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Rishi Prasad Articles
  
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पूज्य बापू जी को बदनाम करने का सुनियोजित षड्यन्त्र

यतो धर्मः ततो जयः। यतो धर्मः ततो अभ्युदयः। जब संत ही नहीं रहेंगे तो जीवन ही दिशाहीन हो जायेगा। संत न होते तो जगत में, तो जल मरता संसार। ब्रह्मज्ञानी ...
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बापू जी के साधकों के ऊपर भी हुआ घोर अत्याचार

शिवाभाई से पुलिस रिमांड के बल पर कोरे कागज पर हस्ताक्षर करवाये गये। ऐसा करने के लिए पुलिस पर कितना प्रभाव-दबाव रहा होगा ! शिवाभाई के साथ बेरहमी से मा...
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दुःख को उत्सव बनाने की कला

जैसे पानी के ऊपर की काई हटा देने से पानी दिखता है, ऐसे ही सुख का लालच हटाने से सुख का, मधुमय आनंद का दरिया लहराने लगेगा। दुःख के भय से आप भयभीत न हों...
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तौबा-तौबा ! कैसी दुःखदायी है ममता !

नर-नारियों के रूप में, पक्षियों के रूप में, पशुओं के रूप में सब जगह चेतना उस परमेश्वर की है। हे हरि ! हे नारायण ! हे प्रभु ! बस भगवान का ज्ञान, भगवान...
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वह अधीनता जिससे परम स्वाधीनता

पक्का कर लो कि ʹअब हम ईश्वरमय जीवन जियेंगे, गुरु की आज्ञा के अनुरूप चलेंगे।ʹ गुरु की आज्ञा, ईश्वर की आज्ञा, शास्त्र की आज्ञा दिखती तो शुरुआत में अधीन...
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घर के झगड़ों को कैसे बदलें प्रेम में ?

संघर्ष में, एक दूसरे की निंदा में, एक दूसरे की गलतियाँ खोजने में, एक दूसरे पर आरोप थोपने में हमारी शक्तियों का जितना ह्रास होता है और योग्यताएँ कुठित...
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स्वास्थ्य व पर्यावरण सुरक्षा का अमोघ उपायः गाय का घी

अग्नि में गाय के घी की आहुति देने से उसका धुआँ जहाँ तक फैलता है, वहाँ तक सारा वातावरण प्रदूषण और आण्विक विकिरणों से मुक्त हो जाता है। मात्र 1 चम्मच ग...
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इष्ठनिष्ठा, दृढ़ता व आत्मविश्रांति से सफलता

तब बुद्धिमान वायुपुत्र ने झट् से अपना शरीर अँगूठे जितना बनाया और तीव्र वेग से सुरसा के मुँह में प्रवेश कर बाहर निकल आये। वे सुरसा से बोलेः "नागमाता !...
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गर्मियों में क्या करें, क्या न करें ?

गर्मियों में क्या करें, क्या न करें ?
इस ऋतु में वात का शमन करने वाले तथा शरीर में जलीय अंश का संतुलन रखने वाले मधुर, तरल, सुपाच्य, हलके, ताजे, स्निग्ध, रसयुक्त, शीत-गुणयुक्त पौष्टिक पदार्थों का सेवन करना चाहिए।
आहारः पुराने साठी के चावल, दूध, मक्खन तथा गाय के घी के सेवन से शरीर में शीतलता, स्फूर्ति और शक्ति आती है। सब्जियों में लौकी, कुम्हड़ा(पेठा), परवल, हरी ककड़ी, हरा धनिया, पुदीना और फलों में तरबूज, खरबूजा, नारियल, आम, मौसमी, सेब, अनार, अंगूर का सेवन लाभदायी है।
नमकीन, रूखे, बासी, तेज मिर्च-मसालेदार तथा तले हुए पदार्थ, अमचूर, अचार इमली आदि तीखे, खट्टे, कसैले एवं कड़वे रसवाले पदार्थ न खायें।
कच्चे आम को भूनकर बनाया गया मीठा पना, नींबू-मिश्री का शरबत, हरे नारियल का पानी, फलों का ताजा रस, ठंडाई, जीरे की शिकंजी, दूध और चावल की खीर, गुलकंद तथा गुलाब, पलाश, मोगरा आदि शीतल व सुगंधित द्रव्यों का शरबत जलीय अंश के संतुलन में सहायक हैं।
धूप की गर्मी व लू से बचने के लिए सिर पर कपड़ा रखना चाहिए एवं थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहना चाहिए। उष्ण वातावरण से ठंडे वातावरण में आने के बाद तुरंत पानी न पियें, 10-15 मिनट के बाद ही पियें। फ्रिज का नहीं, मटके या सुराही का पानी पियें।
विहारः इस ऋतु में प्रातः पानी प्रयोग अवश्य करना चाहिए। वायु-सेवन, योगासन, हलका व्यायाम एवं तेल मालिश लाभदायक है।
रात को देर तक जागना और सुबह देर तक सोये रहना त्याग दें। अधिक व्यायाम, अधिक परिश्रम, धूम में टहलना, अधिक उपवास, भूख प्यास सहना तथा स्त्री-सहवास – ये सभी इस ऋतु में वर्जित हैं।
गर्मियों के लिए सरल प्रयोगः
अम्लपित्त शांत करने के लिए-
जौ, गेहूँ या चावल का सत्तू मिश्री के साथ खायें।
भोजन के बाद आँवले का रस पियें।
शहद, केला, अदरक, धनिया आदि सेवनीय हैं।
रात को 3 से 5 ग्राम त्रिफला चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लें।
घमौरियाँ ठीक करने के लिए
घमौरियों पर मुलतानी मिट्टी का लेप करने अथवा गाय का गोबर मलने से ठंडक मिलती है था चुभन व खुजली मिटती है।
घमौरियों पर राख मलें।
नकसीर का इलाज-
दूर्वा और आँवला ठंडे पानी में पीसकर मस्तक पर लेप करने पर नाक से खून गिरना बंद होता है।
प्याज का रस  नाक में डालें।
देशी गाय के घी को ठंडे पानी से 7 बार धोकर  मस्तक पर लेप करें।
शरीर की जलन दूर करने के लिएः
जौ के सत्तू में मिश्री मिलाकर खायें।
ठंडा पानी पियें तथा आँवले के पानी में महीन वस्त्र भिगोकर ओढ़ें।
धनिया रात भर ठंडे पानी में भिगो दें। प्रातः घोंट-छानकर मिश्री के साथ पियें।
स्रोतः ऋषि प्रसाद, अप्रैल 2014, पृष्ठ संख्या 30, अंक 256
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