
संतश्री आशारामजी आश्रम
संतश्री आशारामजी बापू मार्ग,,साबरमती अमदावाद-५
29-दिसम्बर-2012 शनिवार
प्रेस नोट
दिल्ली मे सामुहिक दुष्कर्म की शिकार “दामिंनी” की मौत
पर बापूजी ने संवेदना प्रकट की
भगवान सबका मंगल ही करते है - संतश्री आसाराम बापू
14 फरवरी को विश्वस्तर पर मनाया जायेगा “मातृ-पितृ पूजन दिवस” के रूप में उत्सव ग्राउण्ड (पटपड़गंज) में एकत्रित जन सैलाब को देखते हुए पूज्य बापू जी ने हरि ऊं को गूंजन कराया तथा राम-राम का जप कराया और उन्होेंने बताया कि राम नाम के जप से आपके कई नए रक्त कण बनते हैं और जब आप कर ताल से अर्थात् ताली बजाकर जप करते हो तो हाथों में कई ऐसे प्वाइंटों पर जोर पडत्रता है जिससे आपको अनजाने में कई स्वास्थ्य लाभ मिल जाते हैं। बापू जी ने कहा कि ऐसी- ऐसी लीलाएं भगवान करते हैं कि भगवान को स्वयं ही नहीं पता है। तुम्हारे शरीर में कितने बैक्टिरीरियां हैं क्या तुमको पता है। ऐसे ही भगवान का भी यही हाल है। भगवान कितने समर्थ्ज्ञ हैं ये भगवान को भी नहीं पता। भगवान या मां-बाप आप से नाराज हो ही नहीं सकते। औश्र जो नाराज हों वो मां-बाप हो ही नहीं सकते। क्रूोंकि भगवान और मां-बाप सिर्फ बाहरी रूप से आपको डांटते हैं। जिससे आपका भला हो परन्तु वो अंदर से कभ्ज्ञी नाराज नहीं होते। बाहय रूप् में केवल दिखता है। बस, आप सुख-दुःख में रूके नहीं उसे देखने वाले दृष्टा बनें। मंगल भवन अमंगल हारी भगवान और मां-बाप आपका कभ्ज्ञी अमंगल नहीं चाहते। वो आपका भला चाहते हैं क्रूोंकि आप जो करने वाले हैं भगवान वो भ्ज्ञी जानते हैं। सोचा मैं न कहीं जाऊंगा, यहीं बैठकर अब खाऊंगा सूरज उगने के बाद नहाने के बाद मैंने सोचा कि जो भी भगवान देना यहीं दे दे मैं कहीं नहीं जाऊंगा और मेरी सोच से पहले ही भगवान ने 3 बजे सोच से पहले ही पगडण्डी दिखाई और दूध फल लेकर सीधा मेरे पास आए। तो भगवान आप से पहले ापके दिल की जानते हैं। ये विवके कहां से आये सिर्फ और सिर्फ चिऊा की विज्ञांति से। अतः चिऊ की विश्रांति बहुत जरूरी है। लालाट पर तिलक करें जिससे आपको अच्छे विचार आयेंगे। आपका मंगल होगा। कितना भी कोई रोता आये सत्संग में फिर वो उतना दुःख लेकर नहीं जाएगा क्योंकि प्रभु हरि दुःख हर लेगें। जो उस पीड़िता लड़की के साथ हुआ वोग अगर दीक्षित होती तो ऐसा होता ही नहीं क्योंकि दूसरे से जो सुधार चाहते हो तो कुछ सुधार हमें स्वयं भ्ज्ञी करना होगा। कितने भी कानून बन जायें। पर अगर अमल करने वाले ही आपका शोषण करने लग जाये ंतो इस पर कौन सा कानून बनाओगे।
पाश्चात्य संस्कृति के बढ़ते कुप्रभाव पर विश्व विख्यात संत श्री आसराम बापू जीे ने एक धर्म प्रेरणा सभा रखी, जिसमें दूर-दराज से आये अखिल दिल्ली ससंघ साकेत के अध्यक्ष प्रज्ञानंद साकेत, उदासी अखाड़े से हरि चेतना,कालीका पीठाधीशवर से सुरेन्द्र अवधूत, ऋषिकेश से डा. उमाकान्त सरस्वती, रिद्वार से विनोद गिरी,हरिद्वार से डा. जगत राम उदासी, राष्ट्रीय अध्यक्ष यमुना रक्षक दल, लोकेश मुनि, वीरेन्द्र यूनिवर्सिटी, विश्व हिन्दू परिषद एवं राष्टीय स्वयं सेवक संघ के अंतराष्टीय अध्यक्ष से अशोक सिंघल आदि सहित कई जाने -माने संत इस धर्म प्रेरणा सभा का हिस्सा बने। क्योंकि संसार सदैव समस्या की बात करते हैं और एक संत ही है जो समाधान की बात करते हैं। चरित्र समाधान संतो ंके द्वारा दिया जाएगा इसका ही नाम है प्रेरणा सभा। जिस तरह वेटिलेटर पर रचो मरीज के लिए डॉक्टरों का विचार होता है कि ये मरीज ऊपर जाने वाला है। ठीक उसी प्रकार पूज्य बापूजी का कहना है कि ये 14 फरवरी को मनाया जाने वाला वेलेन्टाइन -डे बच्चे-बच्चियों का पतन की ओर ले जा रहा है। इससे बचना चाहिए। पूज्य बापू जी ने कहा कि- बहुत बड़ी विडम्बना है कि पाश्चात्य संस्कृति वाले भारतीय संस्कृति को अपना रहे हैं और हमारे बच्चे-बच्चियां पाश्चात्य संस्कृति की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। विकसित देशों में एक साल में 50 लाख कन्यायें गभवती हो जाती हैं। कुछ गर्भपात करवा लेती हैं। कुछ वेश्यावृति में चली जाती हैं। 316 करोड़ का दारू बिकता है हमारे भारत में। कितने हजारों बच्चे-बच्चियां अपनी नासमझी के कारण घर से भाग जाते हैं। कोई सरदार नहीं चाहता, कोई मुस्लमान नहीं चाहता, कोई पारसी नहीं चाहता हमारे बच्चे ऐसे हों और हिन्दू तो चाहता ही नहीं है। आई लव यू एक-दूसरे को कहना, फिर चूमा-चाटी करना अपना सत्यानाश करना है। इसी को ध्यान में रखते हुए पिछले 7 वषों से लगातारे प्रेरणा सभायें की जा रही हैं। और कई जगहों पर रंग भी लाई हैं। अभी खबर आई थी कि 4 लाख परिवारों ने मातृ-पितृ पूजन दिवस माया गया। इस पुणित कार्य को विश्वस्तर पर मनाने का संकल्प लिया है। जिससे कि सभी का कल्याण होगा। इससे वास्तविक प्रेम का विकास होगा। बेटे-बेटियां अपने माता- पिता में ईश्वरीय अंश देखें और माता-पिता बच्चों में ईश्वरीय अंश जगाये।। गणेश जी -कार्तिक में होड़ लगी कि कौन सबसे श्रेष्ठ है। कार्तिक तो पृथ्वी के चक्कर लगाने लगे। और गणेश जी ने विवके से काम लिया और माता-पिता अर्थात् शिव-पार्वती जी की परिक्रमा करके अपने माता-पिता के ऐसे चहेते बने कि आज उनकी पूजा सर्वप्रथम की जाती है। ये संस्कार ही तो हैं, जो आपको ऊपर उठाते या गिराते हैं।
इसी कड़ी में धर्म प्रेरणा सभा में आये विभिन्न संतों ने अपने- अपने विचार रखेः ा।विश्व हिन्दू परिषद एवं राष्टीय स्वयं सेवक संघ के अंतराष्टीय अध्यक्ष अशोक सिंघल ने कहा कि -मातृ देवो भवः, पितृ देवो भवः। इस महान संकल्प को पूरा करना, बापू का ही सामर्थ्य है कि जो इतनी बड़ी संस्कृति के साथ सीधा-सीधा संघर्ष कर रहे हैं।वेलेन्टइन-डे में कौन हिन्दू है जो जाना चाहेगा। पश्चिमी ताकतें बड़े जोर-शोर के साथ अपना गुलाम बनाने में लगी हैं आपस में लड़वाने की चेष्टा की जा रही है। ऐसे कानून बनाये जा रहे हैं कि मां-बाप अपने ही बच्चों को नहीं डांट सकते। अगर डांटते हैं तो कानून से उनको डंड देने का प्रावधान है। अगर गलत करने पर डांटेंगे नही ंतो कैसे सुधरेंगे बच्चे। लीविंग रिलेशनशिप को मान्यता दी गई है जो कि गलत है। कहां जा रहा है हमारा देश? क्या पाश्चात्य संस्कृति का गुलाम नहीं हो रहा ? मैं तो चाहता हूं पूरा संत मंडल इस काम में लग जाये। फिर कौन सही है कौन गलत है अपने आप ही पता लग जाएगा। -कालीका पीठाधीश्वर सुरेन्द्रनाथ अवधूत ने कहा कि- संस्कृति उसे कहा जाता है कि जिसमें संस्कार हों। बापू जी ने दिशा दी है , चिंतन किया है। इसके लिए उन्हें साधुवाद है। ये बहुत बड़ी विडम्बना है कि न परिवार मे, न विद्यालयों में ऐसी शिक्षायें दी जाती है, जिससे बच्चों में सही संस्कार पडे़, इसलिए बच्चे आज पतन की ओर बढते जा रहे हैं। जिसमें कुछ देने का सामर्थ्य हो उसे देचव कहा जाता है, इसलिए इनसे बड़े देव कौन हो सकते हैं। इसलिए सभी युवक-युवतियां संकल्प लें कि अपने माता- पिता का आदर करेंगे। अखिल दिल्ली संसघ के अध्यक्ष श्रा प्रज्ञानंद मह.ने कहा- जो आज है कल नहीं रहेंगे। संत हमेशा रहेंगे। क्योंकि संत बनाये नहीं जाते, वो पैदा होते हैं। जहां संत हों वहां कंुभ हो जाता है। संत की वाणी अमृत वाणी कहलाती है। स्वयं को भूखे रखकर दूसरों को भोजन कराना ही संस्कृति है। बापूजी को साधुवाद है जिन्होंने समाज को नया अच्छा विचार दिया है। हरिद्वार उदासीन अखाडे़ के हरिचेना महाराज ने कहा कि -वासनाओं के पताशे जहां -तहां परोसे जाते हैं। मां-बाप के लिए वृद्धाश्रम खोले जा रहे हैं।युवा आग के अंगारे की तरह हो गया है। पूज्य बापू जी ने संकल्प लिया है वो सपना जरूर पूरा होगा, क्योंकि मेरा भर वही सपना है। आज इस सभा में साफ दिखाई देता है। होली-दशहरा आते हैं। आकर चले जाते हैं।पर वेलेन्टाइन पर मां-बा पके पैर छूना तो एक त्यौहार दिखाई देता है। बापू जी को साधुवाद है। तेरे सोने दर ते बोलियां पाके... दुनिया तो वखरा है तेरा द्वार है...सबनू द्वारा तेरा दसना...के साथ उन्होंन अपने शब्दों की यहीं विराम दिय महामंडलेश्वर देवद्रानंद गिरि जी ने तो पूज्य बापू जी को भारत का कोहिपूर कहकर सम्बोधित किया। आज जो वातावरण है बहुत ही संवेदनशीन है। एक-दूसरे के प्रति प्रेम जगाना होगा। आज के अंधाधुन में विवेक से काम लेना होगा।इसके लिए आसाराम बापू के सत्संग में आना होगा। प्रेम तो पत्थर को भी भगवान बना देता है। पूज्य बापूजी के बारे में कहा कि- तूफां से तू गिरा नहीे, संकटों से तू डरा नहीं, किस्मत को दोष तूने दिया नहीं, कीचडों से तू सनां नहीं, दूखियों को तू भूला नहीं, दुश्मनों से तू रूका नहीं, यात्राओं से तू थका नहीं, सदा महकता रहेगा-सदा महकता रहेगा। सभी दिव्य नूर प्रकट करने वालों का, सारे तीर्थधामों का कोहिनूर है बापू। इसी तरह सभी संतों ने अपने- अपने विचार रखे, जिसे हजारों-लाखों भक्तों ने सुना इसका सीधा प्रसारण 167 देशों में किया गया और पूज्य बापू जी को साधुवाद दिया और सभी संतों ने एक जुट होकर 14 फरवरी को वेलेन्टाइन डे को मातृ-पितृ पूजन दिवस को विश्वस्तर पर मनाने को संकल्प लिया।