चित्त दोष निवारक मंत्र - रोज सोते समय बोलकर सोएँ
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चित्त दोष निवारक मंत्र - रोज सोते समय बोलकर सोएँ

चित्त दोष निवारक मंत्र का प्रभाव ;- बापूजी ने चित्त के दोषों को दूर करनेवाले मंत्र को रोज सोते समय बोलकर सोने लिए कहा है. ….


चित्त में कितने दोष है, कितनी भी बड़ी  आफ़त आती है, उन्हें मिटाने का सुन्दर मंत्र मिला है ,

लिखोगे , बहोत लाभ होगा ..१२ /१५ साल से जो करते हो और फिर भी कुछ नही हुआ है ये करने

से जरुर हो जायेगा..पीडा, दुख, चिन्ता  जायेगी… आप के बल से नही हुआ लेकिन उसमे प्रभु कि 

शक्ति है तो आप के बल से नही लेकिन प्रभु के बल से जरुर होगा..जैसे पिता बच्चे का हाथ पकड़

लेता तो सहज हो जाता है…वैसे ये मंत्र से प्रभु कि शक्ति जापक को मिलती है..अगर आप लिख

सके तो लिखे और पक्का करिये … रात  के सोते समय  सीधा लेट जाइए   और एकाग्रता से एस

मंत्र का उच्चारण  करे….आप का चित्त के चिन्ता, पीडा ,भय,दुख  ये दोष ऐसे भागेगे जैसे थे

ही नही ….. मंत्र  है :-
“ॐ चित्तात्मिकाम महाचित्तीम चित्तस्वरुपिणिम 
आराध्यामीम चित्त्जान रोगान शमयां शमयां ठं ठं स्वाहा :”

( हे चित्तात्मिकाम,हे महाचित्त स्वरुपिणी , मैं तेरी


आराधना करता/कराती हूँ . हे जगत्शक्ति भगवती मेरे चित्त के दोषों को तू शमन कर..ॐ ठं ठं

स्वाहा )

ये मंत्र का अर्थ है :- ये सारे ब्रह्माण्ड को चलाने वाली चित्तात्मिका माँ मेरे चित्त के सर्व रोगों का तू

शमन कर. रात को अपने शयन खण्ड मे जाकर सीधे लेट जाये और एकाग्रता से इस मंत्र का

उच्चारण करे. फिर जो प्रार्थना करते हो वो  करे और   हरि ॐ हरि ॐ हरि ॐ ॐ ॐ ॐ ॐ 

ॐ ॐ ॐ …..72 हज़ार नाडिया पावन होगी..हां

हां हां हां हां हां हां हां 🙂 
आप का स्वभाव पलभर में शांत ! रोज ऐसा 
करे..और फिर श्वास अन्दर जाता है “शांति ” बाहर

आता है गिनती (१),श्वास अन्दर जाता है “आनंद” बाहर आता है (२), श्वास अन्दर जाता है “माधुर्य”

बाहर आता है (३)..इस प्रकार  श्वासों श्वास की गिनती करते हुए सो जाये…जैसे बालक माँ के

गोद में  निश्चिंत होकर सो जाता है वैसे ही भगवान के गोद मे स्वयम् को हवाले कर दे..बहोत

लाभ होगा! सुबह नींद से जग के बोलो कि हे प्रभु आप सत्, चेतन और आनंद स्वरुप हो जो मेरा

आत्मा  बनकर बैठे हो……असत् जड़ दुखरूप शरीर है ..मैं प्रभुका, मेरे प्रभु !…दिनभर के

कार्यकलापों मे आप का स्मरण सदा रहे , मेरा व्यव्हार भक्ती हो जाये…

ॐ ॐ  ॐ  ॐ  ॐ  ॐ  ॐ  ॐ हा  हा  हा 

हा हा  हा 🙂 ..


 


“ॐ चित्तात्मिकाम महाचित्तिम चित्तस्वरुपिणिम आराध्यामिम चित्त्जान रोगान शमयं शमयं ठं ठं स्वाहा :”
बापूजी ने कहा कि २/३ दिन मे ही इस मंत्र के लाभ दिखायी देने लगेंगे.रोज सोते समय ये मंत्र or पुरा नही बोल सके तो केवल “ठं ठं स्वाहा ” मंत्र के साथ श्वासों कि गिनती करते हुये सो जाये तो योगनिद्रा होती है.
1hour योगनिद्रा = 4hrs slip. चार घंटे की नींद
योग-निद्रा माने सोते वक्त भी भगवान कि पूजा ही है.पूज्य सदगुरूदेव ने बार बार चित्त मंत्र के बारे मे कहा है,और सभी साधको को इसका लाभ अवश्य ले.


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