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Periodicals Info

1. Rishi Prasad: (Download the latest Rishi Prasad Abstracts by clicking here)

    Rishi Prasad is the largest circulated spiritual monthly magazine in the world. Mainly divine nectar of Pujya Bapuji's latest satsangs is published in this magazine along with information like Ashram's welfare activities and various other useful information like health related tips, etc.

          ► There are about 2 Million Rishi Prasad subscribers across the world.

          ► With its ever increasing demand, Rishi Prasad is now being published in multiple languages like Hindi, English, Gujarati, Marathi, Telugu, Oriya etc.

 

2. Lok Kalyan Setu:

    Lok Kalyan Setu is a monthly magazine covering various ashram activities and is published in Hindi & Gujarati. 

 

  
Latest Articles
सदगुरु से क्या सीखें ?

पहली बात, गुरुजी से संयम की साधना सीख लेनी चाहिए।
ब्रह्मचर्य की साधना सीख लो। गुरु जी कहेंगे- "बेटा ! ब्रह्म में विचरण करना ब्रह्मचर्य है। शरीरों को आसक्ति से देखकर अपना वीर्य क्षय किया तो मन, बुद्धि, आयु और निर्णय दुर्बल होते हैं। दृढ़ निश्चय करके ʹૐ अर्यमायै नमः।ʹ का जप कर, जिससे तेरा ब्रह्मचर्य मजबूत हो। ऐसी किताबें न पढ़, ऐसी फिल्में न देख जिनसे विकार पैदा हों। ऐसे लोगों के हाथ से भोजन मत कर मत खा, जिससे तुम्हारे मन में विकार पैदा हों।"
दूसरी बात गुरु से सीख लो, अहिंसा किसे कहते हैं और हम अहिंसक कैसे बनें ?
बोलेः "मन से, वचन से और कर्म से किसी को दुःख न देना ही अहिंसा है।

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समस्त पापनाशक स्तोत्र

जो मनुष्य पापों का विनाश करने वाले इस स्तोत्र का पठन अथवा श्रवण करता है, वह शरीर, मन और वाणीजनित समस्त पापों से छूट जाता है एवं समस्त पापग्रहों से मुक्त होकर श्रीविष्णु के परम पद को प्राप्त होता है। इसलिए किसी भी पाप के हो जाने पर इस स्तोत्र का जप करें। यह स्तोत्र पापसमूहों के प्रायश्चित के समान है। कृच्छ्र आदि व्रत करने वाले के लिए भी यह श्रेष्ठ है। स्तोत्र-जप और व्रतरूप प्रायश्चित से सम्पूर्ण पाप नष्ट हो जाते हैं। इसलिए भोग और मोक्ष की सिद्धि के लिए इनका अनुष्ठान करना चाहिए।

 

 DetailViews: 18933

 

Oct 2014, Issue # 60 Diwali special

 

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सर्वकला भरपूर, प्रभु !

हमें मनुष्य रूप में जन्म इसीलिए मिला है कि हम इस विनाशी शरीर में रहते हुए भी अविनाशी आत्मा को जानकर जीते-जी मुक्ति का अनुभव कर सकें। इस नश्वर शरीर में रहकर भी जीवन्मुक्त होकर विचरण करते हुए उस शाश्वत के गीत गायें।
लेकिन मनुष्य का बड़े-में-बड़ा दुर्भाग्य है कि संसार के भोग-विलास में फँसकर, जगत के बाह्य आकर्षणों में फँसकर, विषय-विकार में उलझकर, मोह-माया और अहंकार में फँसकर भवसागर में गोते खा रहा है।

 DetailViews: 1244

 

श्वासकला का महत्व

प्राण अगर तालबद्ध चलने लग जायें तो सूक्ष्म बनेंगे। श्वास अगर तालबद्ध होगा तो दोष  अपने-आप दूर हो जायेंगे। अशांति अपने आप दूर होने लगेगी।
इन्द्रियों का स्वामी मन है और मन का स्वामी प्राण है।

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