Welcome to Ashram.org | Login | Register
Featured Articles

समस्त पापनाशक स्तोत्र

जो मनुष्य पापों का विनाश करने वाले इस स्तोत्र का पठन अथवा श्रवण करता है, वह शरीर, मन और वाणीजनित समस्त पापों से छूट जाता है एवं समस्त पापग्रहों से मुक्त होकर श्रीविष्णु के परम पद को प्राप्त होता है। इसलिए किसी भी पाप के हो जाने पर इस स्तोत्र का जप करें। यह स्तोत्र पापसमूहों के प्रायश्चित के समान है। कृच्छ्र आदि व्रत करने वाले के लिए भी यह श्रेष्ठ है। स्तोत्र-जप और व्रतरूप प्रायश्चित से सम्पूर्ण पाप नष्ट हो जाते हैं। इसलिए भोग और मोक्ष की सिद्धि के लिए इनका अनुष्ठान करना चाहिए।

 

Uttam Santaan Prapti

 

अपने घर में देख !

Guru Sandesh

नर को बस करिबौ कहाँ नारायण बस होय

Bhakti Bhagirathi

माघ मास का माहात्म्य

माघ मास का माहात्म्य

वे पाप जो प्रायश्चितरहित हैं

शास्त्र प्रसाद

मंत्रदीक्षा व ध्यान के प्रभाव से सफलताएँ

भक्तों के अनुभव

हिन्दू समाज व धर्माचार्यों को बदनाम करने का विश्वव्यापी षड्यंत्

 

निद्रा-विचार

निद्रा-विचार

चिंतनिका

जिस साधना में तुम्हारी रुचि होगी उस साधना में ईश्वर मधुरता भर देंगे।

जहाँ कुमति तहँ बिपति निदाना

जहाँ सुमति तहँ संपत्ति नाना।
जहाँ कुमति तहँ बिपत्ति निदाना।।

संस्कारों का खेल

जीवन में सावधानी नहीं है तो जिससे सुख मिलेगा उसके प्रति राग हो जायेगा और जिससे दुःख मिलेगा उसके प्रति द्वेष हो जायेगा। इससे अनजाने में ही चित्त में संस्कार जमा होते जायेंगे एवं वे ही संस्कार जन्म-मरण का कारण बन जायेंगे।

प्रणाम विनय का सूचक है

'मनुष्य को प्रतिदिन अपने आचरण का अवलोकन करते रहना चाहिए।'

कर्मफल अवश्य ही भोगना पड़ता है

चाहे कोई देखे या न देखे फिर भी कोई है जो हर समय देख रहा है, जिसके पास हमारे पाप-पुण्य सभी देख रहा है, जिसके पास हमारे पाप-पुण्य सभी कर्मों का लेखा-जोखा है।

सृष्टि कैसे बनी ?

यह जगत परब्रह्म परमात्मा का विवर्त है। इसमें अंदर-बाहर, स्वर्ग-नरक, अपना-पराया सब दिखते हुए भी तत्त्व में देखो तो ज्यों-का-त्यों !

अपनी डफली अपना राग

आत्मा के प्रमाद से जीव दुःख पाते हैं। आकाश में वन नहीं होता और चन्द्रमा के मंडल में ताप नहीं होता, वैसे ही आत्मा में देह या इन्द्रियाँ कभी नहीं हैं।

समस्याएँ विकास का साधन हैं

ज्ञान का और जीवन का नजरिया ऊँचा होने से आदमी सभी समस्याओं को पैरों तले कुचलते हुए ऊपर उठ जाता है।

विश्वगुरु भारत

यदि हम सच्चे सत्यान्वेषी है, यदि हममे ज्ञानप्राप्ति की भावना है और यदि हम ज्ञान का सच्चा मूल्यांकन करना जानते हैं तो हमें इस तथ्य को मानना ही पड़ेगा कि सहस्राब्दियों से पीड़ित-प्रताड़ित एवं जंजीरों में जकड़े हुए भारत में ही हमारा गुरु बनने की पूर्ण क्षमता है, आवश्यकता है केवल सच्चे हृदय से उस क्षमता को पहचानने की।

यह कौन-सा मेथड है ?

हिन्दू धर्म कि विशेषता है कि उसकी मंत्रशक्ति, उपासना की पद्धति अपने में महान विशेषताएँ सँजोये हुए हैं।

God Realization is Pretty Simple...

 (Excerpts from Satsang of Pujya Sant Shri Asaramji Bapu)

Self-Realization becomes very easy for those who consider God

To be the Supreme Reality and endeavour to attain Him.

  
Featured Categories
Skip Navigation Links.
Collapse Pregnancy & Child BirthPregnancy & Child Birth
गर्भपात का आँखो...
आदर्श संतान कैस...
अजन्मी बेटी का ...
सिजेरियन ऑपरेशन...
दाम्पत्य प्रेम ...
गृहस्थ का अमृत
गृह स्वामिनी का...
जब सास बन गयी म...
कल्याणकारक सुवर...
मानवी प्रकृति
मासानुसार गर्भि...
नारियों का कितन...
प्रसूता की संभा...
संतान प्राप्ति ...
ठीक नहीं प्रसव ...
How to beget be...
Uttam Santaan P...
Collapse HealthHealth
निद्रा-विचार
कर्मफल अवश्य ही...
श्री आसारामायण ...
Kartik Snaan
Health Care in ...
विश्व वन्दनीय ब...
HeyPrabhu Anand...
Effective Herba...
Daivi Chikitsa
Hyper-acidity
Important Tip o...
Collapse OtherOther
अपने घर में देख...
नर को बस करिबौ ...
माघ मास का माहा...
वे पाप जो प्राय...
मंत्रदीक्षा व ध...
हिन्दू समाज व ध...
सृष्टि कैसे बनी...
अपनी डफली अपना ...
Atma Sakshatkar...
भगवान के दर्शन ...
चिंतनिका
जहाँ कुमति तहँ ...
संस्कारों का खे...
प्रणाम विनय का ...
संत मिलन को जाइ...
Kartik – The Ho...
समस्याएँ विकास ...
विश्वगुरु भारत
यह कौन-सा मेथड ...
Shri Asaramayan
Shrimad Bhagwad...
समस्त पापनाशक स...
आत्म-निष्ठा
Last 3 Days - M...
Benefits of Man...
Special Yog
Collapse English ArticlesEnglish Articles
God Realization...
Know the Self
Self-Realizatio...
The Boon of Sel...
The Ten Guideli...
‘Valentine’s Da...
NEVER FORGET YO...
मातृ-पितृ पूजन ...
How to celebrat...
The Obstacles a...
No Black Magic ...
Swindler Sukkha...
Kartik – The Ho...
How to beget be...
  
Contact Us | Legal Disclaimer | Copyright 2011 by Shri Yoga Vedanta Ashram. All rights reserved.
This site is best viewed with Microsoft Internet Explorer 5.5 or higher under screen resolution 1024 x 768