Bapuji’s Ashram is the abode of God
Ashram India

Bapuji’s Ashram is the abode of God

पूज्य बापूजी के जीवन-प्रसंग

दाहोद (गुज.) जिले के बरोड गाँव के निवासी मोहनभाई प्रजापति सन् 1999 से पूज्य बापूजी के सत्संग-सान्निध्य का लाभ लेते रहे हैं । अपने जीवन का एक अनुभव बताते हुए वे कहते हैं :

पहले मैं रिक्शे से आजीविका चलाता  था और गुटखा, बीड़ी, सिगरेट, दारू, मांस सेवन आदि व्यसनों में डूबा रहता था । एक दिन भी दारू के बिना नहीं रहता था । घर में खूब लड़ाई-झगड़ा करता था ।

एक बार हमारे गाँव के पास में पूज्य बापूजी का सत्संग था । मैं अपने रिक्शा से कुछ लोगों को वहाँ छोड़ने जा रहा था तो वे लोग मुझसे बोले कि ‘‘आप भी दीक्षा ले लो ।’’ मैंने कहा : ‘‘मुझसे भक्ति-वक्ति नहीं होगी, मैं दारू-मांस के बिना नहीं रह पाता हूँ ।’’

नूरानी नजर और प्रसाद का असर

मैं जब पूज्यश्री के निवास-स्थान पर पहुँचा तो बापूजी कुर्सी पर बैठे सत्संग कर रहे थे । मैंने सोचा, ‘अब आया हूँ तो प्रणाम तो कर लूँ ।’ दूर से ही हाथ जोड़कर राम-राम किया तो बापूजी ने मुझे अपने पास बुलाया और एक क्षण मेरी तरफ देखा तथा काली द्राक्ष दी प्रसादरूप में । जैसे ही मेरे ऊपर उनकी दृष्टि पड़ी वैसे ही मेरे विचार बदल गये । मन में खूब शांति और आनंद आने लगा । मैंने प्रसाद खा लिया ।

उसके बाद जब मैं दारू पीता तो रात को बापूजी सपने में आते और गुस्सा करते कि ‘‘तू दारू पीता है ! खबरदार !!’’ अनोखा तरीका देखा मैंने किसीको सुधारने का ! न मैं उनका शिष्य था न शराब छुड़ाने की प्रार्थना की थी और न मैं चाहता था कि मेरी शराब छूटे । पर उस दिन मैंने प्रत्यक्ष देखा कि संत बिना किसी कारण के सबका हित करते हैं । जो एक बार उनके पास आ जाता है उसका वे किसी-न-किसी निमित्त से कल्याण कर ही देते हैं !

बापूजी का आश्रम तो भगवान का धाम है !

जब गुरुपूनम आयी तो मैं अहमदाबाद आश्रम पहुँचा । वहाँ का नजारा देखकर मैं दंग रह गया । वहाँ लाखों लोगों की भीड़ थी । जिधर देखूँ उधर लोग ‘हरि ॐ, हरि ॐ’ बोल रहे थे ! मुझे लगा, ‘अरे, यह तो भगवान का धाम है !’ मुझे वहाँ ‘ऋषि प्रसाद’ और ‘लोक कल्याण सेतु’ मिल गये । मैंने पढ़ा तो अच्छा लगा । बापूजी का एक श्रीचित्र खरीदा और घर लाकर पूजा करने लगा । मैं बापूजी को मन-ही-मन गुरु मानने लगा ।

अब दारू के व्यसन का जोर और भी घटने लगा लेकिन कभी पुरानी आदत जोर मारती और दारू घर में लाकर रखता तो जैसे ही सुबह बापूजी की तस्वीर के आगे अगरबत्ती करने जाता, बापूजी तस्वीर में से बड़ी-बड़ी आँखें दिखाते, नाराज होते ! मैंने जीवन में ऐसा चमत्कार न कभी देखा था न सुना था । मैंने अनुभव किया कि बापूजी बहुत महान संत हैं और मैंने निश्चय कर लिया कि ‘मैं इन्हींसे मंत्रदीक्षा लूँगा ।’

मन में खुशी और घर में खुशहाली छा गयी

कुछ समय बाद पूज्यश्री गोधरा पधारे तो मैंने वहाँ दीक्षा ले ली और पूनम-दर्शन का व्रत ले लिया । जब पूर्णिमा आती उस समय कोई बड़ा-सा काम मिल जाता और दर्शन के लिए आने-जाने हेतु मेरे पास पैसे अपने-आप आ जाते । दीक्षा के बाद घर में खुशहाली और मन में प्रसन्नता आने लगी । मेरा 5 लाख रुपये का कर्ज भी उतर गया । खुद का घर बनवा लिया और जमीन, गाड़ी आदि ले ली तथा घर के झगड़े भी खत्म हो गये ।

अब मुझे पूज्य बापूजी के सत्संग-ज्ञान के प्रचार की एवं अन्य जो भी सेवा मिले वह कर लेता हूँ ।

बापूजी ही मेरे भगवान हैं । मैंने अपने जीवन में बापूजी जैसे दूसरे कोई संत नहीं देखे । अगर मुझे पूज्यश्री नहीं मिलते तो मैं अब तक तो नशे के कारण मर जाता । बापूजी ने मुझ जैसे शराबी का जीवन कितना उन्नत कर दिया ! अब एक ही इच्छा है कि पूज्य गुरुदेव के ज्ञान को पा लूँ और मेरी पूरी जिंदगी गुरुदेव की सेवा का लाभ लेते-लेते बीते ।

मेरा घर आदिवासी इलाके में है पर पूरे गाँव में ‘हरि ॐ, हरि ॐ’ गूँजता रहता है । गाँव के लोग इज्जत भी करने लगे हैं लेकिन मैं जानता हूँ कि यह इज्जत मेरी नहीं, गुरुकृपा की है । मुझे बापूजी नहीं मिलते और उनकी कृपा से मेरा जीवन सँवरा नहीं होता तो समाज में शराबी की इज्जत ही क्या होती है !

जितने महान उतने सरल

एक बार बापूजी लिमड़ी (जि. दाहोद, गुज.) पधारे थे । वहाँ पूज्यश्री सुबह घूमने के लिए निकले । रास्ते में एक घर आया । बापूजी वहाँ रुके और उसमें रहनेवाले आदिवासी का हालचाल पूछा । वह तो दंग रह गया, बोला : ‘‘आप इतने बड़े संत और मेरे घर पर !’’

बापूजी बोले : ‘‘वह सब ठीक है, अब यह लो प्रसाद ।’’

पूज्यश्री प्रसाद देने लगे तो वह व्यक्ति सिकुड़ते हुए बोला : ‘‘बापूजी ! हम तो गरीब हैं, बहुत दुःखी हैं, रोगों से पीड़ित हैं ।’’

पूज्यश्री : ‘‘सब ठीक हो जायेगा, यह प्रसाद लो ।’’

कुछ दिन बाद उसकी सारी समस्याएँ दूर हो गयीं । जब दोबारा बापूजी वहाँ पधारे तो अन्य लोगों ने भी बताया कि ‘हमको पिछली बार प्रसाद मिला तो हमारे रोग-शोक मिट गये, घर में सुख-समृद्धि आ गयी ।’ सड़क पर जितने लोग खड़े रहते थे, गुरुदेव सबको अपने हाथों से प्रसाद देते थे । जितने महान हैं उतने ही सरल हैं बापूजी !

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Life Incidents of Pujya Bapuji

Mohan Bhai Prajapati, a resident of Barod village (Dahod district), Gujarat has been availing himself of the benefits of Bapuji’s satsang and proximity since 1999. Narrating an experience from his life, he says: “Earlier, I earned my livelihood as an auto-rickshaw driver. My economic status was very poor and I was badly addicted to Gutkha (a preparation of crushed betel nut, tobacco, catechu, paraffin, slaked lime and savory flavorings), biri, cigarettes, alcohol, meat, etc. I could not go a day without boozing. I quarreled and clashed bitterly in my house.

When Pujya Bapuji’s satsang was held in the vicinity of my village, I was ferrying some people to the Satsang venue. They said, “You take Mantra Diksha from Pujya Bapuji.” I replied, “I would not be able to practice Bhakti because I cannot live without drinking and meat eating.”

The magical effect of His gracious glance and Prasad!

When I arrived at the residence of Pujyashri, he was sitting on a chair and giving satsang. I thought to myself: “Since I have come here anyway, I will just bow and offer my salutations to Him.” I joined my hands from a distance as a gesture to offer salutations to Him, Pujya Bapuji called me to go near him. Bapuji gave me blackcurrants as Prasad. As soon as His glance rested on me, my thoughts were changed. I felt deep peace and bliss in my mind. I ate the Prasad.

After that, whenever I consumed alcohol, Pujya Bapuji appeared in my dreams at night and reprimanded: “Are you drinking? Beware!” I was really astonished to experience this unique technique to reform someone. Neither was I his disciple nor did I ever pray to him to help me abstain from alcohol, nor did I want to abstain from alcohol. But on that day, I personally experienced that saints do good to others, without any motive. He does emancipate people, by any means, who come near him once.

Bapujis Ashram is the abode of God

I visited Ahmedabad Ashram on the day of guru Purnima. I was surprised on seeing the scene there. The Ashram was thronged by lakhs of devotees. The chants of ‘Hari Om’ were reverberating in every corner of the Ashram. I thought to myself: “This is indeed the abode of God.” I got some copies of ‘Rishi Prasad’ and ‘Lok Kalyan Setu’. I felt very happy reading the spiritual magazines published by the Ashram and also purchased a Photograph of Pujya Bapuji, placed it in my home and started worshipping Him. I started believing Bapuji as my Guru in my mind.

Now the addiction and craving for alcohol reduced more and more but at certain times, when my old habit overpowered me and I bought liquor and kept it in my house, then as soon as I went to burn incense sticks in front of Bapuji’s photo in the morning, he would widen his eyes angrily in the photo and was displeased with me. I had never seen or heard of such a miracle before in my life. I concluded that Bapuji is indeed a great Saint and I resolved to take Mantra Diksha from Pujya Bapuji!

Joy filled my mind and happiness my Home

Pujyashri came to Godhra after some days and I took Mantra Diksha and also took a vow of Poonam Darshan (a vow not to take food or water before having Bapuji’s darshan on every full moon day). It was the great blessing of Param Pujya Bapuji that during days close to full moon day, I would get good business in my occupation and could manage to save money for travel expenses to attend the Poonam Darshan.
After taking Mantra Diksha, I felt that my house was filled with happiness and my mind with cheerfulness. I repaid a debt of 5 lakh rupees. We also managed to buy our own house, some land and a car etc., and the family strife stopped completely.

Now whenever I get a chance, I seize the opportunity to do sewa works of spreading the divine knowledge imparted through satsang by Param Pujya Bapuji or any other service.

“Pujya Bapuji’ is the only ‘God’ for me. Never in my life have I seen any other Saint who is as great as Pujya Bapuji. Had I not obtained the grace of Pujya Bapuji, I would have probably died due to alcoholism. Bapuji has uplifted an alcoholic like me to such a great level. Now, my only wish is to imbibe the knowledge Bapuji has been imparting and devote my whole life to His service.”

“My house is located in a tribal area, but there is a constant chanting of ‘Hariom Hariom’ in the entire village. People have started respecting me but I know that they respect my Guru’s grace, not me. Had not I met Pujya Bapuji, my life would not have been reformed, and how much respect is given to a drunkard?”

Bapuji is equally great and humble

Bapuji once come to Limdi (district Dahod). He went for a stroll in the morning and stopped near a hut and asked the resident, a tribal, about his wellbeing. He was astonished at this surprise visit. He said, “Being such a great saint, you have come to my home!”

Pujya Bapuji said, “That is ok. Now take this Prasad.”

When Pujyashri handed out the Prasad, the person shrank and said, “Bapuji! We are poor. We are very unhappy and disease-stricken.”

Pujya Bapuji said, “All will be well. Take this Prasad.”

After some days, the person was freed from all his problems. When Pujya Bapuji returned, other people started saying, ‘Bapuji, with the Prasad which was given to us the previous time, all our miseries, disease, grief and have vanished. The house has also become very prosperous and happy.’ Bapuji would distribute Prasad to each and every person standing on the road. Bapuji is equally great and humble.”


[Rishi prasad Issue300]

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