

स्टिंग के नाम पर आस्था से खिलवाड़
- कल्कि पीठाधीश्वर श्री प्रमोद कृष्णम् महाराज, अध्यक्ष, अखिल भारतीय संत समिति
दिनांक 10 d 11 सितम्बर 2010 को 'आज तक' टी.वी. चैनल पर दिखाये गये तथाकथित स्टिंग आपरेशन की वास्तविकता उजागर करते हुए 'ए टू जेड' टी.वी. चैनल पर दिये अपने इंटरव्यू में श्री प्रमोद कृष्णम्जी महाराज ने कहा ः
यह जो एक टी.वी. चैनल पर हिन्दू संतों का स्टिंग ऑपरेशन दिखाया गया, उसको देखने के बाद ऐसा लगता है कि यह तो स्टिंग नहीं है, यह क्रिएट किया (बनाया) गया है । स्टिंग तो वह होता है जिसमें कहीं गलत काम हो रहा हो और खुफिया तौर से उसे रिकॉर्ड कर लिया जाय । यह तो स्टिंग के नाम पर धोखा है । मीडिया को चाहिए कि जो घटना हो रही है उसको दिखाये लेकिन यह तो विकृत, द्वेषपूर्ण, बदइरादे से खबर बनायी जा रही है... आप ही शिकायतकर्ता हो गये, आप ही जाँच-अधिकारी हो गये, आप ही वकील हो गये, आप ही न्यायाधीश हो गये और आप ही ने सजा सुना दी !!!
पीछे जो घटनाएँ घटी हैं हिन्दुस्तान में, उनमें आरुषी मर्डर केस में हुआ यह कि उसके पिता का जैसे ही नाम आया, चैनल्स ने यह दिखाना शुरू कर दिया कि देखिये एक कलियुगी पिता का कु-करतब, कलियुगी पिता ने अपनी बेटी की हत्या की ! (परंतु बाद में ऐसा सिध्द नहीं हो पाया है, यह सभी जानते हैं।) अभी शाइनी आहूजा वाला केस देखिये । (चैनलों की वजह से) शाइनी आहूजा खलनायक, अपराधी सिध्द हो गया किंतु उस नौकरानी ने कह दिया है कि 'मैंने किसीके कहने पर ऐसा कहा था' तो अगर वह निर्दोष साबित हो गया तो आज तक उसकी जो बदनामी हुई है वह क्या कोई टी.वी. चैनल वापस दे देगा? आरुषी के माता-पिता को छोड़ो, पूरे देश में बच्चे डरने लगे थे अपने माता-पिता से । ऐसी पत्रकारिता से हमारा सामाजिक ढाँचा कमजोर हो रहा है । इसलिए मीडिया से मैं अनुरोध करना चाहूँगा कि वह अपने अधिकारों की सीमा में रहकर काम करे क्योंकि किसीको भी भारत के कानून को तोड़ने का अधिकार नहीं दिया गया है।
भारत के संतों के खिलाफ स्टिंग के नाम पर यह जो दिखाया जा रहा है, मुझे लगता है कि कहीं-न-कहीं इसके पीछे बहुत बड़ी साजिश है। 'अखिल भारतीय संत समिति' का अध्यक्ष होने के नाते मैं इस बात को बड़े स्पष्ट तरीके से कहना चाहता हूँ कि अगर इस तरह के षड्यंत्र किसी और धर्म के धर्मगुरु के साथ हो जायें तो इस देश में आग लग जायेगी, तमाम तूफान खड़ा हो जायेगा। हमारा धर्म बड़ा ही सहनशील है जो हमारे संतों पर अत्याचार-दुष्प्रचार होता है तो भी हम सहन कर लेते हैं । आखिर में सोचो, कौन है इसके पीछे ? हिन्दू संतों के ही खिलाफ स्टिंग के नाम पर साजिश क्यों हो रही है ? इस पर भी सोचो । जब तक एक पक्ष देखा है, दूसरा पक्ष देखा ही नहीं तो आपको किसने अधिकार दिया कि किसीको मुजरिम ठहरा दें ? किसीको हत्यारा कहते हैं, किसीको दोषी, किसीको ढोंगी, किसीको पाखंडी, किसीको दुराचारी कहते हैं तो मैं तो नहीं समझता कि यह उचित है। जहाँ तक आसारामजी बापू का सवाल है, सुधांशु महाराज का सवाल है और जिन लोगों के खिलाफ स्टिंग देखने को मिला है, उसमें कहीं भी ऐसा नहीं लग रहा है । मान लीजिये, किसी आश्रम, मंदिर, मस्जिद या गुरुद्वारे में कोई व्यक्ति जाता है और कहता है कि मैं पीड़ित हूँ, मुझे शरण दे दो तो कौन ऐसा धर्म है जिसका धर्मगुरु उसकी पीड़ा को दूर करने के लिए उसे शरण नहीं देगा ? यह तो स्वाभाविक है। अब यह अलग बात है कि आपने सरल स्वभाव संतों को ठगना शुरू कर दिया है कि आप एक नाटक करके एक व्यक्ति भेजते हैं, कभी उनको पैसे का लोभ देने का प्रयास करते हैं, कभी वैदिक विश्वविद्यालय खोलने की बात करते हैं तो गलत काम संत-महात्मा नहीं कर रहे हैं, गलत काम आप कर रहे हैं क्योंकि आप गलत काम करने के लिए उनको प्रेरित कर रहे हैं। मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूँ कि आप संतों को धोखा दे के उनको ठग रहे हैं तो ठगी, छल-फरेब का मुकदमा आप पर लागू होना चाहिए ।
जिनके लाखों अनुयायी हैं, हजारों अनुयायी हैं, जिनकी इस देश में प्रतिष्ठा है, सम्मान है उनको आप एक मिनट में बदनाम कर देते हैं कि देखिये इस संत का काला कारनामा ! लाखों लोगों की भावनाओं से आप खेल रहे हैं । धार्मिक भावनाओं और धार्मिक आस्थाओं पर कुठाराघात कर रहे हैं ।
भारत का संविधान यह अधिकार देता है कि हम किसी भी धर्म को मान सकते हैं, किसी भी धर्मगुरु को मान सकते हैं; यह अपनी व्यक्तिगत आस्था है । तो आपकी आस्था से खिलवाड़ किया जा रहा है, यह कतई उचित नहीं है । इस पर रोक लगनी चाहिए और यह फैसला होना चाहिए कि आपको खबर दिखाने का अधिकार है, खबर बनाने का नहीं ।
एंकर ः महाराजजी ! यह क्यों किया जा रहा है?
महाराज ः इसमें छुपाने की बात ही नहीं है । मुझे साफ लग रहा है यह सब पैसे का, टी.आर.पी. का खेल है । हजारों करोड़ रुपये टी.वी. चैनलों ने इसी धंधे में लगा रखे हैं, जो कि गलत बात है । पैसा कमाने के लिए आप किसीको बदनाम करते हैं । बीस-बीस, पचास-पचास साल की जिनकी तपस्या है, उनसे आप एक गॉसिप (गप्प) कर रहे हैं, छल-फरेब कर रहे हैं । फिर आप उसे दिखायेंगे, वह भी तोड़-मरोड़ के । अगर जनवरी में आप उसको रिकार्ड करते हैं तो जून में दिखाते हैं। पाँच-छः महीने उसको आप एडिट करते हैं, उसमें स्क्रिप्ट कराते हैं, फेब्रिकेट करते हैं (झूठी बातें गढ़ते हैं) । यह बहुत बड़ा अपराध है, गुनाह है ।
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