This Miracle occurred due to Bapuji’s Prasada
Ashram India

This Miracle occurred due to Bapuji’s Prasada

Ashram spokesperson Ms. Neelam Dubey who has been availing herself of the benefits of satsang showers from Bapuji since 2003 shares some life turning moments.

How did the tumour disappear in four days?

This incident dates back to 2004-05. One day my husband reported that he was suffering from vertigo. He said, “I am feeling that half of my body is getting paralysed” and his voice was becoming faint. I took him to one of the major hospitals. Doctors carried out investigations and diagnosed a deep seated lump in the brain. It may be a tumour or may be of T.B which will only be confirmed later on but this is something serious and anything can happen.”

I was very upset as my elder son was very young and my mother-in-law was aged. I admitted my husband to a big hospital. He was not able to walk and was in a stupor induced by a heavy dose of medicine. Bapuji was delivering a Satsang discourse live on TV which was on in the ward room. My son shouted, “Mumma!! Bapuji…” My husband asked, “What is on the TV?”

I replied “Satsang in Noida.”

“You are a journalist; can you make some arrangement so that I can go and meet Bapuji?”
“I myself have not met Him; how can I arrange for you to meet Him? But I shall try.” I replied.

The scroll displayed the contact number of the satsang place. I dialed the number and narrated the problem to the gentleman of the ashram who replied, “Come to the satsang place.”

Then I consulted Doctors. They said that his life is uncertain, so try to fulfill his wish. I will reduce the dose of medicine and he will be in a position to go along with you. Get him re-admitted tomorrow.”

I took my husband to the place of Satsang. I spoke to the organiser and he arranged for my husband’s meeting with Bapuji. Bapuji said, “Why do you worry; everything will be alright in four days. Take this book of ‘Yuvadhan Suraksha (Divya Prerna Prakash)’ and read it.” Then He gave Prasad to my husband.

That day; I read the book to him. The next day when we arrived at the hospital the doctors investigated him again. All of them were surprised. They said, “How is it possible?” There was a big tumour visible in the MRI scan done just few days ago. It disappeared after four days.

I said, “He became well by having Guru’s darshan through His grace.”
The doctor said, “This is truly a miracle; I have never seen such an incident in my career of 21 years as a medical professional.” 

Since then, my husband is well.

This Miracle occurred due to Bapuji’s Prasada

My first son was born in December 2003 by caesarean operation. I was hospitalized for a week and then took complete bed rest at home for three months as advised by doctors. Bapuji mentioned many times in His Satsang that one should not have caesarean operation, it’s very harmful. I was not aware of this fact.

In 2011, I was expecting my second baby. Bapuji was in Delhi, so he asked about me and guided about care in food and drink. I was under the care of an eminent gynecologist in Delhi. She said that my height is less and the weight of the baby has grown to around 3.5 kg. The weight of the baby is more and secondly; the first baby was delivered by caesarean, so the second baby must be delivered by caesarean section. The possibility of normal delivery is 00.1%. Your life may be at risk.
Bapuji was in Delhi on 17th March 2011 on occasion of Holi. I told everything to Him. He said, “Delivery will be normal.  Don’t worry and don’t be frightened. Go for normal delivery; leave the rest to God.” Bapuji gave me some Prasad and sprinkled Palash coloured water of Holi on me.
On March 29th, I was taken to hospital around 9:30 AM. I narrated the resolution of Pujya Bapuji to the doctor.

The doctor said, “If this is the resolution of your Guruji, your wish and the wish of your family; I shall try to cooperate to the best of my abilities.”

My husband brought the extract of fresh cow dung from the Delhi ashram. After taking it, my body started feeling some movement and in the next half an hour, the baby boy was born. Doctor was very surprised and happy. He said, “First, it is a normal delivery; and also so fast. We did not expect this. We were thinking that it would take at least until tonight. This is a miracle!!”

I thought, “This is the miracle caused by Bapuji’s Prasad.”

Another lady was admitted who was more than 5.5" tall and was hospitalised for around 48 hrs. Even then, the delivery did not take place and preparations for caesarean section were being made. 
I was discharged the same day after delivery. The next day I drove myself to hospital to have my baby vaccinated. 

After my first delivery, I was bedridden for 3-4 months whereas in the second delivery I took just 3-4 hours of rest. I notice that my elder son who was born by caesarean does not strive to obtain anything whereas the younger one is a go getter. 

Pujya Bapuji always encourages normal delivery. This is for our good, the good of our children and also the nation.


पूज्य बापूजी के प्रेरक जीवन-प्रसंग

मीडिया प्रवक्ता नीलम दुबे
, जिन्हें सन् 2003 से पूज्य बापूजी का सत्संग-सान्निध्य प्राप्त होता रहा है, उनके द्वारा बताये गये पूज्यश्री के कुछ जीवन-प्रसंग :

4 दिन में ट्यूमर की गाँठ कहाँ गयी ?

सन् 2004-05 की बात है । एक दिन मेरे पतिदेव को दौरा पड़ा । वे बोले : ‘‘मेरे को एक साइड जाती हुई-सी लग रही है ।’’ और उनकी आवाज भी धुँधली हो रही थी । मैं उनको एक बड़े अस्पताल में ले गयी । डॉक्टरों की टीम ने जाँचें करके बताया : ‘‘इनके ब्रेन में ट्यूमर है या टी.बी. है यह पूरा कन्फर्म नहीं हो रहा लेकिन यह गम्भीर परेशानी है । कुछ भी हो सकता है ।’’
मैं बड़ी परेशान थी क्योंकि उस समय मेरा बेटा छोटा था और सासु माँ बुजुर्ग ! मैंने उन्हें भर्ती कर दिया । दवाइयाँ ऐसी थीं कि उन्हें लेने से वे नशे में ही रहते थे, चल नहीं पाते थे । वार्ड में टीवी चैनल पर बापूजी का सत्संग आ रहा था । मेरे बेटे ने जोर-से बोला : ‘‘माँ ! बापूजी...’’ तो मेरे पतिदेव ने पूछा : ‘‘क्या लिखा है ?’’
मैंने कहा : ‘‘नोयडा में सत्संग है ।’’ 
‘‘तू तो जर्नलिस्ट है । तू मुझे बापूजी से मिलवा नहीं सकती ?’’
‘‘मैं तो कभी खुद नहीं मिली हूँ, आपको कैसे मिलवाऊँ ! फिर भी कोशिश करूँगी ।’’
पट्टी में सम्पर्क नम्बर लिखा था । मैंने वह नम्बर लगाकर सारी बात बतायी तो आश्रम के वे सज्जन बोले : ‘‘आप सत्संग-स्थल पर आ जाइये ।’’
फिर मैंने डॉक्टर से बात की । डॉक्टर बोले : ‘‘आपके पति का जीवन अनिश्चित है । अतः उनकी इच्छा पूरी कीजिये । मैं दवा की मात्रा कम कर देता हूँ जिससे ये चल सकेंगे । कल वापस भर्ती कर दीजियेगा ।’’
मैं पतिदेव को सत्संग-स्थल पर ले गयी । जिनसे बात हुई थी उन सज्जन ने बापूजी के पास मेरे पति को पहुँचाया । पूज्यश्री बोले : ‘‘क्या चिंता करता है ! 4 दिन में सब ठीक हो जायेगा । यह ले ‘युवाधन सुरक्षा (दिव्य प्रेरणा-प्रकाश)’ पुस्तक, इसे पढ़ना ।’’ फिर प्रसाद भी दिया ।
उस दिन मैंने पुस्तक पढ़कर सुनायी । अगले दिन जब हम अस्पताल पहुँचे और उनकी फिर से जाँचें हुईं तो सभी डॉक्टर हैरान रह गये ! बोले : ‘‘यह कैसे हो सकता है ?’’ जब एम.आर.आई. हुई थी तो इनके ब्रेन में एक बड़ा ट्यूमर-सा दिखा था । 4 दिन बाद वह गायब हो गया ।
मैंने कहा : ‘‘गुरुकृपा व गुरुदर्शन से सब ठीक हो गया ।’’
डॉक्टर ने कहा : ‘‘यह तो सच में चमत्कार है । मैंने आज तक अपने 21 साल के प्रोफेशनल करियर में ऐसा नहीं देखा ।’’
तब से आज तक मेरे पति बिल्कुल ठीक हैं ।

यह चमत्कार बापूजी के प्रसाद का है

दिसम्बर 2003 में मुझे पहला बेटा सिजेरियन ऑपरेशन से हुआ था । तब मुझे एक सप्ताह अस्पताल में रहने के बाद डॉक्टर की हिदायत पर घर में 3 महीने तक बिस्तर पर आराम करना पड़ा था । बापूजी ने सत्संग में कई बार बताया है कि ‘सिजेरियन ऑपरेशन नहीं कराना चाहिए, बहुत नुकसानदायक है ।’ परंतु उस समय तक मुझे इस बात की जानकारी नहीं थी ।
2011 में मेरे को दूसरा बच्चा होने को था । बापूजी दिल्ली में रुके हुए थे तो पूज्यश्री ने मुझसे जानकारी ली और खान-पान आदि की सावधानी बतायी । उसके बाद मैं दिल्ली की एक बड़ी डॉक्टर से मिली । उन्होंने कहा : ‘‘तुम्हारी लम्बाई बहुत कम है और तुम्हारा बच्चा 3.5 किलो का हो चुका है, ज्यादा वजन है एवं पहला बच्चा ऑपरेशन से हुआ है तो इन सब कारणों से दूसरा बच्चा भी सिजेरियन से ही होगा । सामान्य प्रसूति की सम्भावना 99.9% है ही नहीं । तुम्हारी जान को खतरा हो सकता है ।’’
17 मार्च को होली-कार्यक्रम के निमित्त बापूजी दिल्ली पधारे । मैंने पूज्यश्री को सारी बात बतायी । बापूजी बोले : ‘‘सामान्य प्रसूति ही होगी । मैं कह रहा हूँ और तुम चिंता नहीं करो, डरो भी नहीं । सामान्य प्रसूति के लिए तुम कोशिश करना और सब भगवान पर छोड़ देना ।’’ फिर बापूजी ने मुझे प्रसाद दिया और पलाश का रंग मेरे ऊपर छिड़का ।
फिर 29 मार्च को सुबह 9.30 बजे मुझे अस्पताल ले जाया गया । वहाँ के डॉक्टर को मैंने कहा : ‘‘मेरे गुरुजी का यह संकल्प है...’’
डॉक्टर ने कहा : ‘‘अगर तुम्हारे गुरुजी का संकल्प है और आपकी तथा आपके परिवारवालों की इच्छा है तो मैं आपका पूरा सहयोग करूँगी ।’’
फिर मेरे पतिदेव ने दिल्ली आश्रम से गाय के गोबर का रस मँगवाया । रस पीने के कुछ देर बाद मेरे शरीर में कुछ हलचल शुरू हो गयी और लगभग आधे घंटे में ही बेटे का जन्म हो गया । डॉक्टर बहुत खुश हुए कि ‘‘एक तो नॉर्मल डिलीवरी और वह भी इतनी जल्दी ! हमें तो उम्मीद ही नहीं थी । हम सोच रहे थे कि रातभर का समय जायेगा । यह तो चमत्कार है !’’
मैंने सोचा : ‘यह चमत्कार बापूजी के प्रसाद का है ।’
मेरी बगल में एक महिला थी जिसकी लम्बाई लगभग 5.5 फीट थी । उसे 48 घंटे हो गये थे पर बच्चा नहीं हुआ था । उसकी सिजेरियन की तैयारी हो रही थी ।
मैं प्रसूति के बाद उसी रात अस्पताल से घर वापस आ गयी । अगले दिन मुझे बच्चे को इंजेक्शन लगवाने जाना था तो मैं खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल गयी ।
पहला बेटा हुआ तो 3 महीने बिस्तर पर रहना पड़ा और दूसरा बेटा हुआ तो केवल 3-4 घंटे ही बिस्तर पर आराम किया । मैं देखती हूँ कि मेरा बड़ा बेटा जो सिजेरियन से हुआ था वह किसी भी चीज को विशेष प्रयास करके नहीं प्राप्त करना चाहता और छोटावाला बहुत ज्यादा यत्नशील है ।
पूज्य बापूजी सामान्य प्रसूति के लिए हमेशा कहते हैं । इसीमें हमारा, बच्चों का तथा देश का कल्याण है । 

ऋषि प्रसाद - अंक - 288, दिसम्बर 2016

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