जब साधन-भजन के लिए बैठते है तो मन शांत हो जाता है, न प्रार्थना, न बातें और ना ही मन में कोई भाव उठता है तो क्या करें ?
कुछ करने के झंझट से बाहर हो जाओ, जो प्रभु तेरी मर्जी | बातें करके भी क्या करोगे | बातें करते-कराते जो अच्छी बातें हो तो भगवान में शांत हो जाओ, संकल्प रहित हो जाओ | वो तो आ गई तो फिर बातें करने के झंझट को क्यों बुलाते हो | मेरे से मानसिक बातें करोगे तो इतना खुश नहीं होऊगा जितना उस भगवान में शांत हो जाओ तो मैं खुश हो जाऊँगा | शराबी दूसरे शराबी को देख के खुश हो जाता है ऐसे ही भगवान में स्थित होने लगोगे तो मुझे प्रसन्नता होगी | न बाहर से मिलने की कोशिश करो, न बातें करने की कोशिश करों.. जो हो रहा है उसी में आगे बढ़ो | ईश्वर की ओर पुस्तक पढ़ते-पढ़ते, नारायण स्तुति पुस्तक पढ़ते-पढ़ते भगवान के स्वभाव में डूबते जाओ |
जब साधन-भजन के लिए बैठते है तो मन शांत हो जाता है, न प्रार्थना, न बातें और ना ही मन में कोई भाव उठता है तो क्या करें ?