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Lok Kalyan Setu in Ordiya

Lokkalyan Article View
एक शूल जो मैं कभी भूल नहीं सका

- एक इतिहासप्रसिध्द चिरंजीवी के हृदय की व्यथा

(गुरु-शिष्य परम्परा का कारुणिक आख्यान)

लंकायुध्द में भगवान श्रीराम को नागपाश में बँधे देखकर गरुड़जी को शंका के कारण अशांति हो गयी । काकभुशुंडिजी ने जब सत्संग देकर उनकी अशांति दूर की तब गरुड़जी ने उनसे प्रश्न कियाः ''हे प्रभो ! आप सब कुछ जाननेवाले हैं, तत्त्व के ज्ञाता, माया से परे, ज्ञान, वैराग्य और विज्ञान के धाम हैं । फिर भी आपने यह काक-शरीर क्यों पाया है?''

काकभुशुंडिजी अपने पूर्वजन्म की कथा बताते हुए बोले - ''हे गरुड़ !...

(शेष भाग पढ़ने हेतु देखें लोक कल्याण सेतु अंक – 179, मई 2012)

 



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  8/19/2013 9:56:00 AM
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