| समस्त पापनाशक स्तोत्र | |
जो मनुष्य पापों का विनाश करने वाले इस स्तोत्र का पठन अथवा श्रवण करता है, वह शरीर, मन और वाणीजनित समस्त पापों से छूट जाता है एवं समस्त पापग्रहों से मुक्त होकर श्रीविष्णु के परम पद को प्राप्त होता है। इसलिए किसी भी पाप के हो जाने पर इस स्तोत्र का जप करें। यह स्तोत्र पापसमूहों के प्रायश्चित के समान है। कृच्छ्र आदि व्रत करने वाले के लिए भी यह श्रेष्ठ है। स्तोत्र-जप और व्रतरूप प्रायश्चित से सम्पूर्ण पाप नष्ट हो जाते हैं। इसलिए भोग और मोक्ष की सिद्धि के लिए इनका अनुष्ठान करना चाहिए।
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| चिंतनिका | जिस साधना में तुम्हारी रुचि होगी उस साधना में ईश्वर मधुरता भर देंगे। |  |
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| संस्कारों का खेल | जीवन में सावधानी नहीं है तो जिससे सुख मिलेगा उसके प्रति राग हो जायेगा और जिससे दुःख मिलेगा उसके प्रति द्वेष हो जायेगा। इससे अनजाने में ही चित्त में संस्कार जमा होते जायेंगे एवं वे ही संस्कार जन्म-मरण का कारण बन जायेंगे। |  |
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| कर्मफल अवश्य ही भोगना पड़ता है | चाहे कोई देखे या न देखे फिर भी कोई है जो हर समय देख रहा है, जिसके पास हमारे पाप-पुण्य सभी देख रहा है, जिसके पास हमारे पाप-पुण्य सभी कर्मों का लेखा-जोखा है। |  |
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| सृष्टि कैसे बनी ? | यह जगत परब्रह्म परमात्मा का विवर्त है। इसमें अंदर-बाहर, स्वर्ग-नरक, अपना-पराया सब दिखते हुए भी तत्त्व में देखो तो ज्यों-का-त्यों ! |  |
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| अपनी डफली अपना राग | आत्मा के प्रमाद से जीव दुःख पाते हैं। आकाश में वन नहीं होता और चन्द्रमा के मंडल में ताप नहीं होता, वैसे ही आत्मा में देह या इन्द्रियाँ कभी नहीं हैं। |  |
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| विश्वगुरु भारत | यदि हम सच्चे सत्यान्वेषी है, यदि हममे ज्ञानप्राप्ति की भावना है और यदि हम ज्ञान का सच्चा मूल्यांकन करना जानते हैं तो हमें इस तथ्य को मानना ही पड़ेगा कि सहस्राब्दियों से पीड़ित-प्रताड़ित एवं जंजीरों में जकड़े हुए भारत में ही हमारा गुरु बनने की पूर्ण क्षमता है, आवश्यकता है केवल सच्चे हृदय से उस क्षमता को पहचानने की। |  |
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| यह कौन-सा मेथड है ? | हिन्दू धर्म कि विशेषता है कि उसकी मंत्रशक्ति, उपासना की पद्धति अपने में महान विशेषताएँ सँजोये हुए हैं। |  |
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| God Realization is Pretty Simple... | (Excerpts from Satsang of Pujya Sant Shri Asaramji Bapu)
Self-Realization becomes very easy for those who consider God
To be the Supreme Reality and endeavour to attain Him. |  |
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