Thursday, October 23, 2014
 
 

Latest Q&A with Pujya Bapuji
Answers To Your Questions
1 Jun 13,   humari seva niswarth hai ya wahwahi ke liye ho rahi a iska pata kaise chalega?
DetailViews: 1490,   By Ashram Seva Team Read More >>

1 Jun 13,   Padhai mei man nahin lagta kya kare?
DetailViews: 15358,   By Ashram Seva Team Read More >>

Search For Answers Minimize
Search

  गृहस्थ जीवन में कई बार साधना से विक्षेप होता है | इससे कैसे बचें ?

 


गृहस्थ जीवन में साधना से विक्षेप होता है तो गृहस्थ छोड़कर भागो | तो जहाँ भागोगे वहाँ भी विक्षेप होगा ,विक्षेप से भागो मत | अपने मन की हो तो खुश मत हो और अपने मन के विपरीत हो तो विक्षिप्त मत हो | अपने मन के नही हुई तो चलो हम चाहते हैं ऐसी नही हुई तो कोई सत्ता है, जो उसके चाह का हुआ है, तो भगवान ने अपना चाहा किया वाह-वाह | अपने मन की होती है तो हम फसते हैं आसक्ति में , अपने मन की नही हुई तो हमे मुक्ति का मजा आएगा, क्या फर्क पड़ता है ? तो विक्षेप कहाँ रहेगा ? विक्षेप उन्हीं बेवकूफ लोगों को होता है, जो अपने मन की ठानते हैं और नही होती है तो परेशानी पैदा करते हैं |

प्रकृति के, ईश्वर के अथवा नियम के आड़े खड़े होते हैं वे लोग परेशान होते हैं | मैं तो बड़ा परेशान हूँ , मैं तो बड़ा परेशान हूँ, मैं तो बड़ा परेशान हूँ | अरे संसार के नियम हैं, सब एक व्यक्ति की चाही नही होगी, अपने मन की चाही सबकी नही होती और थोड़ी-बहुत किसी की होती है | हम जो चाहते सब होता नही, जो होता है वो टिकता नहीं , जो होता है वो भाता नही, और जो भाता है वो टिकता नही | ये कथा तो हमने बार-बार कही है |

अपने मन की, किसी की चाहे रामजी हो, चाहे ईसामसीह हो, चाहे बड़ा अवतारी हो, अपने मन की सब नही होती | अगर सब किसी एक व्यक्ति या एक अवतार के मन की हो तो प्रकृति में उथल-पुथल हो जाये , व्यवस्था भंग हो जाये | वो तो जो होता है, आदि नियम है, उसी अनुसार होगा | हम जो चाहते वो सब होता नही, जो होता है वो सब भाता नही, और जो भाता है वो टिकता नही | इसी में नया रस है, आनंद है और उन्नति है |

भाया, मेरी पत्नी सदा रहे, मेरा पति सदा रहे, मेरा बेटा सदा रहे | तो टिकेंगे क्या ? अगर टिके तो संसार नर्क हो जाये | ये अच्छा है मरते हैं तो नये आते हैं, जरा फुल खिलते रहते हैं | मेरी दुकान मिटे नही, मेरा ये मिटे नही, वो मिटे नही, ये मिटे नही | कौन चाहेगा अपना कल्पना का संसार हट जाये, मिट जाये | लेकिन वो मिटता है, हटता है, तो नया आता है, अच्छा है न | तो विक्षेप, विक्षेप से भागो नही, विक्षेप न हो ऐसे ज्ञान में रहो | मन में विक्षेप आता है, लेकिन जैसे आग लगती है जंगल में तो आप सरोवर में खड़े तो जाते हैं तो आग से बच जाते हैं | ऐसे ही जब मन में विक्षेप आये तो ज्ञान के तालाब में आ जाओ |


गृहस्थ जीवन में कई बार साधना से विक्षेप होता है | इससे कैसे बचें ?


 

Copyright 2013 by Shri Yoga Vedanta Ashram. All rights reserved. Terms Of Use Privacy Statement