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Rishi Prasad Articles
  
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अपना इरादा पक्का बना लो बस

5 मिनट मन से जप करो, फिर 4-5 मिनट वाणी से करो अथवा 2 मिनट वाणी से, 3 मिनट मन से – ऐसा आधा घंटा रोज करो। फिर त्रिबंध करके 10 प्राणायाम करो, देखो कैसा ...
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गर्भिणी का आहार

आचार्य चरक कहते हैं कि गर्भिणी के आहार का आयोजन तीन बातों को ध्यान में रखते हुए करना चाहिए – गर्भवती के शरीर का पोषण, स्तन्यनिर्मिती की तैयारी व गर्भ...
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गुरुकुलों के शोधकार्यों को मिला अंतर्राष्ट्रीय सम्मान

प्रथम शोधकार्य में शिक्षण को सामान्य विद्यार्थी और शिक्षकों के लिए तनाव व बोझरहित बनाने तथा जिज्ञासा जगाकर रूचिपूर्ण तरीके से पढ़ाने की युक्तियाँ हैं...
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गौपूजन का पर्व-गौपाष्टमी

गायें दूध न देती हों तो भी वे परम उपयोगी हैं। दूध न देने वाली गायों के झरण व गोबर से ही उनके आहार की व्यवस्था हो सकती है। उनका पालन पोषण करने हमें आध...
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जीव-सृष्टि से ही दुःख निकला

वेदांत दर्शन कहता है कि सृष्टि दो प्रकार की है – एक जीव-सृष्टि और दूसरी ईश्वर सृष्टि। पृथ्वी, जलादि पंचभूत, शब्द स्पर्शादि तन्मात्राएँ, इन्द्रियाँ, अ...
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तुलसी महिमा

तुलसी पत्ते से टपकता हुआ जल जो अपने सिर पर धारण करता है, उसे गंगास्नान और 10 गोदान का फल प्राप्त होता है।
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दुनिया में आकर तुमने क्या किया ?

इन कठपुतलियों की भाँति इस संसार में 3 प्रकार के लोग हैं। एक पहली कठपुतली की भाँति हैं, जो एक कान से बात सुनकर दूसरे कान से निकाल देते हैं, सुना-अनसुन...
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मानवमित्र व उत्तम चिकित्सक-भगवान सूर्यनारायण

विश्व के सभी देशों की तुलना में आज भी भारत में जो स्वास्थ्य बरकरार है, वह हमारे देश के दूरद्रष्टा ऋषि-मुनि व संतों द्वारा प्रदत्त प्राकृतिक चिकित्सा ...
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सर्दियों के लिए बल व पुष्टि का खजाना

सर्दियों के लिए बल व पुष्टि का खजाना
रात को भिगोई हुई 1 चम्मच उड़द की दाल सुबह महीन पीसकर उसमें 2 चम्मच शुद्ध शहद मिला के चाटें। 1,1.30 घंटे बाद मिश्रीयुक्त दूध पियें। पूरी सर्दी यह प्रयोग करने से शरीर बलिष्ठ और सुडौल बनता है तथा वीर्य की वृद्धि होती है।
दूध के साथ शतावरी का 2-3 ग्राम चूर्ण लेने से दुबले पतले व्यक्ति, विशेषतः महिलाएँ कुछ ही दिनों में पुष्ट हो जाती हैं। यह चूर्ण स्नायू संस्थान को भी शक्ति देता है।
रात को भिगोई हुई 5-7 खजूर सुबह खाकर दूध पीना या सिंघाड़े का देशी घी में बना हलवा खाना शरीर के लिए पुष्टिकारक है।
रोज रात को सोते समय भुनी हुई सौंफ खाकर पानी पीने से दिमाग तथा आँखों की कमजोरी में लाभ होता है।
आँवला चूर्ण, घी तथा शहद समान मात्रा में मिलाकर रख लें। रोज सुबह एक चम्मच खाने से शरीर के बल, नेत्रज्योति, वीर्य तथा कांति में वृद्धि होती है। हड्डियाँ मजबूत बनती हैं।
100 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण को 20 ग्राम घी में मिलाकर मिट्टी के पात्र में रख दें। सुबह 3 ग्राम चूर्ण दूध के साथ नियमित लेने से कुछ ही दिनों में बल वीर्य की वृद्धि होकर शरीर हृष्ट-पुष्ट बनता है।
शक्तिवर्धक खीरः
3 चम्मच गेहूँ का दलिया व 2 चम्मच खसखस रात को पानी में भिगो दें। प्रातः इसमें दूध और मिश्री डालकर पकायें। आवश्यकतानुसार मात्रा घटा—बढ़ा सकते हैं। यह खीर शक्तिवर्धक है।
हड्डी जोड़ने वाला हलवाः गेहूँ के आटे में गुड़ व 5 ग्राम बला चूर्ण डाल के बनाया गया हलवा (शीरा) खाने से टूटी हुई हड्डी शीघ्र जुड़ जाती है। दर्द में भी आराम होता है।
अपनायें आरोग्यरक्षक शक्तिवर्धक उपाय
सर्दियों में हरी अथवा सूखी मेथी का सेवन करने से 80 प्रकार के वायु रोगों में लाभ होता है।
सब प्रकार के उदर रोगों में मट्ठे और देशी गाय के मूत्र का सेवन अति लाभदायक है।
(गोमूत्र न मिल पाये तो गोझरण अर्क का उपयोग कर सकते हैं।)
भयंकर कमरदर्द और स्लिप्ड डिस्क का अनुभूत प्रयोग
ग्वारपाठे (घृतकुमारी) का छिलका उतारकर गूदे को कुचल के बारीक पीस लें। आवश्यकतानुसार आटा लेकर उसे देशी घी में गुलाबी होने तक सेंक लें। फिर उसमें ग्वारपाठे का गूदा मिलाकर सेंकें। जब घी छूटने लगे तब उसमें पिसी मिश्री मिला के 20-20 ग्राम के लड्डू बना लें। आवश्यकतानुसार तीन-चार सप्ताह तका रोज सुबह खाली पेट एक लड्डू खाते रहने से भयंकर कमरदर्द समाप्त हो जाता है।
सावधानीः देशी ग्वारपाठे का ही उपयोग करें, हाइब्रिड नहीं।
स्रोतः ऋषि प्रसाद, नवम्बर 2014, पृष्ठ संख्या 28, अंक 263
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