साधना में चार चाँद लगानेवाला अमृतकाल : चतुर्मास
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साधना में चार चाँद लगानेवाला अमृतकाल : चतुर्मास

(चतुर्मास : 23 जुलाई से 19 नवम्बर)

चतुर्मास की बड़ी भारी महिमा है, इन बातों को जानकर इस अमृतकाल का लाभ उठाइये :

(1) सद्धर्म, सत्संग-श्रवण, सत्पुरुषों की सेवा, संतों के दर्शन, भगवान का पूजन आदि सत्कर्मों में संलग्न रहना और सुपात्र हेतु दान देने में अनुराग होना - ये सब बातें चतुर्मास में अत्यंत कल्याणकारी बतायी गयी हैं ।

(2) इन दिनों भूमि पर (चटाई, कम्बल, चादर आदि बिछाकर) शयन, ब्रह्मचर्य-पालन, उपवास, मौन, ध्यान, जप, दान-पुण्य आदि विशेष लाभप्रद होते हैं ।

(3) जल में आँवला मिलाकर स्नान करने से पुरुष तेजवान होता है और नित्य महान पुण्य प्राप्त होता है ।

(4) चतुर्मास में ताँबे के पात्र में भोजन विशेष रूप से त्याज्य है । इन दिनों धातु के पात्रों का त्याग कर पलाश के पत्तों पर भोजन करनेवाला ब्रह्मभाव को प्राप्त होता है, ऐसा शास्त्र में कहा गया है ।

(5) इन दिनों में परनिंदा का विशेष रूप से त्याग करें ।

(6) चतुर्मास में शादी-विवाह और सकाम यज्ञ नहीं होते । ये चार मास साधन-भजन करने के हैं ।

(7) पद्म पुराण में आता है कि जो व्यक्ति भगवान के शयन करने पर विशेषतः उनके नाम का कीर्तन और जप करता है, उसे कोटि गुना फल मिलता है ।

(8) चतुर्मास में भगवान विष्णु के सामने खड़े होकर ‘पुरुष सूक्त’ का पाठ करने से बुद्धिशक्ति बढ़ती है ।

अपना आध्यात्मिक खजाना बढ़ायें

चतुर्मास की महिमा के बारे में पूज्य बापूजी के सत्संग में आता है : ‘‘जैसे किसान बोवाई करके थोड़ा आराम करता है और खेत के धन का इंतजार करता है, ऐसे ही चतुर्मास में आध्यात्मिक धन को भरने की शुरुआत होती है । हो सके तो सावन के महीने में एक समय भोजन करे, जप बढ़ा दे । हो सके तो किसी पवित्र स्थान पर अनुष्ठान करने के लिए चला जाय अथवा अपने घर में ही पूजा-कमरा बना दे । एक सुबह को नहा-धोकर 5 बजे पूजा-कमरे में चला जाय और दूसरी या तीसरी सुबह को निकले । मौन रहे, शरीर के अनुकूल फलाहार, अल्पाहार करे । अपना आध्यात्मिक खजाना बढ़ाये । ‘आदर हो गया, अनादर हो गया, स्तुति हो गयी, निंदा हो गयी... कोई बात नहीं, हम तो करोड़ काम छोड़कर प्रभु को पायेंगे ।’ ऐसा दृढ़ निश्चय करे । बस, फिर तो प्रभु तुम्हारे हृदय में प्रकट होने का अवसर पैदा करेंगे ।’’

विशेष : चतुर्मास के दौरान सभी साधक मंत्रजप-अनुष्ठान का लाभ अवश्य लें । मौन-मंदिर व अनुष्ठान की सुविधा संत श्री आशारामजी आश्रमों में उपलब्ध है ।

अधिक जानकारी हेतु सम्पर्क करें : साधक निवास कार्यालय, संत श्री आशारामजी आश्रम, अहमदाबाद ।

दूरभाष : (079) 39877729

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The ambrosial period of Chaturmasa for enhancing Sadhana

(Chaturmasa: 23rd July to 19th November)

Take full advantage of the tremendously glorious period of Chaturmasa by noting the following facts:

(1) Remaining engaged in virtuous acts like performance of duty, listening to Satsang, serving the Self-realized men, having Darshan of Saints, worshipping the Lord, etc. and having a passion for making donations to  deserving persons, are considered extremely propitious during the period of Chaturmasa.

(2) Sleeping on the bare ground (after spreading a mat, blanket, bed-sheet, etc.), practice of

Brahmacharya, keeping a fast, silence, meditation, Japa, charity, etc. are especially beneficial during these days.

(3) Taking bath with water mixed with Amla (Indian Gooseberry) juice makes a man lustrous and he earns great merits daily.

(4) Taking food in copper utensils is especially prohibited during Chaturmasa. As per the scriptures, those who stop using metal utensils and take food served on the Leaves of Palaasha (butea frondosa) tree develop Brahmabhava.

(5) One should avoid slandering others especially during these days.

(6) Holy rituals that are done for the fulfillment of desire or motives such as marriage, etc. are prohibited. These four months are meant for observance of austerities.

(7) The Padma Purana states that one doing Japa and Kirtana of the Lord’s Name, when the latter is asleep, gets crore-fold merit.

(8) Recitation of the ‘Purusha Sukta’ while standing in front of the image of Lord Vishnu augments ones intellectual power.

Increase his spiritual wealth

Regarding the glory of Chaturmasa, Pujya Bapuji says: “Just as a peasant takes some rest after sowing seeds, and waits for the wealth (of crop) from his farm; similarly, this period of Chaturmasa marks the start of amassing spiritual wealth. If possible, take a single meal every day during the month of Shravana and increase the number of Japa. If possible one should go to a sacred place to perform an Anushthana or else arrange a separate room for worship, etc. at home. He should enter that room at 5:00 am after taking bath in the morning and come out on the second or third morning. He should observe silence, take only fruit or light meals fit for his physical health, and increase his spiritual wealth. He should resolve firmly: “It does not matter whether I get respect or am insulted, praised or censured; I will attain God even if it requires to leave ten million tasks.” That’s all, and then the Lord will create the opportunity to reveal Himself in your heart.”

Note: All Sadhakas must derive benefit of Chaturmasa by performing an Anushthana of their Guru-mantra (repeating a mantra for a set number of times during a period). Mauna-Mandir (temples of silence for doing sadhana in seclusion while observing mauna) and Anushthana facilities are available in
Sant Shri Asharamji Ashrams.
For more information, please contact: Sadhak Nivas Karyalaya, Sant Shri Asharamji Ashram, Ahmedabad. Phone: (079) 39877729.


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