Wednesday, June 19, 2013
 
 

Answers To Your Questions

Latest Q&A with Pujya Bapuji
Search For Answers Minimize
Search

 गुरुदेव दीक्षा के बाद जीवन की दिशा और दशा दोनों बदल गई, और आपका ज्ञान सुनते-सुनते सत्संग, पूनम दर्शन करते-करते ये समझ में आया के जो कुछ भी है अपने भीतर ही है, कुछ-कुछ समझ में आया| परन्तु कोई प्रॉब्लम क्रिएट होती है तो बार-बार चिन्तन उसी का होता है| स्तिथि कैसे हो? समता कैसे बनी रहे? ऐसा लगे कि  मतलब कोई बहुत  बड़ी दुर्घटना हो जाए कुछ हो जाये तो भी स्तिथि  वैसे ही रहे चिंतन उधर का न हो क्योंकि आपने बताया कि जड़भरत जैसे को भी जब हिरन का चिन्तन करने से दुर्गति हो गई तो हमारा क्या होगा ?

 


 

नही-नही दुर्गति हुई तो थोड़े दिन के लिए हुई लेकिन चिन्तन का फायदा मिला, दूसरे  जन्म में हिरन के बाद फिर वो महापुरुष भी तो बन गये, इसलिए डरने की बात नही है, चिन्तन होता है तो होता है| चक्की चले तो चालन दे, तू  काहे को रोये, लगा रहे तू  कील से, तो बाल न बांका होए|

चिन्तन इधर उधर होता है लेकिन चिन्तन हो हो के बदल जाता है, फिर भी जो नही बदलता वो मैं आत्मा हूँ, प्रभु का हूँ, प्रभु मेरे हैं| तो चिन्तन कैसा भी हो, ज्ञानी का चिन्तन कैसा भी हो तब भी  उसकी मुक्ति  हैं , वो जड़भरत तो साधक थे, राज वैभव भोगे हुए थे, और ये थोड़ी देर के लिए चले गये हिरन शरीर में तो तब भी एकादशी को चारा नही चुगते थे|

मैं बरेली गया, बरेली के पास उझानी है, नया आश्रम का उद्घाटन  किया , जहाँ मैं   रहता  हूँ, सुबह घूमने  जाता हूँ, तो खेत खलियों में घूमने गया तो वहां के  गरीबो को देखा तो मिट्टी के घर|  दूसरे दिन मैं प्रसाद उन गरीबो में बांटा,  तो उस गरीब बस्ती में कुत्ते थे तीन  दो को दूँ तो झट से खा लें , तीसरे को दूँ मेरे सामने देखे पूंछ हिलाए, खाए नही, और कुत्ता पहचाने ऐसी चीज दिया, मिठाई तो पहचानते हैं, सूंघते हैं और भी जो कुछ  दुसरे कुत्ते खाते थे ये खाली सिर  झुकाए मेरे सामने देखे और पूंछ हिलाए, तो मेरे को तो और कुछ  जिज्ञासा हुई कि ये खाता क्यों नही? प्रेम से देखता है,देता हूँ तो पूंछ भी हिलाता हैं,लेकिन खाता नही, तो मैंने उस  झुग्गी वालों  से पूछा जो लेबर थे, गरीब जो ,  उझानी  में, बरेली से  ६३ किलोमीटर , मैंने कहा ये कुत्ता खाता क्यों नही? बोले बाबा आज मंगलवार है क्या?  मैं कहा - है तो मंगलवार , बोले  मंगल का ये व्रत रखता है| लो, वो कैलेंडर नही देखता, कोई तिथि  तारीख उसे पता नही और उसको उसके मालिक को पता नही कि आज मंगलवार है लेकिन वो कुत्ते को पता है आज मंगलवार है|  

तो किसी   जन्म में मंगलवार का व्रत रखा होगा, और कुत्ते के चिन्तन से कुत्ता हुआ होगा, फिर भी मंगलवार का व्रत, बापू का प्रसाद मिलता है तभी भी उसका मंगलवार का व्रत अंतर आत्मा चलाता है ये भी तो रक्षक भगवान की कृपा हैं न| फिर काहे सोचे काहे घबराए, ऐसा हो जाता हैं , ऐसा डरो ही मत| हमारे भगवान हितैषी है, मंगलकारी हैं| 

 

 


प्रॉब्लम आये तो समता नही बनी रहती


 

Copyright 2013 by Shri Yoga Vedanta Ashram. All rights reserved. Terms Of Use Privacy Statement