पुण्यात्मा, उत्तम संतान की प्राप्ति के लिए
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पुण्यात्मा, उत्तम संतान की प्राप्ति के लिए

पुण्यात्मा, उत्तम संतान की प्राप्ति के लिए

बृहस्पति, बुध, शुक्र, चन्द्र - ये शुभ ग्रह हैं । इनमें बृहस्पति तो अत्यंत शुभ ग्रह है । बृहस्पति जब बलवान होता है तब पुण्यात्मा पृथ्वी पर अवतरित होते हैं । बलवान बृहस्पति जिसकी जन्म-कुंडली में होता है, उसमें आध्यात्मिकता, ईमानदारी, अच्छाई, सच्चरित्रता आदि गुण तथा विद्या व अन्य उत्तम विशेषताएँ होती हैं । इसलिए गर्भाधान ऐसे समय में होना चाहिए जिससे बच्चे का जन्म बलवान व उत्तम ग्रहों की स्थिति में हो । वर्तमान समय में दिनांक 3 अगस्त 2018 से 25 जनवरी 2019 तक का समय गर्भाधान के लिए उत्तम है । इसके अलावा 27 दिसम्बर 2019 से 15 फरवरी 2020 तक का समय तो गर्भाधान के लिए अतिशय उत्तम है ।

महान आत्माएँ धरती पर आना चाहती हैं लेकिन उसके लिए संयमी पति-पत्नी की आवश्यकता होती है । अतः उत्तम संतान की इच्छावाले दम्पति गर्भाधान से पहले कम-से-कम 2-3 माह का ब्रह्मचर्य-व्रत अवश्य रखें, साथ ही अधिकाधिक गुरुमंत्र का जप करें । हो सके तो पुरुष 40 दिन के और महिलाएँ 21 दिन के 2 या 3 अनुष्ठान करके उत्तम संतान हेतु सद्गुरु या इष्टदेव से प्रार्थना करें, फिर गर्भाधान करें ।

गर्भाधान के लिए अनुचित काल

पूर्णिमा, अमावस्या, प्रतिपदा, अष्टमी, एकादशी, चतुर्दशी, सूर्यग्रहण, चन्द्रग्रहण, पर्व या त्यौहार की रात्रि (जन्माष्टमी, श्रीराम नवमी, होली, दिवाली, शिवरात्रि, नवरात्रि आदि), श्राद्ध के दिन, प्रदोषकाल (1. सूर्यास्त का समय

2. सूर्यास्त से लेकर ढाई घंटे बाद तक का समय), क्षयतिथि दिेखें आश्रम की कर्मयोग दैनंदिनी (डायरी) एवं मासिक धर्म के प्रथम 5 दिन, माता-पिता की मृत्युतिथि, स्वयं की जन्मतिथि, संध्या के समय एवं दिन में समागम या गर्भाधान करना सर्वथा निषिद्ध है । दिन के गर्भाधान से उत्पन्न संतान दुराचारी और अधम होती है ।

शास्त्रवर्णित मर्यादाओं का  उल्लंघन नहीं  करना चाहिए, नहीं तो आसुरी,  कुसंस्कारी या विकलांग संतान पैदा होती है । संतान नहीं भी हुई तो भी दम्पति को कोई खतरनाक बीमारी हो जाती है ।

गर्भाधान के पूर्व विशेष सावधानी

अपने शरीर व घर में धनात्मक ऊर्जा आये इसका तथा पवित्रता का विशेष ध्यान रखना चाहिए । बहनों को मासिक धर्म में भोजन नहीं बनाना चाहिए ।

गर्भाधान घर के शयनकक्ष में ही हो, होटलों आदि ऐसी-वैसी जगहों पर न हो ।

टिप्पणी : उत्तम समय के अलावा के समय में भी यदि गर्भाधान हो गया हो तो गर्भपात न करायें बल्कि गर्भस्थ शिशु में आदरपूर्वक उत्तम संस्कारों का सिंचन करें । गर्भपात महापाप है ।

विशेष : * उत्तम संतानप्राप्ति हेतु महिला उत्थान मंडल के ‘दिव्य शिशु संस्कार केन्द्रों’ का भी लाभ ले सकते हैं ।

सम्पर्क : 9157306313

* उत्तम संतानप्राप्ति में सहायक विस्तृत जानकारी हेतु पढ़ें आश्रम व समिति के सेवाकेन्द्रों पर उपलब्ध पुस्तक ‘दिव्य शिशु संस्कार’ ।

सम्पर्क : (079) 39877730


How to have a Brilliant and Virtuous Progeny?

Jupiter, Mercury, Venus and the Moon are benefic planets. Jupiter, out of them, is extremely benefic. Virtuous souls descend on the earth during the ascendancy of Jupiter. One having the ascendant Jupiter in his horoscope has spirituality, honesty, goodness, good character, etc. besides knowledge and other excellent virtues. Therefore, conception should be so planned that the child may take birth during the ascendancy of the first-rate planets. Currently the period between 3rd August 2018 and 25th January 2019 is the most suitable for conception. This apart, the time from 27th December 2019 to 15thFebruary 2020 is extremely propitious for conception.

Great souls are eager to descend on the earth, but that requires a couple practicing restraint. Hence, those couples who want to have an excellent progeny must observe continence for at least 2-3 months before conception, besides doing maximum Japa of the Guru mantra. If possible, the husband and wife should perform 2-3 Anushthanas of 40 days and 21 days respectively, and together pray to their SatGuru or presiding deity for an excellent progeny before copulation.

Improper time for conception

Copulation is strictly prohibited during the night of a Full moon day, No moon day, First, Eighth, Eleventh and Fourteenth day of a lunar month, Solar Eclipse, Lunar Eclipse, Festivals or Parvas like (Janmashtami, Shri Rama Navami, Holi, Dipavali, Shivaratri, Navaratri, etc.); periods of Shraaddha, Pradosha Kala (1. During Sunset 2. Two and half hours from Sunset), Kshaya Tithi i.e. a tithi or a day not reckoned in a lunar month (refer to the diary published by ashram), First five days of the menstrual period, Death anniversary of either parent, Birthday of either of the couple, or during the Sandhya times (Three times of day: 15 minutes before and after Sunrise, 15 minutes before and after midday, 15 minutes before and after Sunset) and daytime. The progeny conceived in daytime is of bad conduct and wicked.

Scriptural restrictions should not be breached; otherwise the couple will have a demoniac, morally debased or disabled progeny. Even if they do not have a progeny, the couple contracts one or another serious disease.

Special precautions before conception

The couple should take special care to get their body and house charged with positive energy besides maintaining complete piety. Menstruating women should not cook food. Conception should take place in the bedroom of one’s own residence alone, not in hotels or other impious places.

Note: If conception has taken place during a period other than the most propitious ones prescribed, do not go for an abortion; rather, keep inculcating excellent moral values in the fetus with due care and adoration. Foeticide is a great sin.

Note: * You can receive guidance from the ‘Divya Shishu Sanskar Kendras’ run by the Mahila Utthan Mandal about how to have brilliant progeny.

Contact: 9157306313

* For detailed information on how to get brilliant progeny read the book ‘Divya Shishu Sanskar’ available at all ashrams and service centres of the Samiti.

Contact: (079) 39877730.

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