गौ-महिमा Created by salvation67 on 1/25/2012 4:20:22 AM गोमूत्र का सेवन करते समय ध्यान रखना चाहिए कि गाय देशी हो, जर्सी आदि न हो तथा गर्भवती या रोगी न हो। बछड़ी का गोमूत्र सर्वोत्तम माना जाता है। धोये हुए सफेद वस्त्र की चार या आठ तह बनाकर उससे गोमूत्र छान के बाद में ही प्रयोग करें।
गौ-महिमा
गाय के गोबर तथा गोमूत्र में भी गाय के दूध की तरह कई दिव्य औषधियों गुण छुपे हुए हैं, जिनसे हम सब अनभिज्ञ हैं। ये शरीर से मल, प्रकुपित दोष तथा दूषित पदार्थों को निकालकर शरीर को शुद्ध व स्वस्थ बना देते हैं।
औषधि प्रयोगः
गोमूत्र का सेवन करते समय ध्यान रखना चाहिए कि गाय देशी हो, जर्सी आदि न हो तथा गर्भवती या रोगी न हो। बछड़ी का गोमूत्र सर्वोत्तम माना जाता है। धोये हुए सफेद वस्त्र की चार या आठ तह बनाकर उससे गोमूत्र छान के बाद में ही प्रयोग करें।
मधुमेहः बछड़ी का 15-20 मि.ली. गोमूत्र प्रतिदिन सुबह खाली पेट सेवन करें। (अपनी उम्र के हिसाब से मात्रा कम या ज्यादा करें)।
गले का कैंसरः ब्रश-मंजन से पहले (बासी मुँह) 25-50 मि.ली. गोमूत्र तथा सुपारी के बराबर गाय का ताजा गोबर स्वच्छ वस्त्र से छानकर रोज सुबह चार माह तक लें। यदि गोमूत्र न मिले तो अपनी गौशाला का गोझरण अर्क लें। दी हुई मात्रा में आधा गोझरण अर्क लें। दी हुई मात्रा में आधा गोझरण अर्क आधा पानी मिला दें, पूरी मात्रा हो जायेगी।
पेटदर्दः 20 मि.ली. गोमूत्र में 1 चने जितना हल्दी चूर्ण मिलाकर सुबह शाम लेने से थोड़े ही दिनों में पेटदर्द हमेशा के लिए मिट जाता है। आहार लघु व सुपाच्य लें।
कृमिरोगः 10 मि.ली. गोमूत्र में वायविडंग के 10 दाने कूटकर मिला दें। यह मिश्रण सुबह-शाम पिलाने से चार दिन में ही पेट के कृमि नष्ट हो जाते हैं। मीठे व मैदे के पदार्थ न खायें।
शहद के घरेलू प्रयोग
सूखी खाँसी में- शहद में नींबू का रस समान मात्रा में चाटने से लाभ होता है।
उच्च रक्तचाप में- 1 से 3 लहसुन की कलियाँ शहद के साथ सेवन करना लाभदायी है।
श्वासरोग में- आधा-आधा चम्मच अदरक का रस और शहद मिलाकर चाटने से श्वास की तकलीफ में राहत मिलती है तथा हिचिकयाँ बंद हो जाती हैं।
खाँसी में- आधा चम्मच अदरक के रस या 25-30 अडूसे के पत्तों के आधे कप गुनगुने काढ़े में आधा चम्मच शहद मिला के लेने से आराम होता है। काढ़े व अदरक के रस को मिलाकर भी ले सकते हैं।
उलटी में- 1 चम्मच पुदीने के रस के साथ 1 चम्मच शहद का सेवन लाभकारी है।
सावधानीः गर्मी के दिनों में, अधिक गर्म पानी में, गर्म दूध में, अधिक धूप में शहद का प्रयोग हानिकारक है। साथ ही घी में समान मात्रा में मिलाकर प्रयोग करने पर यह विष की तरह कार्य करने लगता है। अतः इसका प्रयोग सावधानीपूर्वक करना चाहिए।
स्रोतः लोक कल्याण सेतु, दिसम्बर 2011, पृष्ठ संख्या 15, अंक 174
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