथ किसी स्त्री के स्वरूप की कल्पना उठे तो आप ॐ दुर्गा देव्यै नमः मंत्र का बार-बार उच्चारण करें और मानसिक प्रणाम करें |”

-शिवानंदजी


Brahmcharya Mahima
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वे तो चौरासी लाख जन्मो में रोते रहेंगे, अपने को जो करना है कर डालो भाई ! शादी या आत्मसाक्षात्कार

एक माँ का क्या हज़ार माँ का भला हो जायेगा। एक माँ का दुःख क्या मिटेगा हज़ार माताओं का दुःख मिटाने की शक्ति तुम्हारे अंदर पड़ी है। 
सुण्या सकना कोई नहीं। कोई कंगाल नहीं है , लेकिन कंगालों की यात्रा कर रहे है। 
सुण्या सकना कोई नहीं, सबके भीतर लाल। 
मुर्ख ग्रंथि खोले नहीं , करनी भयो कंगाल।।  
संसारी कर्मो में कंगाल हो गए। या तो संसारी कर्म नहीं करते , तो मूर्खता से समय बर्बाद कर रहे है। जो साधना करना चाहिए नियम करना चाहिए वह  नहीं कर पाते। दो ढाई घंटा सुबह , एक आध घंटा दोपहर को और एक डेढ़ घंटा श्याम को बस। 
आठ घंटे तो लोग ड्यूटी करते है, तुम ६ घंटे साधना करो जमके। ६ महीने में तो कहाँ पहुँच जाओगे। १ साल के अंदर तो ईश्वर प्रगट होना चाहिए। 
ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ.......... 
नारायण नारायण नारायण .............
अपने को पूछो के आखिर हम कौन है। 
शादी हो जायेगी फिर क्या, बेटे हो गए फिर क्या, पोते हो गये  फिर क्या। चलो मेरी शादी हो जाये तो मेरा बाप खुश हो जायेगा, मेरी माँ खुश हो जायेगी। 
हमने कर ली  शादी चलो भैया खुश हो गये, फिर क्या।  ये देखा की ये तो खुश हो गये, इनकी थोड़ी देर की ख़ुशी के लिए हमारा तो सर्वनाश हो रहा है हम तो छलांग मार के चल दिए। 
पत्नी रोयेगी, उसका बाप रोयेगा। अब भाई खुश हुआ, माँ खुश हुई, अब हम जायेंगे तो पत्नी रोयेगी, माँ रोयेगी, भाई रोयेगा , पत्नी का बाप रोयेगा , पत्नी की माँ रोयेगी , पत्नी का भाई रोयेगा, पत्नी की भाभी रोयेगी। अब उनके रोने को देखो तो मत जाओ , नहीं तो फिर आप अपने रहो।  अपन रहे तो क्या वह  रोना बंद होगा।  वे तो चौरासी लाख जन्मो में रोते रहेंगे, अपने को जो करना है कर डालो भाई।  तो हम तो छलांग मार कर चले गए , अब उनको रोना हो चाहे हंसना हो उनकी मर्ज़ी ठेका लिया है। 
वो रोयेगा ,वो रोयेगा, मेरी माँ दुखी है मैं कैसे जाऊँ घर छोड़ कर । 
माँ रोती थी, मेरा भाई रोता था, पत्नी रोती थी।  अब माताजी होके पूजी जा रही है।  माँ रोती थी अब महँगीबा माता की समाधी पूजी जाती है।  एक बार आप ऊपर उठते हो तो आप के साथ जो भी जुड़े है कुटुम्बी तो उनका सबका प्रोग्रेस हो जाता है। सबका भला हो जाता है। 
मैं अपने लिए नहीं चाहता हूँ , अपनी माँ क लिए चाहता हूँ , हाँ तो माँ के लिए चाहो , भाई के लिए चाहो, अपना ईश्वर को पाओ तो सबके लिए जिसके लिए चाहते हो उनका भी भला होगा , जिनके लिए नहीं चाहते हो उनका भी तुम्हारे दर्शन से भला होगा।  तुम इतने महान हो सकते हो। 
लेकिन ऐसा कुछ कर दो मेरा धंदा चल जाये , ऐसा कुछ कर दो मेरी शादी हो जाये। तो धंदे कितने लोगो के चल रहे है , शादियां कितने लोगों की हो गयी, क्या मिल गया। नही हमारा टेंशन खत्म होजाये, ये  टेंशन खत्म हुआ तो दूसरा टेंशन आयेगा। 
सासु टेंशन करेगी , पति टेंशन करेगा, फिर गर्भवती होगी तो वो टेंशन करेगा। फिर बच्चा वो टेंशन करेगा ,फिर उसकी नाक से लीद निकलेगी वो टेंशन करेगी।  फिर उसको दांत आये | बाप हुये है तो पत्नी बोलेगी मायके चलो।  ये बच्चे को जरा बुखार आ गया।आम चल्लो, आम चलो | सारी जिंदगियाँ इसी मे खप जाएंगी। 
करणु थो सो ना कियो , पड़यो मोह के फंद , 
जो करने के लिए  मनुष्य जनम मिला है, ईश्वर प्राप्ति वो तो नहीं किया 
करणु हथु सो ना कियो पड़यो मोह के फंद। 
कह नानक समय राम गयो, अब क्या रोवत अंध।।

बुढ़ापा हो गया , जरा उठा दीजिये , कहाँ गया जुगनू।  मेरा खाना हजम नहीं होता है , नाक टेढ़ी हो गयी , आँखे अंदर चली गयी , अब कोई पूछता ही नहीं। 
जब जवानी थी कुछ कर सकते थे तो नहीं किया।  अब बूढ़ा हो गया , बूढ़ी हो गयी कोई पूछता ही नहीं , अब रोओगे तो क्या होगा।  सारे बूढ़े बूढी रोते है बिचारे। अभी मम्मी का टेंशन है फिर तुम मम्मी बनोगी तुम बेटियों का टेंशन होगा।  तुम्हारी बेटियों की शादी नहीं होगी तो टेंशन कहाँ जायेगा।  बेटे होंगे और लोफर हो जाएंगे तो टेंशन होगा। मैं शादी करलु ,मेरे बेटे होंगे लोफर हो जायेगा तो टेंशन होगा। आज्ञा नहीं मानेगा तो टेंशन, बेटी हो गयी और उसका विवाह नहीं होता तो टेंशन , विवाह हो गया और पति पत्नी झगड़ते तो टेंशन।  ईश्वर प्राप्ति के सिवाय टेंशनो की जड़ कटती ही नहीं है भांजे। समझ गया भांजी। ईश्वर प्राप्ति के सिवाय मुसीबत की जड़ कभी नहीं कटती। 1 पत्ता तोड़ दे टेंशन गया लेकिन दुसरे कई पत्ते पैदा हो रहे है। जड़ को काटो। टेंशन के पत्ते बनाने वाली जड़ जो है ना  अज्ञान, अपने और ईश्वर के बीच जो अज्ञान है उसकी जड़ को काटो और ईश्वर को प्रगट करो तब दुःख मिटेगा भांजे।  बाकि दुःख मिटाने का दूसरा कोई उपाय नही है। 
निहता कृष्ण पूरी सेना को भारी है भांजे। निहता कृष्ण पूरी सेना को भारी है भांजे। 
क्योंकि कृष्ण ने अपने आप को जान लिया है इसलिए पूरी सेना को भारी है। 
लेकिन भांजे को भी भारी है शकुनी को भी भारी है क्योंकि कृष्ण अपने आप में मधुमय है न। कृष्ण ने अपने आत्म स्वाभाव को जाना, इसलिए भारी पड़ते है। कौन हराये कृष्ण को। कृष्ण की जिस पर कृपा है उस अर्जुन को कौन हराये। तो आप जैसे कृष्ण की कृपा से अर्जुन नहीं हारता ऐसे आप की कृपा से के कई लोग हारने से बच सकते है। इतनी शक्ति है भांजे भांजियों मे। 
लेकिन क्या है के जैसे मुखी मुखी का लड़का था ,एक गावं का मुखी था, सरपंच को मुखी बोलते है। पहाड़ों में तो प्रधान बोलते है। छोटे छोटे गावं का सरपंच होता है उसको प्रधान बोलते है। और पहाड़ी इलाकों में जो प्रधान होने है ना उनको मस्का मारने वाले क्या बोलते है, के अरे भाई हमने प्रधान मंत्री को तो नहीं देखा , आप तो हमारे प्रधान नही प्रधान मंत्री हो।  
बस एक दो सिगरेट का पैकेट दे दो और वो प्रधान मंत्री हवा में उड़ेगा। २०० झुपड़े,१५० मकानों का प्रधान अपने को, मैं कोई चीज़ हूँ । तो ऐसे कोई मुखिया का लड़का था, प्रधान का बेटा था। अब कुम्हउ का होगा के गढ़वाल का होगा के कही का भी होगा लेकिन वो प्रधान का बेटा था, मुखिया का बेटा। वो बचपन में शादी का जमाना था। तो छोटी सी दुल्हन और छोटा सा दूल्हा। 
ब्राह्मण मंगलम , भगवानं मंगलम। गरुड़ ध्वजा मंगलम, पूंडरी काक्शाय, सर्व मंगलाय तनो हरि | वर-कन्या ये सब कर रहा था |
इतने में बाहर डुगडुगी बजी वो बंदरिया नचाने वाले की। तो वो जो प्रधान का बेटा था, मुखी का बेटा वो उठकर दौड़ा। बाप  ने कहा बेटा कहाँ जाता है कहाँ  जाता है , बोले वो बंदरिया देखने जाता हूँ। अरे फेरे फिरने है बोले पापा तुम फिर लेना। पापा नहीं बोला होगा, पिताजी तुम फिर लेना | अरे शादी तुझे करना है , बोले  नहीं नहीं मैं बंदरिया देखने  जाता हूँ। 
अब शादी करने वाला बंदरिया देखने जा रहा है , और फेरे दूसरे फिरेगा क्या ?  ऐसे ही ये जीवात्मा भी प्रधान का बेटा है। मन बन गया प्रधान मंत्री और आप बन गए उसके बेटे। और भागे जा रहे है बंदरिया देखने को।  अरे ईश्वर प्राप्ति के फेरे फिरो ईश्वर से। साढ़े तीन फेरे ही फिरने है , कुंडलिनी शक्ति साढ़े तीन फेरे मारके ही बैठे है , आपको साधना में वो साढ़े तीन फेरे सीधे करने है बस। फिर तो चली शक्ति चली। सात फेरे नहीं फिरने साढ़े तीन ही फिरने है बस। ज्ञानेश्वरी गीता में सब लिखा है | साढ़े तीन कुण्डल मारके उलझी हुई शक्ति पड़ी है उसे कुंडलिनी शक्ति कहते है। वो शुशुप्त पड़ी है तब तक ये जीव है जब जागृत होता है तो ईश्वरत्व  के तरफ ले जाती है। लहसुन, प्याज, शराब, मास इनसे बचे और ये साधना करे।  छ महीने के अंदर तो कहीं का कहीं पहुँच जायेगा। 

कानपूर में आज से ३५ साल पहले , कानपूर में आर्य नगर है ना वहाँ बहुत बड़ा मैदान था, वहाँ संत सम्मेलन हुआ था ३५ साल पहले आज से। १८६९-७० के आस पास। हमारे गुरूजी नैनीताल में थे तो मेरे को भेज दिया , तो हम गए , तो बोले फलाने फलाने महामंडलेश्वर सर्वदर्शनाचार्य वेदांताचार्य प्रवचन करेंगे। फिर बोले ये फलाने फलाने M A स्वामी प्रवचन करेंगे , डॉ जगदीश्वरानन्द महाराज प्रवचन करेंगे।  तो जो भी साधु का नाम आता तो आगे पीछे लम्बे लम्बे टाइटल होते थे। और मेरे लिए बोले महाराज आपका कोई ,मैंने कहा बस लीलाशाह बापू। तो ये आशाराम महाराज लीलाशाह बापू के शिष्य  प्रवचन करेंगे।  कानपूर में संत सम्मेलन में पना नाम खाली इतना।  मैंने कहा अपना भी थोड़ा डिग्री लेलो। थोड़े टाइटल लेलो। मैं वो कानपूर का सम्मेलन पूरा करके ऋषिकेश चला गया। 

शिवानन्द डीवाइन लाइफ वालो के आश्रम के नीचे राघवानंद थे आचार्य दर्शन महाविद्यालय अभी भी है, मैं उसमे भर्ती होगया, आचार्य की परीक्षा देने के लिए , तीसरी में से सीधा आचार्य की परीक्षा देनी थी मुझे | वेदांताचार्य बनना था। आसाराम महाराज वेदांताचार्य, बड़ा होता है, MA होता है। संस्कृत में जो आचार्य शास्त्री पद्ति बराबर BA पद्ति। और आचार्य पदवी बराबर MA पदवी । तो हमने कहा चलो ये पदवी ले लेते हैं । तो उसमे गीता , उपनिषद और ब्रह्मसूत्र | उसके सभी आचार्यों की व्याख्या होती है जैसे PHD के कुछ कुछ खास कोर्स होते है, ऐसे आचार्य का भी वेदनातचर्या का भी कोर्स था। तो मैं उसमे प्रविष्ट हुआ। एक दिन पढ़ा, दूसरे दिन, तीसरे दिन तो भई फलाने दर्शनाचार्य ने ये कहा, फलाने ने ये कहा। तो गीता के छटे अध्याय का अध्यापक जब व्याख्या कर रहे तो आचार्य ने बोला, तो इतने में एक साधु आये मैं गंगा किनारे स्नान करने गया, मेरे सामने देखा और वो साधु हंस पड़े। मेरेको बोले स्वामीजी कहाँ से आये। मैने बोला ऐसे तो नैनीताल से, लेकिन अभी कानपूर के सम्मेलन से सीधा यहाँ आया हूँ। अभी जरा आचार्य की पदवी लेने के भावना .... तो मेरे सामने देखा और बहुत हँसे। बोले आपको पदवी लेना बाकि है? मैने कहा नहीं बाकि तो नहीं है। मैं भी खूब हँसा वो भी खूब हँसे। उसकी आँखों में तेज़ था। फिर हम रोज़ मिलते थे गंगा किनारे थोड़ी-बहुत , बोले अभी आपकी पढ़ाई चालू है ? मैं बोला हाँ , तब तक आठ दिन हो गए थे। बोले अभी तक पढ़ रहे हो , मैंने कहा हाँ, जरा सर्टिफिकेट के लिए। बोले अच्छा। तो दूसरे दिन गीता के छटे अध्याय पर व्याख्या हुई। तो जो हमारे पढ़ाने वाले आचार्य थे, उन्होंने व्याख्या की, तो दूसरे विद्यार्थी ने की, हमने की तो बोले आप आचार्य की परीक्षा दे आये हो क्या ? हमने कहा नहीं, मैं तो तीसरी पढ़ा हूँ, सीधा आचार्य की परीक्षा में बैठना चाहता हूँ। बोले नहीं तुम जो व्याख्या कर रहे हो वो तो।
मैंने कहा अच्छा महाराज , प्रणाम कर दिया उसको , मैंने कहा चलो हो गया अपना पूरा । फिर गया ही नहीं। नहीं चाहिए सर्टिफिकेट , अब आशाराम बापू से ही गुजरा हो रहा है। वेदांताचार्य, फलाने दर्शनाचार्य में से कोई जरूरत नहीं लगती मेरेको टाइटल की।
सर्वं अधितम तेना, तेना सर्वं अनुष्ठितम | ये न आशा प्रथक कृत्वा नैराषा अवल्मबितं ||

उसने सर्व अध्ययन कर लिया, उसने सब अनुष्ठान और पठन कर लिया , जिसने संसार से सुख लेने की आशा छोड़कर, संसारी सुख से निराश होकर भगवान् के सुख में लग गया उसने सब पढ़ लिया। यही तो उपदेश हम पढ़ते थे संस्कृत में घर में थे तब।
तो इसका श्लोक मुझे जच गया। तो वो परीक्षा देने के बदले, मैं जाके किसी साधु की समाधि पे बैठ गया। परीक्षा के दिन थे संस्कृत के। तो फिर ये श्लोक आगया, तो वो परीक्षा छोड़ दी। फिर ये आचार्य की परीक्षा देने का हुआ तो वो साधु मिल गया और ये गीता के छटे अध्याय की व्याख्या हमारी व्याख्या ऐसी हुई की वो सब बोले की आप तो आचार्य करके आये हो। मैंने कहा अच्छी बात है, होगया अपना तो आचार्य करके ही आये है। यहाँ क्रष्ण भाई ही रहते थे ,वो PHD कर रहे थे। तो उनको किसीने कहा की PHD में तुमको मदद मिलेगी आशाराम बापू के पास जाओ, तो क्रष्ण भाई इधर आये , बोले PHD करना है मेरे को। मैंने कहा देखो हमारा सत्संग। तो फिर वो सत्संग सुनकर यही आश्रम में क्रष्ण भाई, माड़ी। तो उनको PHD पढ़ाने वाले आये बोले बापूजी अब ये ठीक जगह पर PHD कर रहे है। मैंने कहा भाई हम तो तीन पढ़े है बोले नहीं ठीक जगह पर PHD कर रहे है ये।

घर मा छे काशी ने, घर मा मथुरा , घर मा छे गोकुलियो गाँव रे, मारे नथी जाऊं , नथी जाऊं तीर्थ धाम रे ।। तीर्थी कुर्वन्ति तीर्थानि |
आप जहाँ रहे वो जगह तीर्थ बन सकती है । इधर शराबियों के अड्डे थे चालीस चालीस भट्टियाँ चलती थी यहाँ नदी में । पुलिस वाले आते तो उनकी बड़ी पिटाई होती थी । और हमको भी रहने में पहले जरा कठिनाई किया लेकिन मेरे साथ तो इश्वर थे तो हम डटे रहे । चालीस भाटियों वाले चले गये, मार खाने वाली पुलिस की बसे भी चली गयी । अभी तो आते है बिचारे सब सेवा भाव से । यहाँ नदी में चालीस चालीस भट्टियाँ चलती थी । जहाँ आप बैठे हैं वहाँ तो खड़े खोद के दारू छुपा देते थे । और आगे जाब्लय ऋषि की तपस्या की जगह थी । अब ऐसा होगया । एक उसको साध लो, एक परमेश्वर को साध लो बस सब सध जायेगा। और एक उसको छोड़ के दुनिया भर को करो तब भी रोते ही रहना है ।

नौकरी करने वाले भी रो रहे है, बेटे करने वाले भी रो रहे है, शादी हो गयी वो भी रो रहे है । दुल्हने भी रो रही है , दुल्हे भी रो रहे है । मियाओं मियाओं वाले भी रो रहे है । रोने वाले बच्चे भी रो रहे है और जिनको चुप करवा रहे है वो भी रो रहे है बच्चो के साथ , ये क्या करें बेटे ये को होगया, अपेंडिक्स हो गया । अब बेटे को इस उम्र में कम दीखता है ।बेटी है लेकिन उसका ऐसा हो गया, अब इसको इधर ऐसा हो गया । क्या करें ?


ईश्वर को प्रकट करने की ताकत वाला आदमी कितना दुखी हो रहा है । ईश्वर का बाप बनने की ताकत रखने वाला मनुष्य , ईश्वर का मित्र बनने की ताकत रखने वाला मनुष्य, ईश्वर का गुरु बनने की ताकत रखने वाला मनुष्य, ईश्वर का सखा बनने की ताकत रखने वाला मनुष्य, ईश्वर की माँ बनने , मौसी बनने की ताकत रखने वाला मनुष्य !
मेरी माँ का टेंशन है, फलाना टेंशन है । मेरे को अपने लिए नही चाहिए उसके लिए चाहिए । अरे सबके लिए तू पा ले, तू पहले ईश्वर को पा ले फिर सब ठीक हो जायेगा
स तरति लोकान तारयति - वो तो तरता है दूसरों को तारेंगा 
स तृप्तो भव देवो तृप्तो - दूसरों को तृप्त कर देगा 
अरे साईं, क्या होगा मेरा । मेरे दो बेटे है उनकी शादी नही होती , दो बेटियां है , मैं मर गया
कुंवारा था तभी शादी नही हो रही थी तब भी मर रहा था ।अब शादी हुई तो बच्चे नही हो रहे तब मर रहा था । बच्चे हुए तो अब उनकी शादी नही हो रही तब मर रहा है
Young Person says life is full of JOY BUT wise person says life is full of sorrow

तुम किधर को जा रहे हो प्रॉब्लम सोल्व करने को , जहा प्रोब्लेमों की आग जल रही है उधर जा रहे हो
वशिष्ठ जी कहते है रामजी - किसीको आग लगी हो और तिनके डाल रहे है, आग मिटाना चाहे तो मुर्ख है
किसीको आग लगी है और पेट्रोल पम्प का फुवारा करके आग मिटाने चाहे तो मुर्ख है ।अज्ञानी अपने ही राग - द्वेष की आग में जल रहे है और वैसे ही अज्ञानियों में सेट होकर लोग निर्दुख होना चाहते है तो मुर्ख है जो खुद दुःख में पच रहे है उन्ही को फॉलो करके लोग सुखी होने जा रहे है । जो दुखो में पच रहे है, टेंशन में पच रहे है उन्ही को फॉलो करके लोग टेंशन रहित लाइफ गुजारना चाहते है
How can be ?
When will be, how can be ?
बापूजी तीन पढ़े है और ऐसा भी बोलते है , हाँ येही तो बात है
नारायण नारायण नारायण नारायण ...........
एक साधे , सब सधे
सब साधे , सब जाये 

एक कहता है सब होता है , सब ते एक ना होए और एक आत्मा से सब होता है, सबसे आत्मा नही बनता परमेश्वर से सब होता है, सब मिलके परमेश्वर को नही बना सकते । उस परमेश्वर के निकट आओ बस । जल्दी से जल्दी पाओ । तडप बधा दो । आर्डिनरी लड़कियों की नक़ल मत करो, आर्डिनरी लडको की नक़ल मत करो । आर्डिनरी ग्रह्स्थियों की नक़ल मत करो । मीरा होती तो क्या करती ? शबरी होती तो क्या करती ? ध्रुव होते तो क्या करते ? राम कृष्ण होते तो क्या करते ? विवेकानंद होते तो क्या करते ? बुध होते तो क्या करते ? महावीर ने क्या नही किया मल्लियनाथ
कितनी सुन्दरी थी, और राजे महाराजे उसको चाहते थे उससे शादी करने को । थूका भी नही उनपर । राजे महाराजे नाक रगड़ते थे की ये कन्या हमको मिल जाये ।कन्या ने कहा नही , मैं भोगियों की भोग्या नही बनूंगी । भोगी राजा मुझे भोग की बूढी बना दे और मैं मर जाऊं दो चार बच्चे करके, ऐसी जिन्दगी नही जिउंगी । साधना में लगी तो वो भगवान मल्लियनाथ बन गयी कन्या । जैन धर्म की उन्नीसवी तीर्थंकर भगवान् मलियेनाथ , मैं भी बोलता हूँ हाथ जोडके भगवान् मल्लियनाथ । नही तो वो कन्या थी किसी समय तो, लेकिन भगवद ध्यान किया तो भगवान् मल्लियनाथ। मलिका भगवान् मल्लियनाथ बन गयी जब एक मलिका, सुन्दरी कन्या और राजे और राजकुमार उसपर लट्टू हो रहे थे, सबको ठुकराकर सधना में भगवान बन गयी हम क्या करे, हमको आशीर्वाद दो, मेरी शादी हो जाये , अच्छी लड़की मिल जाये . तो बुध के पास तो थी मेरेको अच्छा लड़का मिल जाये, अच्छा लड़का मिल गया तो क्या प्रॉब्लम सोल्व हो गये ? और प्रोब्ले बढ़ेंगे क्यूंकि अच्छा लड़का मिला तो ज्यादा प्यार होगा, ज्यादा प्यार होगा तो कमर तोड़ प्रोग्राम ज्यादा हो जायेगा, जल्दी बूढी हो जाएगी अच्छी लड़की मिली तो तू जल्दी बुढा हो जायेगा
ॐ ॐ ॐ ॐ
क्या करें अब ? वो तो सत्संग सम्झाइछे नहीं तो आंध्डी दौड़ |
एक भुला दूजा भुला , भुला सब संसार जैसे कुएँ में भाग पड़ी है जो भी पियें सब नशे मे
तो माहोल में बिचारों का कसूर नही है , ऐसे ही माहोल में रहते है पढो, लिखो, शादी करो, बच्चे करो और टेंशन में होकर मर जाओ बस टेंशन मिटाते मिटाते, टेंशन का शिकार होकर मर जाओ अब हम शादी करेंगे तो पिता- माता का टेंशन दूर होगा , तो पिता माता की शादी करने से उनका टेंशन, उनके माँ बाप का टेंशन दूर होगया क्या ? संसार को फॉलो करने से टेंशनलेस कभी नही होगा ईश्वर को फॉलो करने से टेंशन लेस होगा क्या ख्याल है अभी तो समझ में आता है लेकिन दरवाजे के बाहर जायेंगे तब दूसरी खोपड़ी हो जाएगी इसीलिए कैसेट ले जाना और बार बार सुनना चाहे पैसे कम हो तो कम पैसों में ले जाना लेकिन ये कैसेट सुनना बार बार तो ईश्वर की तरफ चलने में मदद मिल जाये एक बार ईश्वर पा लो, फिर शादी करो, बच्चे करो मेरे को भी बच्चे है , बच्ची है , बच्चा है हम कहाँ मना करते है शादी करने को लेकिन एक बार ईश्वर को पा लो और शादी हो गयी तबभी भी संसार में मत गिरो ईश्वर को पाके फिर नही हुई तो करो ही मत और हो गयी तो ईश्वर का पाने के बाद संसारी बनो बस मुछ पे हाथ घुमाओ के बस पहले ईश्वर पाऊंगा फिर पति पाऊंगा , फिर पत्नी पाऊंगा अथवा पति पत्नी होगया किसी भाग्य से, किसी ने धर दिया तो ठीक है ।अब भागो ईश्वर पाने के लिए
शबरी भिलन के फेरे फिर रहे थे ,पंडित ने कहा सावधान - सावधान , तो शबरी सावधान होगयी की ये तो फसने का है.
उसका बाप देखता ही रह गया , वाले देखते ही राह गये दूल्हा देखता ही रह गया तेरे जैसे दुल्हे कई जन्मों में मिले, शबरी भाग गयी भाग गयी नही ठीक जगह पर पहुंची शबरी रामजी झुठे बेर खा रहे है शबरी के नहीं तो उसकी मम्मी को, मम्मी को दुःख हुआ होगा, शबरी की माँ को, शबरी के पापा को भी दुःख हुआ और शबरी के भाइयों को भी दुःख हुआ था उस समय लेकिन अभी उनका कितना कल्याण हुआ ऐसे ही मीरा की माँ को , मीरा के भाइयों को दुःख हुआ होगा हमारे भाई को , हमारी पत्नी को, हमारी माँ को और साले को तो दुःख होता था , साले का साला भी हमको अक्ल देता था के ऐसा मत करो साले के साले हमको अक्ल देने आये चल
गृहस्थी हो गया अब जो हो गया , शादी कर लियाअब अपना खाओ कमाओ, मजे से रहो इतने हो, स्मार्ट हो , फलाना हो साला तो अक्ल देवे अब इधर तो धके खाते है वो साले आते है इधर सालो को धके लगते है इधर और पहले मेरे को अक्ल देते थे अभी दर्शन के लिए भी 10 धके सहन करके फिर आते है माथा टेकने सालो के साले .... कलकते वाले मेरे को ही सीख देते थे सब, के ऐसा नही करना चाहिए, माँ को टेंशन होगा , देखो सासुजी बिचारी रो रही है तुम्हारा ससुर बुढा है, जरा ख्याल करो, ये करो हम उनका ख्याल करते तो हमारी क्या हालत होती इसीलिए ईश्वर की प्राप्ति के लिए थोडा दृढ बनना पड़ता है
क्या करे, मेरे को अपने लिए तो नही लेकिन साला बिचारा बोल रहा है , बिचारी पत्नी रो रही है क्या करूं .....
तो तू भी रो उसके साथ जीवन भर
क्या करिये क्या जोडीये , थोड़े जीवन काज
छोड़ी छोड़ी सब जात है , देह गेह धन राज ||
कौन किसका साला , कौन किसका ससुर , कौन किसका बाप
तो चला चली का मेला है, जिसने ईश्वर पा लिया वो जीत गया , बाकि सब मरे , जन्मे , मरे अब कितने मकोड़े हैं , कईयों के साले होंगे, ससुर होंगे, पतंगी आये .वो भी किसी जन्म में मनुष्य बने होंगे  कौन पूछता है उनको
कितने कीड़े - मकोड़े भी तो कभी मनुष्य बने थे  मम्मी का टेंशन दूर किया होगा, पापा का टेंशन दूर किया होगाअभी मकोड़ों  का टेंशन कौन दूर करता है 

Oh My God !! What you Think !! Surprise  
एटला डोलर थई जाये, एटले निरात | अरे मेल छोड़ा | तू तो मरी जाई छु, खपी जाई छु तो निरात ना आवा | बे रोटला खावाना | 
पहला ईश्वर प्राप्ति करवानी छे  डॉलर की ऐसी तैसी  और जो ईश्वर की तरफ चलता है ना संसार की चीज़े उसके पास अपने आप आती है  
भागती- फिरती थी दुनिया जबकि तलब करते थे हम, 
अब ठुकरादी तो वो  बेकरार आने को है 
आप ईश्वर को छोडकर संसार के पीछे भटकते तो संसार दूर भागता है  आप संसार की परवाह छोडकर ईश्वर की तरफ जाते तो संसार तुम्हारे पीछे पीछे पाले हुए कुत्ते की नाई आता है  ऐसी बात है  लेकिन इतनी बार तो मेरी शादी हो जाये 
यार बना है दूल्हा, फुल खिले है दिलके 
मेरी भी शादी हो जाये, दुआ करो सब मिलके .
ये जोनी वाकर  बजाता था  
ऐसी पिक्चर में मेरे को ले गये की ये शादी को मानता नही चलो जरा पिक्चर दिखाकर लाये 
तो जबरदस्ती पटा पुटुके वो पिक्चर दिखने ले गये थे  जोनी वाकर गाता था किसी की शादी में यार बना है दूल्हा, फुल खिले है दिलके , मेरी भी  शादी हो जाये, दुआ करो सब मिलके . . 
अहमदाबाद में कृष्ण सिनेमा है 
दूसरी फ़िल्म में ले गये थे हकीकत, मैं तो रोता था फिल्म में, नीचे आँखे करके की भगवान मेरा क्या पाप है की इधर आया 
बलात ले गये रोते आये ये क्या देखना सब चलचित्र , फिल्म 
जिससे सारी दुनिया बनी है वो तुम्हारे साथ है उस परमेश्वर को देखो, परमेश्वर का आनंद लो, परमेश्वर को जानो ये सब क्या चलचित्र देखना 
पहले तो देश खबर जानने के लिए थोड़ी समाचार के लिए टीवी खुलवा  देता था, अब वो भी नही देखता 
वो देखो फिर आगे पीछे का दूसरा भी देखो 
ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ  नारायण नारायण नारायण   
अब लग जाओ | नौकरानी रोटी बना देवे, नौकर ड्राइविंग करे और खुद चिल्लाह  खावे तो पूरी धिन्दो हार्ट फ़ैल | 
सूजी तो खुद ही भारी है और उसके ऊपर का जो लेयर है न वो तो निकल जाता है गेहूं का नुकसान करता है  
सूजी ठीक नही होता स्वस्थ्य के लिए और तली हुई चीज़  मोटा बनेगा तो समझो बुढापे में कोई भी बीमारी आगयी तो बहुत तंग करेगी  इसीलिए बुढापे में फेट कण्ट्रोल करना चाहिए  हम पहले मोटे थे अब पतले हो रहे है  कितने अच्छे हो गये अब लोग बोलते स्वामी जी आप दुबले होगये, अरे हम और बलवान होगये  दुबला तू होजा मोटा दुबला होता है , हम बलवान होगयेअगर आजमाना है तो आजा , कुश्ती करके देख , दौडके देख , हाथ मिलाके देख , हाथ छुड़ाके देख   ऐसे थोड़ी होगये दुबले .
कई लोग आते है बापूजी आप दुबले होगये  दुबले क्या होगये हम बलवान होगये  जो मोटे है वे दुर्बल है, मोटे लोग दौड के दिखाओ मेरे साथ नाच के दिखाओ, मैं जितनी देर नाचू मोटे नाचे तो ....... 
नारायण नारायण नारायण 
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वे तो चौरासी लाख जन्मो में रोते रहेंगे, अपने को जो करना है कर डालो भाई ! शादी या आत्मसाक्षात्कार

Admin 0 157252 Article rating: 3.9

विवेक की धनीः कर्मावती

Admin 0 4680 Article rating: 4.0
यह कथा सत्यस्वरूप ईश्वर को पाने की तत्परता रखनेवाली, भोग-विलास को तिलांजलि देने वाली, विकारों का दमन और निर्विकार नारायण स्वरुप का दर्शन करने वाली उस बच्ची की है जिसने न केवल अपने को तारा, अपितु अपने पिता राजपुरोहित परशुरामजी का कुल भी तार दिया।
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