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‘मातृ-पितृ पूजन’ पुस्तक अब नये, आकर्षक अंदाज में !
विश्वमानव के उज्ज्वल भविष्य के लिए स्वर्णिम संकल्प...
मातृ-पितृ पूजन दिवस
‘‘हिन्दू भी चाहते हैं, ईसाई भी चाहते हैं, यहूदी भी चाहते हैं, मुसलमान भी चाहते हैं कि हमारे बेटे-बेटी लोफर न हों । ऐसा कोई माँ-बाप नहीं चाहता कि मेरी संतानें लोफर हों, हमारे मुँह पर लात मारें, आवारा की नाईं भटकें। तो सभीकी भलाई का मैंने संकल्प किया है ।’’
- पूज्य संत श्री आशारामजी बापू
यह उत्सव क्यों ?
* मातृ-पितृ पूजन दिवस = ‘‘दिव्य जीवन की शुरुआत’’
* इस दिन से रोज माता-पिता को प्रणाम करने का लेंगे संकल्प
* पायेंगे माता-पिता और सद्गुरु के जीवन-अनुभव से सीख
* करेंगे पूज्य बापूजी का ‘विश्वगुरु भारत’ का संकल्प साकार
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‘मातृ-पितृ पूजन दिवस’ विश्वव्यापी होगा ।
- पूज्य बापूजी
विश्वमानव के मांगल्य में रत
पूज्य संत श्री आशारामजी बापू
का परम हितकारी संदेश
प्रेम तो निर्दोष होता है, प्रेम तो अल्लाह से, परमात्मा से मिलाता है । अल्लाह कहो, गॉड कहो, भगवान कहो, परम सत्ता का ही नाम है ‘प्रेम’ । परम सुख, परम चेतना का नाम है ‘प्रेम’ । वही राम, रहीम और गॉड का असली स्वरूप है, इसीमें मानवता का मंगल है । सच्चे प्रेमस्वभाव से केवल भारतवासियों का ही नहीं, विश्वमानव का कल्याण होगा । लेकिन...
‘इन्नोसंटी रिपोर्ट कार्ड’ के अनुसार 28 विकसित देशों में हर साल 13 से 19 वर्ष की 12 लाख 50 हजार किशोरियाँ गर्भवती हो जाती हैं । उनमें से 5 लाख गर्भपात कराती हैं और 7 लाख 50 हजार कुँवारी माता बन जाती हैं । अमेरिका में हर साल 4 लाख 94 हजार अनाथ बच्चे जन्म लेते हैं और 30 लाख किशोर-किशोरियाँ यौन रोगों के शिकार होते हैं । यौन-संबंध करनेवालों में...
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मातृ-पितृ पूजन क्यों ?
माता-पिता ने हमसे अधिक वर्ष दुनिया में गुजारे हैं, उनका अनुभव हमसे अधिक है और सद्गुरु ने जो महान अनुभव किया है उसकी तो हमारे छोटे अनुभव से तुलना ही नहीं हो सकती । इन तीनों के आदर से उनका अनुभव हमें सहज में ही मिलता है । अतः जो भी व्यक्ति अपनी उन्नति चाहता है, उस सज्जन को...
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आधुनिक वैज्ञानिकों का मत
माता-पिता के पूजन से अच्छी पढ़ाई का क्या संबंध ? ऐसा सोचनेवालों को अमेरिका की ‘यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया’ के सर्जन व क्लिनिकल असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सू किम और ‘चिल्ड्रेन्स हॉस्पिटल ऑफ फिलाडेल्फिया, पेंसिल्वेनिया’ के एटर्नी एवं इमिग्रेशन स्पेशलिस्ट जेन किम के शोधपत्र के निष्कर्ष पर ध्यान देना चाहिए। अमेरिका में एशियन मूल के विद्यार्थी क्यों पढ़ाई में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करते हैं ? इस विषय पर शोध करते हुए उन्होंने यह पाया कि...
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‘मातृ-पितृ पूजन’ का इतिहास
एक बार भगवान शंकर के यहाँ उनके दोनों पुत्रों में होड़ लगी कि ‘कौन बड़ा ?’
कार्तिकेय ने कहा - ‘‘गणपति! मैं तुमसे बड़ा हूँ ।’’
गणपति - ‘‘आप भले उम्र में बड़े हैं लेकिन गुणों से भी बड़प्पन होता है ।’’ निर्णय लेने के लिए दोनों गये शिव-पार्वती के पास ।
शिव-पार्वती ने कहा - ‘‘जो सम्पूर्ण पृथ्वी की परिक्रमा करके पहले पहुँचेगा, उसीका बड़प्पन माना जायेगा ।’’
कार्तिकेय तुरंत अपने वाहन मयूर पर निकल गये पृथ्वी की परिक्रमा करने । गणपतिजी चुपके-से एकांत में चले गये । थोड़ी देर शांत होकर उपाय खोजा । फिर आये शिव-पार्वती के पास । माता-पिता का हाथ पकड़कर दोनों को ऊँचे आसन पर बिठाया, पत्र-पुष्प से उनके श्रीचरणों की पूजा की एवं प्रदक्षिणा करने लगे । एक चक्कर पूरा हुआ तो प्रणाम किया... दूसरा चक्कर लगाकर फिर प्रणाम किया... इस प्रकार माता-पिता की सात प्रदक्षिणाएँ कर लीं ।...
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* पूजन की विधि *
पूजन करानेवाला व्यक्ति धीरे-धीरे विधि बोलता जाय और निम्नलिखित मंत्रों एवं आरती का मधुर स्वर में गायन करता जाय । तदनुसार बच्चे और माता-पिता...
आरती - बच्चे-बच्चियाँ थाली में दीपक जलाकर माता-पिता की आरती करें...
(आरती की तर्ज - ॐ जय जगदीश हरे...)
ॐ जय जय मात-पिता, प्रभु गुरुजी मात-पिता ।
सद्भाव देख तुम्हारा - 2, मस्तक झुक जाता ॥ ॐ जय जय...
कितने कष्ट उठाये हमको जनम दिया, मइया पाला - बड़ा किया।
सुख देती, दुःख सहती - 2, पालनहारी माँ ॥ ॐ जय जय...
अनुशासित कर आपने उन्नत हमें किया, पिता आपने जो है दिया ।
कैसे ऋण मैं चुकाऊँ - 2, कुछ न समझ आता ॥ ॐ जय जय...
सर्व तीर्थमयी माता सर्व देवमय पिता, ॐ सर्व देवमय पिता ।
जो कोई इनको पूजे -2, पूजित हो जाता ॥ ॐ जय जय...
मात-पिता की पूजा गणेशजी ने की, श्रीगणेशजी ने की ।
सर्वप्रथम गणपति को - 2, ही पूजा जाता ॥ ॐ जय जय...
बलिहारी सद्गुरु की मारग दिखा दिया, सच्चा मारग दिखा दिया ।
मातृ-पितृ पूजन कर - 2, जग जय जय गाता ॥ ॐ जय जय...
मात-पिता प्रभु गुरु की आरती जो गाता, है प्रेम सहित गाता ।
वो संयमी हो जाता, सदाचारी हो जाता, भव से तर जाता ॥ ॐ जय जय...
लफंगे-लफंगियों की नकल छोड़, गुरु सा संयमी होता, गणेश सा संयमी होता ।
स्वयं आत्मसुख पाता - 2, औरों को पवाता ॥ ॐ जय जय...
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युगप्रवर्तक संत श्री आशारामजी बापू की जीवनयात्रा...
आत्मारामी, श्रोत्रिय, ब्रह्मनिष्ठ, योगिराज प्रातःस्मरणीय पूज्य संत श्री आशारामजी बापू ने आज भारत ही नहीं वरन् समस्त विश्व को अपनी अमृतवाणी से परितृप्त कर दिया है ।
जन्म व बाल्यकाल - बालक आसुमल का जन्म अखंड भारत के सिंध प्रांत के बेराणी गाँव में 17 अप्रैल 1941 को हुआ था । आपके पिता थाऊमलजी सिरुमलानी नगरसेठ थे तथा माता महँगीबा धर्मपरायणा और सरल स्वभाव की थीं । बाल्यकाल में ही आपश्री के मुखमंडल पर झलकते ब्रह्मतेज को देखकर आपके कुलगुरु ने भविष्यवाणी की थी कि ‘आगे चलकर यह बालक एक महान संत बनेगा, लोगों का उध्दार करेगा ।’ इस भविष्यवाणी की सत्यता आज किसीसे छिपी नहीं है ।
युवावस्था (विवेक-वैराग्य) - आपश्री का बाल्यकाल एवं युवावस्था विवेक-वैराग्य की पराकाष्ठा से सम्पन्न थे, जिससे आप अल्पायु में ही गृह-त्याग कर प्रभुमिलन की प्यास में जंगलों-बीहड़ों में घूमते-तड़पते रहे । नैनीताल के जंगल में स्वामी श्री लीलाशाहजी आपको सद्गुरुरूप में प्राप्त हुए । मात्र 23 वर्ष की अल्पायु में आपने पूर्णत्व का साक्षात्कार कर लिया । सद्गुरु ने कहा - ‘आज से लोग तुम्हें ‘संत आशारामजी’ के रूप में जानेंगे । जो आत्मिक दिव्यता तुमने पायी है उसे जन-जन में वितरित करो ।’
ये ही आसुमल ब्रह्मनिष्ठा को प्राप्त कर आज बड़े-बड़े दार्शनिकों, वैज्ञानिकों,नेताओं तथा अफसरों से लेकर अनेक शिक्षित-अशिक्षित साधक-साधिकाओं तक सभीको अध्यात्म-ज्ञान की शिक्षा दे रहे हैं, भटके हुए मानव-समुदाय को सही दिशा प्रदान कर रहे हैं ।...
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आप कहते हैं...
‘‘यह पुनीत व पुण्य शुरुआत है । हम तहेदिल से आपका समर्थन, आपका सहयोग और हृदय से वंदन करते हैं ।’’
- श्री कल्कि पीठाधीश्वर प्रमोद कृष्णम्जी महाराज, अध्यक्ष, उत्तर भारत, अखिल भारतीय संत समिति
‘‘यह दिवस समूचे हिन्दुस्तान में नये इतिहास का सृजन करेगा ।’’
- जैन समाज के आचार्य युवा लोकेश मुनिश्रीजी
‘‘माता-पिता पूजन दिवस बहुत ही अच्छा प्रयास है । आजकल के युवान-युवतियों को इसका महत्त्व बताना बहुत जरूरी है ।’’
- प्रसिद्ध गायिका अनुराधा पौडवाल
‘‘सांस्कृतिक उत्थान के लिए ‘वेलेंटाईन डे’ को ‘माता-पिता पूजन दिवस’ में बदलने जैसे प्रयास निरंतर हों ।’’
- प्रसिद्ध अभिनेत्री भाग्यश्री
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तुम्हारे जीवन में चार चाँद न लगें तो मेरी जिम्मेदारी !
- पूज्य बापूजी
डॉ. जे. मार्गन और दूसरे डॉक्टर लोग कहते हैं कि हिन्दुस्तान का ॐकार मंत्र बड़ा सफल है । ‘प्रणववाद’ ग्रंथ में ॐकार मंत्र से संबंधित 22 हजार श्लोकों का समावेश है । आपको मैं ॐकार का जप करने की रीति बताता हूँ । आपको...
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एकादशी व्रत माहात्म्य
मानव-जीवन का मुख्य उद्देश्य परमात्मप्राप्ति ही है । शारीरिक स्वास्थ्य, मनोबल और बुध्दि का सत्त्व इन तीनों से सम्पन्न मनुष्य ही भोग और मोक्ष पा लेता है । इसमें समझपूर्वक किये गये एकादशी आदि व्रत-उपवासों की अत्यंत महत्त्वपूर्ण भूमिका है । मनुष्य की सर्वांगीण उन्नति के सूत्र इनमें निहित हैं ।
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स्वस्थ सुखी सम्मानित जीवन जीने की कला
सर्वरोगनाशक व स्वास्थ्यप्रद स्थलबस्ति या अश्विनी मुद्रा…
घर में बरकत व सुख-शांति हेतु…
आरोग्यता व पुण्यप्रदायक प्रयोग…
तो भोजन बनेगा बल-पुष्टिदायक (टॉनिक)…
मधुमेह का अनुभूत अक्सीर इलाज…
शीत ऋतु में पाइये बल का खजाना…
(इन सबकी विस्तृत जानकारी के लिए पढ़ें ‘मातृ-पितृ पूजन’ पुस्तक)
आध्यात्मिक उन्नति हेतु
* ‘श्री आशारामायण’ के 108 पाठ करने से मनोकामनाएँ तो पूर्ण होती ही हैं, साथ ही आध्यात्मिक उन्नति भी होती है ।
ब्रह्मसंकल्प
पूज्य बापूजी का विश्वमानव के कल्याण के उद्देश्य से आकाश में फैलाया गया ब्रह्मसंकल्प - ‘‘14 फरवरी ‘मातृ-पितृ पूजन दिवस’ को अब अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर मनायेंगे । ‘मातृ-पितृ पूजन दिवस’ में पाँच भूत, देवी-देवता और मेरे साधक और मुसलमान, हिन्दू, ईसाई, पारसी सभी जुड़ जायें, ऐसा मैं संकल्प आकाश में फैला रहा हूँ । देवता सुन लें, यक्ष सुन लें, गंधर्व सुन लें, पितर सुन लें कि भारत और विश्व में मातृ-पितृ पूजन दिवस का कार्यक्रम मैं व्यापक करना चाहता हूँ ।’’
लफंगापन माने बेइज्जती
14 फरवरी को ‘वेलेंटाइन डे’ मनाकर दिन-दहाड़े विकारी चेष्टाएँ करनेवालों के खिलाफ एक ओर पुलिस ने उठाये कड़े कदम तो दूसरी ओर इस दिन लफंगापन के खिलाफ बैट व हॉकी स्टिक लेकर अभियान छेड़ती छात्राएँ ।
विशेष - * अपने परिचितों, व्यापारी मित्रों आदि से कम-से-कम 1000 पुस्तकों का सौजन्य कराने पर उनका नाम, फर्म का पता, विज्ञापन आदि पुस्तक पर छापा जायेगा ।
* 100 पुस्तकें लेने पर 20 पुस्तकें भेंटस्वरूप दी जायेंगी ।
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